कदमा की गलियों से दुनिया के पाठकों तक पहुंची जमशेदपुर की बेटी, जानें डॉ अस्मिता की किताब में ऐसा क्या है खास

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डॉ अस्मिता मोहंती की पुस्तक.

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जमशेदपुर की बेटी डॉ. अस्मिता मोहंती की नई किताब 'Of Love and Silent Wars' प्रेम, आत्म-खोज और टूटन की मार्मिक यात्रा बयां करती है. यह पुस्तक स्थानीय स्मृतियों से निकलकर राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर सराही जा रही है.

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जमशेदपुर : जमशेदपुर की माटी में जन्मीं और पली-बढ़ीं डॉ अस्मिता मोहंती की नई पुस्तक ‘Of Love and Silent Wars: The Way Back to Me Through Him’ ने स्थानीय स्मृतियों से निकलकर राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय पटल पर अपनी अलग पहचान बनाई है. अमेजन पर आधिकारिक रूप से लॉन्च हुई यह पुस्तक देश-विदेश के पाठकों के लिए विभिन्न ऑनलाइन प्लेटफॉर्म्स पर उपलब्ध है, जिसे वैश्विक स्तर पर काफी सराहा जा रहा है.

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जमशेदपुर के कदमा में बीता बचपन

अटल मोहंती और कल्पना मोहंती की सुपुत्री डॉ अस्मिता का बचपन जमशेदपुर के कदमा में बीता. उन्होंने अपनी स्कूली शिक्षा केरला समाजम मॉडल स्कूल (केएसएमएस) से पूरी की. वर्तमान में भुवनेश्वर में एचआर प्रोफेशनल के रूप में कार्यरत डॉ अस्मिता खुद को गर्व से ‘जमशेदपुर की बेटी’ कहती हैं और अपनी जड़ों से जुड़ी हुई हैं.

पुस्तक में क्या है ?

यह पुस्तक केवल एक सामान्य प्रेम कहानी नहीं, बल्कि प्रेम, टूटन, प्रतीक्षा, भावनात्मक संघर्ष, आत्मसम्मान और अंततः स्वयं को फिर से खोजने की एक संवेदनशील यात्रा है. पुस्तक की मुख्य पात्र ‘अनामी’ के माध्यम से लेखिका ने उस मनःस्थिति को सामने रखा है. इसमें कोई इंसान किसी रिश्ते में खुद को खो देता है. फिर एक दिन उसे एहसास होता है कि सबसे जरूरी यात्रा किसी दूसरे तक पहुंचने की नहीं, बल्कि खुद तक वापस लौटने की है. पुस्तक का शीर्षक ‘Silent Wars’ उन आंतरिक संघर्षों का प्रतीक है जिन्हें इंसान अक्सर दुनिया से छिपाकर अपने भीतर लड़ता है. खास बात यह है कि पुस्तक में जमशेदपुर शहर से जुड़ी स्मृतियां और संदर्भ भी शामिल हैं, जो इसे स्थानीय माटी की खुशबू से जोड़े रखते हैं.

किसी रिश्ते का अंत हमेशा किसी कहानी का अंत नहीं होता

साहित्यिक जगत में डॉ अस्मिता पहले भी अपनी कविता-पुस्तक ‘The Endless Moonlight’ से अपनी पहचान बना चुकी हैं. कविता से उपन्यास तक के इस सफर में उन्होंने मानवीय संबंधों की परतों को बखूबी उकेरा है. एक एचआर प्रोफेशनल होने के नाते लोगों के व्यवहार और रिश्तों की जटिलताओं का उनका व्यावसायिक अनुभव लेखन में गहराई प्रदान करता है. डॉ अस्मिता की यह पुस्तक यह संदेश देती है कि किसी रिश्ते का अंत हमेशा किसी कहानी का अंत नहीं होता, बल्कि कई बार वहीं से स्वयं को समझने और अपने अस्तित्व को स्वीकार करने की नई शुरुआत होती है. जमशेदपुर में आकार लेने वाले अपने सपनों को आज वे अपनी कलम के माध्यम से दुनिया भर के पाठकों तक पहुंचा रही हैं.

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