पूर्व मंत्री केएन त्रिपाठी का मुख्य सचिव को पत्र, पलामू में एक ही परिवार के 5 मौतों पर MMCH को घेरा

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केएन त्रिपाठी की फाइल फोटो

KN Tripathi: पलामू के पड़वा प्रखंड के सिक्का गांव में अज्ञात बीमारी से एक ही परिवार के 5 लोगों की मौत होने के मामले में पूर्व मंत्री केएन त्रिपाठी ने मुख्य सचिव को पत्र लिखा है. पत्र में उन्होंने MMCH अस्पताल पर लापरवाही का आरोप लगाया है.

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पलामू से च‍ंद्रशेखर सिंह की रिपोर्ट

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KN Tripathi, पलामू: पलामू जिले के पड़वा प्रखंड अंतर्गत सिक्का गांव में पिछले 15 दिनों के भीतर एक अज्ञात बीमारी ने हंसते-खेलते परिवार को पूरी तरह उजाड़ दिया है. उस बीमारी के कारण परिवार के पांच सदस्यों की तड़प-तड़प कर मौत हो गई जिसके बाद पूरे इलाके में दहशत का माहौल है. इस दर्दनाक घटना पर सूबे के पूर्व मंत्री केएन त्रिपाठी ने गहरा दुख व्यक्त किया है. उन्होंने राज्य के मुख्य सचिव (Chief Secretary) को एक पत्र लिखकर इस पूरी त्रासदी के लिए स्वास्थ्य विभाग और स्थानीय अस्पताल प्रबंधन की घोर लापरवाही को जिम्मेदार ठहराया है.

MMCH अस्पताल पर गंभीर आरोप

मुख्य सचिव को भेजे गए पत्र में पूर्व मंत्री केएन त्रिपाठी ने सूबे की बदहाल स्वास्थ्य व्यवस्था की संवेदनहीनता को कटघरे में खड़ा किया है. उन्होंने आरोप लगाया कि जब परिवार के सदस्य शुरुआत में बीमार पड़े, तो उन्हें मेदिनीनगर के एमएमसीएच (MMCH) अस्पताल में भर्ती कराया गया था. आरोप है कि अस्पताल प्रबंधन ने बीमारी का सटीक पता लगाए बिना और बिना कोई उचित इलाज किए ही उन्हें जल्दबाजी में वहां से डिस्चार्ज (छुट्टी) कर दिया. अस्पताल की इसी घोर लापरवाही के कारण परिवार के अन्य सदस्य भी तेजी से इस अज्ञात संक्रमण की चपेट में आ गए. सही समय पर इलाज न मिलने के कारण एक मरीज ने घर पर ही दम तोड़ दिया, जबकि दो अन्य सदस्यों की मौत रांची के अस्पताल में इलाज के दौरान हो गई. इस परिवार के दो और सदस्य अभी भी रांची में जिंदगी और मौत की जंग लड़ रहे हैं.

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15 दिनों में उजड़ गई दुनिया, गांव में फैला खौफ

सिक्का गांव के ग्रामीणों के अनुसार, इस खौफनाक और अज्ञात बीमारी ने पूरे परिवार को संभलने तक का मौका नहीं दिया. एक-एक कर 15 दिनों में 5 लाशें उठने से पूरा गांव सदमे में है. लोग अब अपने और अपने बच्चों के स्वास्थ्य को लेकर बेहद डरे हुए हैं. ग्रामीणों का कहना है कि इतनी बड़ी आपदा के बाद भी स्वास्थ्य विभाग का रवैया पूरी तरह उदासीन और संवेदनहीन रहा है. अब तक गांव में बीमारी की पहचान करने या संक्रमण को रोकने के लिए विभाग द्वारा किसी विशेषज्ञ मेडिकल टीम या डॉक्टरों के विशेष बोर्ड को मौके पर नहीं भेजा गया है. यहां तक कि रांची के रिम्स (RIMS) अस्पताल में भी इलाज के दौरान किसी बड़े सीनियर डॉक्टर से मरीजों की स्थिति पर कोई राय-मशविरा नहीं लिया गया.

पूर्व मंत्री ने रखी ये मांग

पूर्व मंत्री केएन त्रिपाठी ने मुख्य सचिव से मांग की है कि इस रहस्यमयी बीमारी की जांच के लिए तुरंत एक उच्च स्तरीय स्पेशल मेडिकल बोर्ड का गठन कर सिक्का गांव भेजा जाए. उन्होंने इलाज में लापरवाही बरतने वाले एमएमसीएच के डॉक्टरों और दोषी अधिकारियों के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई (FII) करने और अपना सब कुछ खो चुके इस बेबस पीड़ित परिवार को तत्काल सरकार की ओर से उचित आर्थिक मुआवजा देने वकालत की है. त्रिपाठी ने चेतावनी दी है कि अगर दोषियों पर ऐक्शन और पीड़ितों को न्याय नहीं मिला, तो वे इसके खिलाफ उग्र आंदोलन के लिए बाध्य होंगे.

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