बैंक ग्राहकों के लिए बड़ी खबर: 28 सितंबर से 3 दिन बंदी, 26 अक्टूबर से अनिश्चितकालीन आंदोलन की चेतावनी
हड़ताल के दौरान अपनी मांगों के समर्थन में नारेबाजी करते बैंककर्मी. | Prabhat Khabar Network
यूनाइटेड फोरम ऑफ बैंक यूनियंस ने पांच दिवसीय बैंकिंग व्यवस्था की मांग को लेकर राष्ट्रव्यापी हड़ताल का आह्वान किया है.जानें पूरी खबर और आगे की रणनीति.
संवाददाता, पाकुड़: पांच दिवसीय बैंकिंग व्यवस्था लागू करने समेत विभिन्न लंबित मांगों को लेकर यूनाइटेड फोरम ऑफ बैंक यूनियंस (UFBU) के राष्ट्रव्यापी आह्वान पर शुक्रवार को बैंक कर्मचारियों एवं अधिकारियों ने एकदिवसीय हड़ताल की. इसका असर पाकुड़ क्षेत्र में भी देखने को मिला, जहां विभिन्न बैंकों के कर्मचारियों और अधिकारियों ने हड़ताल में सक्रिय भागीदारी की.
हड़ताल के दौरान बैंककर्मियों ने अपनी मांगों के समर्थन में नारेबाजी की और एकजुटता प्रदर्शित की. आंदोलन का मुख्य मुद्दा पांच दिवसीय बैंकिंग व्यवस्था लागू करना और बैंक कर्मचारियों की लंबित मांगों का शीघ्र समाधान रहा.
SBI से लेकर बैंक ऑफ इंडिया तक दिखी एकजुटता
हड़ताल को सफल बनाने के लिए बैंक यूनियनों के प्रतिनिधियों ने विभिन्न शाखाओं के कर्मचारियों से संपर्क कर उन्हें आंदोलन में शामिल होने के लिए प्रेरित किया.
स्टेट बैंक ऑफ इंडिया, बैंक ऑफ इंडिया, यूनियन बैंक ऑफ इंडिया, सेंट्रल बैंक ऑफ इंडिया और केनरा बैंक समेत विभिन्न बैंकों के कर्मचारियों एवं अधिकारियों के बीच हड़ताल को लेकर एकजुटता देखने को मिली.
हड़ताल के दौरान केनरा बैंक से असद कमरान और सुबोध कुमार तथा बैंक ऑफ इंडिया से सौमित्र सरकार, सौविक, शांति मुर्मू, देबलिना गोस्वामी, अनुरंजन आनंद, सुरेश राय और फ्रांसिस हेम्ब्रम समेत अन्य बैंककर्मियों ने सक्रिय भागीदारी की.
इसके अलावा विकास हांसदा, अवनीकांत, सत्यजीत, मीनू मुर्मू, शशांक झा, अमित, सूरज, शुभम और गुलाम अम्बिया समेत विभिन्न बैंकों के दर्जनों कर्मचारी एवं अधिकारी भी आंदोलन में शामिल रहे.
दो साल से ज्यादा समय से अटकी है पांच दिवसीय बैंकिंग व्यवस्था
यूएफबीयू के अनुसार, पांच दिवसीय बैंकिंग व्यवस्था लागू करने की मांग काफी पुरानी है. यूनियन का कहना है कि इस मुद्दे पर कई बार समझौते और बातचीत हो चुकी है, लेकिन अंतिम सरकारी मंजूरी अब तक नहीं मिल सकी है.
यूनियन के हड़ताल नोटिस के अनुसार, 23 मई 2015 के समझौते एवं संयुक्त पत्र में सभी शनिवारों को अवकाश घोषित करने की दिशा में सहमति बनी थी. इसके बाद 11 नवंबर 2020 के समझौते में भी इस विषय पर चर्चा हुई.
वहीं, 7 दिसंबर 2023 के समझौता ज्ञापन में सभी शनिवारों को बैंकिंग उद्योग के लिए अवकाश घोषित करने की सिफारिश की गयी. इसके बाद 8 मार्च 2024 के 12वें द्विपक्षीय समझौते एवं संयुक्त पत्र में आवश्यक सरकारी मंजूरी के बाद इसे लागू करने की बात कही गयी थी.
यूनियन नेताओं का आरोप है कि इसके बावजूद अंतिम सरकारी मंजूरी में लगातार देरी हो रही है.
आश्वासन के बाद भी नहीं निकला समाधान
बैंक यूनियनों के अनुसार, इस मुद्दे पर सरकार के स्तर पर कई दौर की बातचीत हो चुकी है. मार्च 2025 में प्रस्तावित हड़ताल के दौरान भी उच्च स्तर पर मामले पर विचार किए जाने का आश्वासन दिया गया था, जिसके बाद आंदोलन स्थगित कर दिया गया था.
हालांकि, अपेक्षित निर्णय नहीं होने से बैंक कर्मचारियों और अधिकारियों में असंतोष बढ़ता गया. यूएफबीयू ने 27 जनवरी 2026 को भी पांच दिवसीय बैंकिंग व्यवस्था समेत विभिन्न मांगों को लेकर विरोध प्रदर्शन किया था.
इसके बावजूद ठोस निर्णय नहीं होने पर 11 सितंबर 2026 को राष्ट्रव्यापी हड़ताल का आह्वान किया गया.
28 से तीन दिन बैंक बंदी, फिर अनिश्चितकालीन आंदोलन
बैंक कर्मचारियों के आंदोलन को लेकर अब अगला चरण और बड़ा होने वाला है. यूएफबीयू के कार्यक्रम के अनुसार 28, 29 और 30 सितंबर को तीन दिवसीय राष्ट्रव्यापी बैंक बंदी की जाएगी.
इसके बाद भी मांगों का समाधान नहीं होने पर 26 अक्टूबर से अनिश्चितकालीन हड़ताल शुरू करने की चेतावनी दी गयी है.
यूनियनों ने स्पष्ट किया है कि पांच दिवसीय बैंकिंग व्यवस्था समेत अन्य लंबित मांगों के समाधान तक आंदोलन को चरणबद्ध तरीके से जारी रखा जाएगा.
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