न कोच मिला, न कोचिंग... फोन से शतरंज सीखकर राष्ट्रीय मंच पर छाया जमशेदपुर का प्रतीक
प्रतीक कुमार
जमशेदपुर के 12 वर्षीय मूक-बधिर खिलाड़ी प्रतीक कुमार ने अनोखे ढंग से शतरंज सीखा. मोबाइल फोन को अपना गुरु बनाकर उन्होंने राष्ट्रीय स्तर पर सफलता हासिल की और झारखंड का गौरव बढ़ाया.
जमशेदपुर: अगर हौसला मजबूत हो, तो मुश्किलें भी कामयाबी की राह नहीं रोक सकतीं. जमशेदपुर के हरहरगुट्टू (दादी बागान) निवासी 12 वर्षीय मूक-बधिर खिलाड़ी प्रतीक कुमार ने इसे सच कर दिखाया है. बिना किसी कोच या कोचिंग के मोबाइल फोन से शतरंज सीखने वाले प्रतीक ने राष्ट्रीय स्तर पर अपनी प्रतिभा का दम दिखाया है. 17 से 21 सितंबर तक नयी दिल्ली में आयोजित 27वीं राष्ट्रीय मूक-बधिर शतरंज चैंपियनशिप में प्रतीक ने शानदार प्रदर्शन किया. सब-जूनियर बालक वर्ग में झारखंड का प्रतिनिधित्व करते हुए उन्होंने सात राउंड में पांच अंक हासिल किये.
मोबाइल बना गुरु
प्रतीक के पिता प्रभात कुमार ने बताया कि उनके बेटे ने करीब दो महीने पहले मोबाइल फोन पर शतरंज के खेल को देखना और समझना शुरू किया था. बिना किसी औपचारिक प्रशिक्षण के प्रतीक ने मोबाइल पर शतरंज की चालें सीखीं और धीरे-धीरे खेल की रणनीतियों को समझने लगे. इसके बाद उन्होंने जेआरडी टाटा स्पोर्ट्स कॉम्प्लेक्स में आयोजित राज्य स्तरीय मूक-बधिर शतरंज प्रतियोगिता में पहला स्थान हासिल किया. इस प्रदर्शन के आधार पर उनका चयन झारखंड टीम में हुआ.
राष्ट्रीय मंच पर दिखायी प्रतिभा
सोनारी स्थित बाल बिहार स्कूल में सातवीं कक्षा के छात्र प्रतीक ने नयी दिल्ली के राष्ट्रीय बाल भवन में आयोजित चैंपियनशिप में हिस्सा लिया. सब-जूनियर बालक वर्ग में उन्होंने सात राउंड के मुकाबलों में पांच अंक अर्जित किये. इस प्रदर्शन से उन्होंने अपनी प्रतिभा और एकाग्रता का परिचय दिया.
प्रतीक बोल और सुन नहीं सकते, लेकिन उनके सपने बड़े हैं. उनकी मां मीना देवी पढ़ाई और खेल अभ्यास में बेटे का लगातार हौसला बढ़ाती हैं. पिता प्रभात कुमार का कहना है कि अगर प्रतीक को सही मंच, बेहतर सुविधाएं और पेशेवर प्रशिक्षण मिले, तो वह आगे चलकर शानदार प्रदर्शन कर सकते हैं.
आपके शहर में
प्रभात खबर डिजिटल टॉप स्टोरी
Prabhat Khabar App :
देश, एजुकेशन, मनोरंजन, बिजनेस अपडेट, धर्म, क्रिकेट, राशिफल की ताजा खबरें पढ़ें यहां. रोजाना की ब्रेकिंग हिंदी न्यूज और लाइव न्यूज कवरेज के लिए डाउनलोड करिए