खूंटी में बारिश पर भारी पड़ा आस्था का उत्साह: देर रात तक मांदर की थाप पर थिरके लोग, सांसद कालीचरण मुंडा व अर्जुन मुंडा पहुंचे करम अखड़ा
करम पर्व में नृत्य करते सांसद, पूर्व मुख्यमंत्री, और पूर्व मंत्री | Prabhat Khabar Network
खूंटी में करम पर्व का पारंपरिक उत्साह. जानिए भाई-बहन के प्रेम, कर्म और प्रकृति से जुड़े इस अनूठे उत्सव की कथाएं और उल्लास.
खूंटी. जिले में मंगलवार को भाई-बहन के अटूट प्रेम और प्रकृति की पूजा का पावन पर्व 'करम' धूमधाम व पारंपरिक उत्साह के साथ मनाया गया. शहर से लेकर ग्रामीण इलाकों तक के विभिन्न करम अखाड़ों में विधि-विधान से करम डाल की स्थापना कर पूजा-अर्चना की गई. पूजा के उपरांत खूंटी के करम अखाड़ा में सामूहिक करम महोत्सव का भव्य आयोजन हुआ.
देर रात पहुंचे पूर्व सीएम अर्जुन मुंडा
देर रात सांसद कालीचरण मुंडा, पूर्व मुख्यमंत्री अर्जुन मुंडा और पूर्व मंत्री नीलकंठ सिंह मुंडा भी करम अखाड़ा पहुंचे. उन्होंने उपस्थित लोगों को पर्व की शुभकामनाएं देते हुए करमा-धरमा की पौराणिक लोककथा से प्रेरणा लेने और अपनी संस्कृति को सहेजने की अपील की.
झमाझम बारिश भी नहीं डिगा सकी श्रद्धालुओं का हौसला
उत्सव के दौरान झमाझम बारिश के बावजूद लोगों के उत्साह में कोई कमी नहीं आई. बारिश से बचने के बजाय महिलाएं, पुरुष और युवा मांदर व नगाड़े की थाप पर देर रात तक झूमते रहे. करम अखाड़ा के अलावा जोजोटोली, बड़ाइक टोली, खूंटी टोली और तोरपा रोड समेत शहर के अन्य इलाकों में भी करम पूजा और सांस्कृतिक कार्यक्रम आयोजित किए गए.
बुजुर्गों ने जहां परंपराओं व कथाओं को नई पीढ़ी तक पहुंचाया, वहीं युवाओं ने अपनी ऊर्जा से सांस्कृतिक विरासत को जीवंत रखा.
मेहनत और पारिवारिक एकता का संदेश
लोक परंपराओं में करम पर्व से जुड़ी करमा और धरमा दो भाइयों की कथा अत्यंत महत्वपूर्ण मानी जाती है. मान्यता है कि जब करमा से करम देवता का अनादर हुआ, तो उसके जीवन में कठिन परिस्थितियां आ गईं. बाद में भूल का एहसास होने पर उसने श्रद्धापूर्वक करम डाल की स्थापना कर पूजा की, जिससे उसके जीवन में सुख-समृद्धि लौट आई.
यह कथा समाज को मेहनत, सत्कर्म, प्रकृति के प्रति सम्मान, भाईचारे और परिवार की एकजुटता का गहरा संदेश देती है.
प्रकृति और मानव के अटूट रिश्ते का प्रतीक
करम पर्व केवल एक धार्मिक अनुष्ठान नहीं, बल्कि प्रकृति, कृषि और मानव जीवन के गहरे जुड़ाव को दर्शाने वाला लोकपर्व है. अखाड़े में करम वृक्ष की डाल स्थापित कर खेती-किसानी और समृद्धि के लिए आभार व्यक्त किया जाता है.
पारंपरिक वेशभूषा में सजे युवक-युवतियों का सामूहिक नृत्य सामाजिक एकता और समरसता की खूबसूरत तस्वीर पेश करता है, जहां उम्र और भेदभाव से परे होकर पूरा समाज एक साथ प्रकृति की आराधना करता है.
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