JPSC-JSSC CGL परीक्षा विवाद: पलामू सांसद ने की CBI जांच की मांग

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पलामू के सांसद विष्णु दयाल राम. फोटो: प्रभात खबर

झारखंड में JPSC और JSSC CGL भर्ती परीक्षाओं को लेकर छात्रों का आंदोलन तेज हो गया है. पलामू सांसद विष्णु दयाल राम ने छात्रों की मांगों का समर्थन करते हुए CBI जांच की मांग की है. जानिए क्यों उठी ये मांग.

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JPSC-JSSC CGL Exam: झारखंड में जेपीएससी और जेएसएससी-सीजीएल भर्ती परीक्षाओं को लेकर छात्रों का आंदोलन तेज हो गया है. इसे पर पलामू के सांसद विष्णु दयाल राम ने अपनी गंभीर चिंता व्यक्त की है. उन्होंने कहा है कि राज्य सरकार को छात्रों की आवाज दबाने के बजाय उनकी जायज मांगों का तुरंत समाधान करना चाहिए. जेपीएससी हो या जेएसएससी-सीजीएल, किसी भी भर्ती प्रक्रिया की पारदर्शिता और विश्वसनीयता से कोई समझौता नहीं किया जा सकता.

कार्रवाई अत्यंत दुर्भाग्यपूर्ण और निंदनीय

सांसद ने शांतिपूर्ण आंदोलन कर रहे छात्रों के साथ जेएमएम कार्यकर्ताओं एवं पुलिस द्वारा की गयी कथित बर्बरतापूर्ण मारपीट की कड़े शब्दों में निंदा की है. उन्होंने इस कार्रवाई को अत्यंत दुर्भाग्यपूर्ण और निंदनीय बताया. उन्होंने कहा कि छात्र अपराधी नहीं हैं. वे अपने अधिकार, भविष्य और न्याय की मांग को लेकर लोकतांत्रिक तरीके से अपनी आवाज उठा रहे हैं. छात्रों के साथ किसी भी प्रकार की हिंसा या दमन लोकतांत्रिक व्यवस्था के लिए उचित नहीं है. इस पूरे घटनाक्रम की निष्पक्ष जांच होनी चाहिए और दोषी पाए जाने वाले लोगों के विरुद्ध कड़ी कार्रवाई की जानी चाहिए.उन्होंने साफ शब्दों में कहा कि विवादित भर्ती परीक्षाओं की निष्पक्ष और स्वतंत्र सीबीआई जांच कराना ही अभ्यर्थियों के बीच विश्वास बहाल करने का एकमात्र उचित रास्ता है.

अपरिपक्व निर्णय और न्यायिक प्रक्रिया का सम्मान

सांसद ने कहा कि राज्य सरकार के कैबिनेट द्वारा नियुक्तियां रद्द करने के अपरिपक्व निर्णय के बाद उच्च न्यायालय द्वारा सरकारी आदेश के क्रियान्वयन पर अंतरिम रोक लगा दी गयी है. ऐसी स्थिति में सरकार को न्यायिक प्रक्रिया का पूरा सम्मान करना चाहिए. साथ ही, सरकार को ऐसा बीच का रास्ता निकालना चाहिए जिससे दोषी व्यक्ति बच न सकें और निष्पक्ष तरीके से नियुक्ति पाने वाले अभ्यर्थियों के साथ भी कोई अन्याय न हो.

2019 से अब तक की परीक्षाओं पर उठे सवाल

सांसद विष्णु दयाल राम ने कहा कि 14वीं जेपीएससी पीटी, जेपीएससी 11वीं-13वीं संयुक्त सिविल सेवा परीक्षा और जेएसएससी-सीजीएल समेत वर्ष 2019 से अब तक आयोजित विभिन्न भर्ती परीक्षाओं पर अभ्यर्थियों ने लगातार गंभीर सवाल उठाये हैं. इन परीक्षाओं की पूरी प्रक्रिया और परिणामों को लेकर फैले संदेह को दूर करना सीधे तौर पर सरकार की जिम्मेदारी है. उन्होंने मांग की कि यदि परीक्षाओं में कोई अनियमितता हुई है तो दोषियों की पहचान कर उन पर कठोर कार्रवाई होनी चाहिए. इसके साथ ही उन्होंने यह भी सुनिश्चित करने को कहा कि किसी भी निर्दोष अभ्यर्थी के भविष्य के साथ अन्याय न हो.

सीबीआई जांच से क्यों भाग रही सरकार?

पलामू सांसद ने राज्य सरकार की नीतियों पर भी तीखे सवाल खड़े किये. उन्होंने कहा कि जब राज्य सरकार ने खुद जेएसएससी-सीजीएल एवं अन्य नियुक्तियों को रद्द करने की घोषणा कर दी है, तो फिर वह इस पूरे मामले की सीबीआई जांच कराने से क्यों पीछे हट रही है. सरकार की यह दूरी पूरी तरह से समझ से परे है. सरकार को जनता और छात्रों के सामने यह स्पष्ट करना चाहिए कि यदि पूरी भर्ती प्रक्रिया पारदर्शी रही है, तो उसे किसी स्वतंत्र केंद्रीय एजेंसी से जांच कराने में क्या आपत्ति है. सरकार को चाहिए कि वह सीबीआई जांच के माध्यम से पूरे मामले की सच्चाई सामने लाए और दोषियों के विरुद्ध कड़ी कार्रवाई करते हुए योग्य एवं निर्दोष अभ्यर्थियों के भविष्य को सुरक्षित करे.

भविष्य के लिए ठोस व्यवस्था की मांग

सांसद ने इस बात पर विशेष जोर दिया कि भर्ती परीक्षाओं की पूरी प्रक्रिया को पारदर्शी एवं विश्वसनीय बनाने के लिए एक ठोस व्यवस्था सुनिश्चित की जाये. झारखंड के युवा अपने कठोर परिश्रम, अपने सुरक्षित भविष्य और न्याय की जायज मांग कर रहे हैं. ऐसे में सरकार का यह प्राथमिक दायित्व है कि वह युवाओं की आवाज को सुने, उनकी वास्तविक समस्याओं का त्वरित समाधान करे और राज्य की भर्ती परीक्षाओं की विश्वसनीयता को पुनः कायम रखे.

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सांसद विष्णु दयाल राम की मुख्य मांगें

  • वर्ष 2019 से अब तक जेपीएससी एवं जेएसएससी की सभी विवादित भर्ती परीक्षाओं की निष्पक्ष एवं स्वतंत्र सीबीआई जांच कराई जाये.
  • विशेष रूप से 14वीं जेपीएससी पीटी, जेपीएससी 11वीं-13वीं संयुक्त सिविल सेवा परीक्षा एवं जेएसएससी-सीजीएल से जुड़े आरोपों की गहन जांच हो.
  • जांच में दोषी पाये जाने वाले अधिकारियों, कर्मचारियों एवं अन्य जिम्मेदार व्यक्तियों के विरुद्ध कठोर कार्रवाई की जाये.
  • निष्पक्ष एवं पारदर्शी तरीके से नियुक्ति पाने वाले अभ्यर्थियों के हितों की पूरी तरह रक्षा की जाये.
  • छात्रों के साथ हुई कथित पुलिस एवं राजनीतिक कार्यकर्ताओं की मारपीट की निष्पक्ष जांच कर दोषियों पर तुरंत कार्रवाई की जाये.

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