119 साल बाद रानीगंज-गझंडी रेलखंड पर बदला इतिहास, अब दौड़ेंगे कोयले से लदे आधुनिक BOBR रेक

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ट्रेन से कोयले की ढुलाई की प्रतीकात्म तस्वीर

गुरपा-गझंडी रेलखंड पर टनल की ऊंचाई बढ़ने से कोयला परिवहन आसान हुआ. अब एनटीपीसी संयंत्रों तक कोयला तेजी से पहुंचेगा, जिससे माल ढुलाई में समय की बचत होगी.

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झुमरीतिलैया से सुजल भदानी की रिपोर्ट

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6 दिसंबर 1906 को अस्तित्व में आए रानीगंज-गझंडी रेलखंड ने 119 साल बाद परिवहन के क्षेत्र में नया इतिहास रचा है. धनबाद रेल मंडल के कोडरमा-गया रेलखंड के गुरपा-गझंडी घाट सेक्शन में अब कोयले से लदे बीओबीआर वैगन का नियमित परिचालन शुरू हो गया है. इस रेलखंड की तीन सुरंगों की सीमित ऊंचाई के कारण आधुनिक बीओबीआर वैगन का परिचालन अब तक संभव नहीं था. रेलवे ने सुरंगों के रीडिजाइन और डाइमेंशन बढ़ाने का काम पूरा कर इस बाधा को दूर कर दिया है. सुरंगों में संरचनात्मक बदलाव और तकनीकी कार्य आइआइटी-आइएसएम धनबाद की तकनीकी विशेषज्ञता के सहयोग से पूरा किया गया.

रेलवे के अनुसार, इस कार्य से जीसी सेक्शन पर कोयला परिवहन अधिक तेज, सुगम और प्रभावी हो सकेगा. पूर्व में बीओबीआर रेक को बड़काकाना रूट से चलाया जाता था. हजारीबाग टाउन के बनादाह साइडिंग से कोडरमा के रास्ते बीओबीआर रेक का परिचालन किया जाएगा. अप और डाउन दोनों लाइनों पर पहले खाली और फिर लोडेड बीओबीआर रेक का सफल ट्रायल किया गया. इसके बाद इस मार्ग से नियमित कोयला ढुलाई शुरू कर दी गयी है.

धनबाद से बाढ़ तक 250 किमी दूरी होगी कम

नए रेल मार्ग से धनबाद मंडल से बाढ़ स्थित एनटीपीसी संयंत्र तक कोयला पहुंचाने में अप-डाउन मिलाकर करीब 250 किलोमीटर की दूरी कम होगी. इससे मालगाड़ियों के समय में लगभग पांच घंटे की बचत होने की उम्मीद है. पहले बीओबीआर रेक को प्रधानखांटा-आसनसोल-झाझा मार्ग से भेजा जाता था.

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बाढ़, बरौनी और सलाकाटी तक तेज पहुंचेगा कोयला

गुरपा-गझंडी घाट सेक्शन के जरिए बाढ़, बरौनी और सलाकाटी स्थित एनटीपीसी बिजली संयंत्रों तक कोयले की आपूर्ति का रास्ता अधिक सीधा हो जाएगा. नए मार्ग से लोडेड रेक के साथ खाली बीओबीआर रेक भी धनबाद मंडल लौट सकेंगे. इससे रेक का टर्नअराउंड टाइम घटेगा और उपलब्धता बढ़ेगी. परिणामस्वरूप धनबाद मंडल में कोयला लोडिंग और माल ढुलाई की क्षमता बढ़ने की संभावना है.

160 किमी की रफ्तार के लिए भी चल रहा काम

नयी दिल्ली-हावड़ा ग्रैंड कॉर्ड सेक्शन पर ट्रेनों की रफ्तार 160 किमी प्रति घंटे तक बढ़ाने के लिए भी रेलवे स्तर पर तेजी से काम चल रहा है. करीब तीन माह पूर्व महाप्रबंधक और धनबाद डीआरएम की मौजूदगी में पंडित दीनदयाल उपाध्याय जंक्शन से कोडरमा होते हुए धनबाद तक 180 किमी प्रति घंटे की गति का स्पीड ट्रायल किया गया था. ट्रायल के दौरान इंजन में रखे ग्लास में पानी तक नहीं छलका, जिसे सफल परीक्षण के तौर पर देखा गया.

दिल्ली-हावड़ा मार्ग पर ट्रैक के दोनों ओर मवेशियों और अनधिकृत यात्री प्रवेश को रोकने के लिए सुरक्षा दीवार का निर्माण भी किया जा रहा है. वहीं दानकुनी से लुधियाना तक मालगाड़ियों के लिए अतिरिक्त रेल लाइन बिछाने की योजना पर भी काम जारी है. इधर कोडरमा-हजारीबाग-बड़काकाना रेलखंड के दोहरीकरण का काम तेजी से चल रहा है. कोडरमा-तिलैया-राजगीर रेललाइन को भी 2027 में शुरू किए जाने का लक्ष्य है.

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