Jamshedpur News : उत्पाद विभाग द्वारा बेबेल टेक्नोलॉजी से 20 करोड़ की वसूली पर हाइकोर्ट ने लगायी अंतरिम रोक

Updated at : 14 Jun 2025 1:18 AM (IST)
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जमशेदपुर (फाइल फोटो)

Jamshedpur News : झारखंड उच्च न्यायालय ने बेबेल टेक्नोलॉजी लिमिटेड से उत्पाद विभाग द्वारा की जा रही 20 करोड़ रुपये की वसूली पर अंतरिम रोक लगा दी है.

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विभाग ने प्लेसमेंट एजेंसी पर 20 करोड़ रुपये गबन का आरोप लगाते हुए ठेका रद्द कर दिया

Jamshedpur News :

झारखंड उच्च न्यायालय ने बेबेल टेक्नोलॉजी लिमिटेड से उत्पाद विभाग द्वारा की जा रही 20 करोड़ रुपये की वसूली पर अंतरिम रोक लगा दी है. यह रोक झारखंड राज्य बिबरेज कॉरपोरेशन लिमिटेड (जेएसबीसीएल) द्वारा 11 अप्रैल 2025 को जारी कारण बताओ नोटिस (पत्रांक-854) पर लगायी गयी है. न्यायमूर्ति एम. एस. रामचंद्र राव एवं न्यायमूर्ति राजेश शंकर की खंडपीठ ने यह आदेश 10 जून को बेबेल टेक्नोलॉजी की ओर से दायर रिट याचिका पर सुनवाई के दौरान पारित किया.

अदालत ने अपने आदेश में कहा कि प्रारंभिक दृष्टि से 11 अप्रैल का नोटिस पूर्व के अदालती निर्देशों के अनुरूप नहीं प्रतीत होता है. विशेष रूप से यह नोटिस 26 मार्च 2025 को दिये गये आदेश के पैरा-3 में उल्लेखित निर्देशों का पालन नहीं करता, जिसमें प्रतिवादी पक्षकार भी शामिल हैं. कोर्ट ने मामले में अगली सुनवाई की तिथि 5 अगस्त 2025 निर्धारित की है.इस निर्णय से बेबेल टेक्नोलॉजी लिमिटेड को राहत मिली है, जिसे पूर्वी सिंहभूम जिले की 110 सरकारी विदेशी शराब दुकानों के संचालन का जिम्मा जेएसबीसीएल द्वारा सौंपा गया था. कंपनी ने 1 जुलाई 2023 से 31 मार्च 2025 तक के लिए इन दुकानों का संचालन किया, जिसमें उसे मदिरा बिक्री से प्राप्त राशि विभाग को जमा करनी थी. हर 15 दिन पर ऑडिट की शर्त भी शामिल थी, जिसे विभाग ने समय पर पूरा नहीं किया.हाल ही में हुए ऑडिट में 20 करोड़ रुपये की गड़बड़ी सामने आने पर जेएसबीसीएल ने बेबेल टेक्नोलॉजी को नोटिस भेजा और उसका अनुबंध रद्द कर दिया. इसके खिलाफ एजेंसी हाइकोर्ट पहुंची.याचिकाकर्ता बेबेल टेक्नोलॉजी लिमिटेड ने दावा किया है कि विभाग ने कैबिनेट की मंजूरी के बिना एजेंसी को हटाया और 1 जून 2024 से उनके कर्मचारियों का वेतन भी रोक दिया. कंपनी के अनुसार इस समय एजेंसी के करीब 350 कर्मी कार्यरत हैं. इनके वेतन मद में कंपनी हर माह करीब 70 लाख रुपये देती है, जबकि 27 करोड़ रुपये बोनस और ओवरटाइम के मद में विभाग पर बकाया है. बावजूद इसके, विभाग एजेंसी पर ही 20 करोड़ रुपये बकाया का आरोप लगा रहा है, जिसे कंपनी ने गलत ठहराया.कंपनी ने अदालत से हस्तक्षेप की मांग करते हुए कहा है कि सभी कर्मचारियों को उनका बकाया वेतन मिले और अनुबंध संबंधी विवाद का उचित समाधान हो.

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