आठ साल का इंतजार, तीन बार डेडलाइन फेल; फिर भी अधूरा केंद्रीय विद्यालय का भवन
केंद्रीय विद्यालय का भवन | Prabhat Khabar Network
पलामू केंद्रीय विद्यालय का भवन निर्माण आठ साल बाद भी अधूरा है. 403 छात्र मूलभूत सुविधाओं के अभाव में पढ़ाई करने को मजबूर हैं. जानें पूरी खबर.
रामनरेश तिवारी की रिपोर्ट
पलामूः जिले में केंद्रीय विद्यालय के विद्यार्थी वर्षों से अपने भवन का इंतजार कर रहे हैं. विद्यालय की स्थापना के करीब आठ वर्ष बाद भी भवन निर्माण का काम पूरा नहीं हो सका है. निर्माण पूरा करने के लिए तीन बार समय-सीमा बढ़ायी गयी, लेकिन इसके बावजूद भवन अधूरा पड़ा है. इसका सीधा असर विद्यालय में पढ़ने वाले 403 विद्यार्थियों की पढ़ाई और उन्हें मिलने वाली मूलभूत सुविधाओं पर पड़ रहा है.
2019 में मिली थी केंद्रीय विद्यालय की स्वीकृति
पलामू सांसद विष्णु दयाल राम के प्रयास से वर्ष 2019 में केंद्रीय विद्यालय की स्वीकृति मिली थी. विद्यालय की स्थापना 27 जुलाई 2020 को हुई. इसके बाद वैकल्पिक व्यवस्था के तहत चैनपुर स्थित सद्गुरु प्रतापहरि प्लस टू उच्च विद्यालय परिसर में केंद्रीय विद्यालय का संचालन शुरू किया गया. उस समय उम्मीद थी कि जल्द ही विद्यालय को अपना भवन मिल जायेगा, लेकिन वर्षों बाद भी यह इंतजार खत्म नहीं हुआ.
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2023 में शुरू हुआ भवन निर्माण, अब तक अधूरा
विद्यालय भवन का निर्माण वर्ष 2023 में शुरू हुआ था. निर्धारित योजना के अनुसार दो वर्ष के भीतर भवन का निर्माण पूरा किया जाना था और जुलाई 2025 तक विद्यालय को अपना भवन मिल जाना चाहिए था. लेकिन तय समय-सीमा में काम पूरा नहीं हुआ. इसके बाद संवेदक ने 31 अक्तूबर 2025 तक निर्माण पूरा करने का आश्वासन दिया. यह समय-सीमा भी बीत गयी.
इसके बाद 31 मार्च 2026 तक निर्माण पूरा करने की बात कही गयी, लेकिन अगस्त माह भी गुजर गया और भवन अब तक अधूरा पड़ा है. बार-बार समय-सीमा बढ़ने के बावजूद निर्माण पूरा नहीं होने से विद्यार्थियों को वैकल्पिक परिसर में ही पढ़ाई करनी पड़ रही है.
कमरों की कमी से पढ़ाई भी प्रभावित
वर्तमान में केंद्रीय विद्यालय में 403 विद्यार्थी शिक्षा ग्रहण कर रहे हैं. वैकल्पिक परिसर में पर्याप्त कमरे और अन्य मूलभूत सुविधाएं उपलब्ध नहीं हैं. विद्यार्थियों के अनुसार, कमरों की कमी के कारण कक्षाओं के संचालन और विद्यार्थियों को बैठाने में परेशानी होती है. इसका असर पढ़ाई के माहौल पर भी पड़ रहा है.
विद्यालय में पर्याप्त शौचालय की सुविधा भी नहीं है. इससे विद्यार्थियों के साथ-साथ शिक्षकों को भी परेशानी का सामना करना पड़ता है. विशेष रूप से महिला शिक्षकों को शौचालय की कमी के कारण असुविधा होती है. ऐसे में केंद्रीय विद्यालय जैसे शिक्षण संस्थान में वर्षों से मूलभूत सुविधाओं का अभाव व्यवस्था पर सवाल खड़ा कर रहा है.
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भवन निर्माण विद्यालय प्रशासन के अधिकार क्षेत्र में नहीं : प्राचार्य
विद्यालय के प्राचार्य मानिक कुमार ने कहा कि अपना भवन नहीं होने के कारण परेशानी तो हो रही है, लेकिन भवन निर्माण कराना विद्यालय प्रशासन के अधिकार क्षेत्र में नहीं है. भवन उपलब्ध होने के बाद शिक्षा व्यवस्था को बेहतर बनाना विद्यालय प्रशासन की जिम्मेदारी होगी. उन्होंने कहा कि जब तक विद्यालय को अपना भवन नहीं मिलता, तब तक उपलब्ध संसाधनों के आधार पर ही संचालन करना मजबूरी है.
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