सबरों का सरकारी आवास अधूरा, छत ढलाई हुई पर फर्श नहीं होने से घुसता है बारिश का पानी
जंगल-झांड़ियों के घिरा क्लब भवन बना सबर परिवार का आशियाना.
गालूडीह प्रखंड की दारीसाई सबर बस्ती में सरकारी आवासों का निर्माण अधूरा पड़ा है. छत की ढलाई तो हो गई, पर फर्श की ढलाई नहीं होने से बरसात का पानी घरों में घुस रहा है. इस कारण सबर परिवार बेहद मुश्किल में जी रहे हैं.
गालूडीह : घाटशिला प्रखंड की बड़ाकुर्शी पंचायत स्थित दारीसाई सबर बस्ती के सबरों का सरकारी आवास अधूरा पड़ा है. पांच आवासों की छत की ढलाई तो हुई पर फर्श की ढलाई नहीं होने से बरसात का पानी घरों में घुस जाता है. यहां रहना मुश्किल है. इसलिए एक सबर परिवार अपने परिवार और बच्चों के साथ बस्ती के बगल में बने क्लब भवन में काफी दिनों से रहने को मजबूर है. शिवचरण सबर ने बताया - दारीसाई में आठ सबरों के नाम आवास स्वीकृत हुए थे. कई वर्षों तक काम ही नहीं हुआ. जब ठेकेदार पर दबाव बढ़ा तो आठ में पांच सबरों रवनी सबर, शिवचरण सबर, निशोदा सबर, सुकुरमनी सबर और कार्तिक सबर का आवास बना.
फर्श की नहीं हुई ढलाई
छत की ढलाई हुई. पर फर्श की नहीं. खिड़की-दरवाजे तक नहीं लगे. न ही प्लास्टर हुआ. शिवचरण का जहां आवास बना वहां जमीन नीचा होने से बारिश होने पर बारिश का पानी घर में घुस जाता है. इसलिए शिव चरण अपनी पत्नी जोबा सबर और चार बच्चों के साथ बस्ती के पास बने क्लब भवन में रह रहे हैं. क्लब भवन में बिजली नहीं है. चारों और जंगल-झांड़ियों से घिरा है. पास में एक गड्ढा भी है. जहां पानी भरा है.
बच्चों के गिरने की बनी रहती है आशंका
इससे यहां सबर बच्चों के गिरने की आशंका बनी रहती है. उपर से सांप-बिच्छू का भय भी बना रहता है. बताया गया कि दारीसाई के तीन सबर रूदनी सबर, अशोक सबर और मंगल सबर का सरकारी आवास आज तक अधूरा पड़ा है. एक का बुनियाद देकर छोड़ दिया गया और दो आवास लिंटर तक कर छोड़ दिया गया है. इसकी सुधि भी प्रखंड के पदाधिकारी नहीं ले रहे हैं. इससे यहां के सबरों का रहना मुश्किल हो गया. जो पुराने बिरसा आवास हैं वह भी जर्जर हालत में हैं.
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