मूर्तिकारों के सामने परंपरा बचाने की चुनौती, भगवान गणेश की प्रतिमा को दे रहे आकार
गालूडीह में भगवान गणेश की मूर्तियों का आकार देते मूर्तिकार.
गालूडीह के मूर्तिकार गणेश पूजा के लिए प्रतिमाएं बना रहे हैं, लेकिन बढ़ती लागत और नई पीढ़ी की अरुचि के कारण पारंपरिक कला के भविष्य पर संकट है.
गालूडीह : गालूडीह क्षेत्र के मूर्तिकार विकास दलाई, कंगला दलाई और बंकेश दलाई इन दिनों गणेश पूजा और मां मनसा पूजा को लेकर प्रतिमा निर्माण में जुटे हैं. तीनों मूर्तिकार गणेश जी की मूर्ति के साथ मां मनसा देवी की प्रतिमा को भी अंतिम रूप देने में लगे हुए हैं. मिट्टी, बांस, पुआल, रंग और अन्य सामग्री से प्रतिमाओं को आकर्षक रूप दिया जा रहा है. मूर्तिकारों ने बताया - प्रतिमा निर्माण का काम उनके परिवार में पूर्वजों के समय से चला आ रहा है. इसी पारंपरिक कला को उन्होंने भी अपनाया है.
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बढ़ गई है मूर्ती निर्माण की लागत
हालांकि, वर्तमान समय में मूर्ति निर्माण की लागत बढ़ गयी है. रंग, बांस, पुआल समेत अन्य सामग्रियों की कीमत बढ़ने से पहले की तुलना में खर्च अधिक हो रहा है. उन्होंने चिंता जताते हुए कहा - नई पीढ़ी इस पारंपरिक काम को आगे बढ़ाने में ज्यादा रुचि नहीं दिखा रही है. बच्चे इस काम को करना नहीं चाहते. ऐसे में आने वाले समय में पारंपरिक मूर्तिकला को आगे बढ़ाना चुनौतीपूर्ण हो सकता है. मूर्तिकारों का कहना है कि प्रतिमा निर्माण केवल रोजगार का साधन नहीं, बल्कि उनके परिवार की वर्षों पुरानी कला और परंपरा है. बावजूद बढ़ती लागत और नई पीढ़ी की कम रुचि के कारण इस कला के भविष्य को लेकर चिंता बनी हुई है. उन्होंने बताया कि अभी तक करीब 30 मूर्तियों की बुकिंग हुई है.
लगातार बारिश से मूर्तियों को सूखाने में हो रही परेशानी
गणेश पूजा नजदीक है और लगातार बारिश से मिट्टी से बनी मूर्तियों को सूखाने में मूर्तिकारों को परेशानी हो रही है. मूर्तियां सूखाने के बाद रंग-रोगन और सजावट होती है. पर लगातार बारिश होने और धूप नहीं निकलने से मूर्तिकारों की परेशानी बढ़ गयी है. इससे से आर्थिक नुकसान भी हो रहा है.
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