54 लावारिस शवों का अपने खर्च पर कराया अंतिम संस्कार, बैजनाथ सिंह बने मानवता की मिसाल

Updated:
विज्ञापन

बैजनाथ (फाइल फोटो )| Prabhat Khabar Network

पलामू के बैजनाथ सिंह ने मानवीय सेवा की मिसाल पेश करते हुए अब तक 54 लावारिश शवों का अपने निजी खर्च पर सम्मानजनक दाह संस्कार किया है। पूरी खबर पढ़ें।

विज्ञापन

मेदिनीनगर. पलामू प्रमंडलीय मुख्यालय मेदिनीनगर शहर के हमीदगंज निवासी बैजनाथ सिंह मानवीय सेवा की एक मिसाल पेश कर रहे हैं. वर्ष 2023 से 24 अगस्त 2026 तक उन्होंने अपने निजी खर्च से 54 लावारिस शवों का दाह संस्कार कराया है. अस्पताल में दुर्घटना या बीमारी से किसी व्यक्ति की मौत होने के बाद जब 72 घंटे तक पहचान और परिजनों के आने का इंतजार किया जाता है और कोई दावेदार सामने नहीं आता, तब शव को लावारिस घोषित किया जाता है. इसके बाद पुलिस की सूचना पर बैजनाथ सिंह अंतिम संस्कार की जिम्मेदारी उठाते हैं.

आपके शहर में

विज्ञापन

पुलिस की सूचना पर संभालते हैं अंतिम संस्कार की जिम्मेदारी

बैजनाथ सिंह बताते हैं कि अस्पतालों में कई ऐसे मरीज होते हैं, जिनकी इलाज के दौरान मौत हो जाती है और उनके पास कोई परिजन मौजूद नहीं होता. ऐसे मामलों में शव की पहचान नहीं हो पाने पर वह स्वयं अंतिम संस्कार कराने के लिए आगे आते हैं. मेदिनीनगर स्थित हरिश्चंद्र घाट तक शव पहुंचाने की जिम्मेदारी पुलिस की रहती है, जबकि कफन, लकड़ी और अन्य आवश्यक सामग्री का पूरा खर्च बैजनाथ सिंह अपनी जेब से उठाते हैं.

2023 से निभाते आ रहे जिम्मेदारी

बैजनाथ सिंह के अनुसार, 21 नवंबर 2025 तक वह अपने निजी खर्च पर 38 लावारिस शवों का दाह संस्कार करा चुके थे. इसके बाद भी उनकी यह सेवा लगातार जारी रही. 2026 में उन्होंने कई लावारिस शवों का अंतिम संस्कार कराया. वर्ष 2026 में 25 और 29 अप्रैल को एक-एक लावारिस शव का दाह संस्कार कराया गया. इसके अलावा 16, 20 और 28 मई को भी एक-एक शव का अंतिम संस्कार कराया. 18 और 23 जून को एक-एक लावारिस शव का दाह संस्कार कराया गया. पांच जुलाई को अलग-अलग तीन लावारिस शवों का अंतिम संस्कार कराया गया. इसके बाद 24 अगस्त 2026 को भी एक लावारिस शव का अपने निजी खर्च पर दाह संस्कार कराया. इस तरह वर्ष 2023 से 24 अगस्त 2026 तक उनके द्वारा कराये गये अंतिम संस्कार की संख्या 54 हो गयी.

साधारण परिवार से होने के बावजूद लगातार कर रहे सेवा

बैजनाथ सिंह साधारण परिवार से आते हैं, लेकिन इसके बावजूद वर्षों से इस संवेदनशील सेवा कार्य को लगातार निभा रहे हैं. उनका कहना है कि किसी व्यक्ति की मृत्यु के बाद अंतिम संस्कार होना उसका मानवीय अधिकार है. जब किसी मृत व्यक्ति का कोई अपना मौजूद नहीं होता, तो ऐसे समय में समाज के किसी व्यक्ति को आगे आकर यह जिम्मेदारी निभानी चाहिए.

ये भी पढ़ें: पलामू : जेलहाता में देर रात युवक को लगी गोली, एमएमसीएच में चल रहा इलाज

सामाजिक कार्यकर्ताओं से सहयोग नहीं मिलने का मलाल

बैजनाथ सिंह ने कहा कि शहर में कई सामाजिक कार्यकर्ता सक्रिय नजर आते हैं और अलग-अलग क्षेत्रों में सेवा कार्य करते हैं. लेकिन लावारिस शवों के अंतिम संस्कार जैसी बेहद संवेदनशील सेवा में अब तक किसी ने सहयोग के लिए आगे आने की पहल नहीं की. उन्होंने इसे समाज के लिए चिंता का विषय बताया.

ये भी पढ़ें: ईद मिलादुन्नबी पर हरिहरगंज में निकला जुलूस, अमन और भाईचारे का दिया संदेश

मृत्यु के बाद अंतिम संस्कार से वंचित न रहे

उनका कहना है कि वह अपनी क्षमता के अनुसार यह सेवा जारी रखेंगे. उनका प्रयास है कि कोई भी लावारिस व्यक्ति मृत्यु के बाद अंतिम संस्कार से वंचित न रहे. बैजनाथ सिंह की यह पहल समाज में मानवीय संवेदना और सामाजिक जिम्मेदारी की एक मिसाल पेश करती है.


विज्ञापन

Prabhat Khabar App :

देश, एजुकेशन, मनोरंजन, बिजनेस अपडेट, धर्म, क्रिकेट, राशिफल की ताजा खबरें पढ़ें यहां. रोजाना की ब्रेकिंग हिंदी न्यूज और लाइव न्यूज कवरेज के लिए डाउनलोड करिए

Download from Google PlayDownload from App Store
विज्ञापन
Sponsored Linksby Taboola