झुमरी तिलैया में श्रद्धा के साथ मनाया गया बछ बारस, महिलाओं ने गौमाता और बछड़े की पूजा कर मांगी संतान की सलामती
बछ बारस के अवसर पर महिलाओं ने गौमाता और बछड़े की पूजा कर परिवार की सुख-समृद्धि की कामना की. जानें इस पावन पर्व की परंपरा और धार्मिक महत्व.
झुमरीतिलैया से सुजल भदानी की रिपोर्ट
झुमरीतिलैया(कोडरमा). झुमरी तिलैया में राजस्थानी समाज ने बछ बारस (गोवत्स द्वादशी) का पर्व श्रद्धा और पारंपरिक रीति-रिवाजों के साथ मनाया. यह पर्व भाद्रपद कृष्ण पक्ष की द्वादशी तिथि को मनाया गया. घर-घर महिलाओं ने गौमाता व बछड़े का पूजन कर पुत्रों की सलामती, लंबी आयु तथा परिवार की सुख-समृद्धि की कामना की.
गौमाता की पूजा कर मांगी बच्चों की खुशहाली
एक माँ के रूप में, मैं बस यही चाहती हूँ कि मेरे बच्चे हमेशा स्वस्थ और खुश रहें, यही कामना लेकर मैंने आज गौमाता का पूजन किया. इस अवसर पर महिलाओं ने गौमाता को रोटी, हरा चारा और नैवेद्य अर्पित किया.
बाजरे का सोगरा और अंकुरित अनाज की सब्जी बनी
घरों में बाजरे का पौष्टिक सोगरा और अंकुरित अनाज से बनी स्वादिष्ट सब्जी बनाई गई. परंपरा के अनुसार इस दिन गाय के दूध के स्थान पर भैंस या बकरी के दूध एवं उससे बने घी का उपयोग किया गया.
भगवान श्रीकृष्ण से जुड़ी है पर्व की मान्यता
कहते हैं कि भगवान श्रीकृष्ण के जन्म के बाद, मां यशोदा ने इसी दिन गौमाता की पूजा की थी. धर्मग्रंथों में गौसेवा और गौभक्ति को सर्वोच्च पुण्यदायी माना गया है.
श्री राणी सती मंदिर में भी दिखा पर्व का विशेष महत्व
यह पर्व केवल घरों तक ही सीमित नहीं रहा, बल्कि श्री राणी सती मंदिर में भी इसका विशेष महत्व देखा गया. इधर श्री राणी सती मंदिर में चल रहे भादी अमावस्या महोत्सव के दौरान भी महिलाओं के लिए भैंस के दूध और घी से बने प्रसाद की विशेष व्यवस्था की गई, जिससे बछ बारस की परंपरा का पालन हुआ. उन्होंने इसे देर शाम श्रद्धापूर्वक ग्रहण किया.
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