20 दिन बीते, 25 डीलरों को सितंबर का नहीं मिला अनाज, खाली हाथ लौट रहे लाभुक

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20जी 8- उलदा पंचायत के जविप्र दुकान के आगे खड़े लाभुक, अनाज नहीं आने से मायूस | Prabhat Khabar Network

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पूर्वी सिंहभूम जिले की 22 पंचायतों में खाद्यान्न वितरण व्यवस्था चरमरा गई है. 85 में से 25 जन वितरण प्रणाली दुकानों पर सितंबर का राशन अब तक नहीं पहुंचा है, जिससे 2,000 से अधिक राशन कार्डधारी परेशान हैं. एफसीआई गोदाम से सप्लाई रुकने के कारण डीलरों को अनाज मिलने में देरी हो रही है, जिससे गरीब मजदूरों के सामने संकट खड़ा हो गया है.

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घाटशिला : पूर्वी सिंहभूम जिले के घाटशिला प्रखंड की 22 पंचायतों में खाद्यान्न वितरण व्यवस्था चरमरा गई है. प्रखंड में संचालित 85 जन वितरण प्रणाली (PDS) दुकानों में से करीब 25 दुकानों में सितंबर माह का राशन (अनाज) अब तक नहीं पहुंचा है. इनमें से अधिकांश दुकानें महिला स्वयं सहायता समूहों/समितियों द्वारा संचालित हैं. राशन न मिलने के कारण इन दुकानों से जुड़े 2,000 से अधिक राशन कार्डधारी रोजाना दुकानों के चक्कर लगाने को मजबूर हैं और उन्हें खाली हाथ लौटना पड़ रहा है.

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एफसीआई गोदाम से सप्लाई रुकने की बात कह रहे अधिकारी

राशन डीलरों का कहना है कि जब उन्होंने अनाज न पहुंचने का कारण प्रखंड आपूर्ति पदाधिकारी (BSO) और एजीएम से पूछा, तो बताया गया कि जमशेदपुर स्थित भारतीय खाद्य निगम (FCI) के गोदाम से ही अब तक स्टॉक प्राप्त नहीं हुआ है. 20 सितंबर बीत जाने के बाद भी अनाज न पहुंचने से डीलरों की चिंता बढ़ गई है. डीलरों का कहना है कि महीने के आखिरी दिनों में सर्वर डाउन और नेटवर्क की समस्या रहती है, ऐसे में कम समय में सभी लाभुकों को राशन बांटना बेहद चुनौतीपूर्ण होगा.

राशन लैप्स होने का सता रहा डर

जोड़सा, उलदा, काड़ाडुबा, बांकी और भादुआ समेत कई पंचायतों के डीलरों ने आशंका जताई है कि यदि समय पर वितरण नहीं हुआ, तो अनाज लैप्स हो सकता है. डीलरों के मुताबिक, अगस्त महीने में भी 25 से 28 अगस्त के बीच राशन मिला था, जिसके कारण कम समय में पूरा वितरण नहीं हो सका और कई कार्डधारियों का खाद्यान्न लैप्स हो गया. इस बार भी वही स्थिति दोहराई जा रही है.

दिहाड़ी मजदूरों पर भारी पड़ रही प्रशासनिक लापरवाही

राशन कार्डधारी बांसती कैवर्त, लक्ष्मण सिंह, लखी सिंह, नारायण सिंह, लुधिया सोरेन और बाहादेवी सिंह समेत कई ग्रामीणों ने बताया कि वे प्रतिदिन अपना काम छोड़कर राशन दुकान का चक्कर काटते हैं. अधिकांश लाभुक गरीब परिवार से आते हैं और रोजाना मजदूरी करके पेट पालते हैं. महीने के 20 दिन बीत जाने और केवल 10 दिन शेष रहने से अब उनके सामने राशन न मिलने का संकट मंडराने लगा है.

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