डॉक्टर मुर्दे को जमीन पर रख करते हैं चिर-फाड़

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जामताड़ा : जिले में पोस्टमार्टम हाउस की स्थिति बदहाल है. सदर अस्पताल से करीब छह किलोमीटर की दूरी पर टाउन थाना के पीछे नया पोस्टमार्टम हाउस तो बना दिया गया है परंतु अबतक इसे चालू नहीं किया गया है. वही पुराने पोस्टमार्टम हाउस की भी स्थिति काफी दयनीय है. नये भवन के पास ही स्थित […]

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जामताड़ा : जिले में पोस्टमार्टम हाउस की स्थिति बदहाल है. सदर अस्पताल से करीब छह किलोमीटर की दूरी पर टाउन थाना के पीछे नया पोस्टमार्टम हाउस तो बना दिया गया है परंतु अबतक इसे चालू नहीं किया गया है. वही पुराने पोस्टमार्टम हाउस की भी स्थिति काफी दयनीय है. नये भवन के पास ही स्थित पुराने पोस्टमार्टम हाउस जंगल-झाड़ से लैस है. पुराने पोस्टमार्टम हाउस में लाइटिंग की भी व्यवस्था नहीं है. जबकि पोस्टमार्टम हाउस रोशनीयुक्त होना चाहिए. रोशनी के अभाव में मुर्दो की चिरफाड़ बहार नीचे जमीन रख कर ही करना पड़ता है. बारिश के समय डॉक्टरों को काफी परेशानी होती है. पोस्टमार्टम हाउस में पेयजल तक की व्यवस्था नहीं है. इस कारण पोस्टमार्टम के वक्त परिजनों को काफी परेशानी होती है.

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शव को रखने के लिए फ्रिजर की नहीं है व्यवस्था : जिले में पोस्टमार्टम हाउस की स्थिति बदहाल तो है ही साथ ही शवों को सड़ने से बचाने के लिए भी किसी प्रकार की व्यवस्था नहीं की गयी है. शव को सड़ने से बचाने के लिए न तो फ्रिजर है और नहीं ताबूत. किसी कारण से शव का पोस्टमार्टम विलंब से हुआ तो उसके सड़ने की आशंका ज्यादा होती है. सड़ चुके शवों के दुर्गंध से आसपास के लोग परेशान रहते हैं. इससे संक्रमण फैलने का खतरा भी रहता है. उस पथ से होकर गुजरने वाले राहगीर नाक बंद कर या अपनी सांस रोककर जल्दी उस इलाके से निकल जाना चाहते हैं.
बिजली के अभाव में बंद है नया भवन
नये पोस्टमार्टम हाउस बने करीब तीन साल हो गये हैं और उसे दो साल पूर्व विभाग को हेंडओवर भी कर दिया गया है परंतु बिजली के अभाव में अबतक इसे चालू नहीं किया जा सका है. नये पोस्टमार्टम हाउस में डीप फ्रिजर की भी व्यवस्था है. इसके लिए तीन फेज बिजली की आवश्यकता है. परंतु अबतक बिजली की व्यवस्था नहीं होने के कारण इसे चालू नहीं किया जा सका है.
पोस्टमार्टम हाउस के बिना पोस्टमार्टम करने में परेशानी तो होती ही है. नये भवन में सारी सुविधाएं पर अबतक चालू नहीं हो सका है. पोस्टमार्टम के लिए पुराना छोटा सा भवन है. परंतु सुविधाएं नहीं रहने के कारण बाहर ही पोस्टमार्टम करना पड़ता है.
डॉ निलेश, चिकित्सक सदर अस्पताल
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