अतिक्रमण हटाने के दौरान हंगामा

Updated at : 26 Jul 2018 7:00 AM (IST)
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अतिक्रमण हटाने के दौरान हंगामा

आदित्यपुर : बुधवार को अनुमंडलाधिकारी सरायकेला के निर्देश पर आदित्यपुर-कांड्रा मुख्य मार्ग पर पान दुकान चौक के पास स्थित आइओसी के बंद पड़े विवादित पेट्रोल पंप पर अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई शुरू हुई, लेकिन कुछ ही देर में बासुदेव ऑटोमोबाइल नामक इस पेट्रोल पंप के संचालक राकेश पासवान के पार्टनर संजीव रंजन उर्फ छोटू पासवान […]

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आदित्यपुर : बुधवार को अनुमंडलाधिकारी सरायकेला के निर्देश पर आदित्यपुर-कांड्रा मुख्य मार्ग पर पान दुकान चौक के पास स्थित आइओसी के बंद पड़े विवादित पेट्रोल पंप पर अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई शुरू हुई, लेकिन कुछ ही देर में बासुदेव ऑटोमोबाइल नामक इस पेट्रोल पंप के संचालक राकेश पासवान के पार्टनर संजीव रंजन उर्फ छोटू पासवान ने कार्रवाई से पहले नोटिस नहीं दिये जाने को लेकर हंगामा शुरू कर दिया. इससे पहले पंप के परिसर में स्थित नौ दुकानों का भी अतिक्रमण हटाये जाने की बात को लेकर कांग्रेस के नेता राणा सिंह ने भी हंगामा किया. श्री सिंह ने कहा कि उक्त दुकानें आइओसी के क्षेत्र में नहीं आता है. इससे यहां काफी भीड़ जमा हो गयी.
इस बीच प्रतिनियुक्त दंडाधिकारी सीओ गम्हरिया कामिनी कौशल लकड़ा व पुलिस बल की उपस्थिति में आइओसी के अधिकारियों ने पंप के कार्यालय का ताला तोड़ उसमें रखे सभी सामान बाहर करवा चुके थे. कार्यालय के ऊपर लगे भाजपा का झंडा व बैनर को भी हटवा दिया गया.
कुछ देर बहस चलने के बाद कार्रवाई को रोक दी गयी.
पेट्रोल पंप परिसर में कई वाहनों के अलावा फास्ट फूड के ठेलों के अलावा यहां से बिक्री के लिए ईंट, गिट्टी, बालू भी जमा कर रखे गये हैं. इस दौरान आइओसी के सीनियर मैनेजर सतीश कुमार सिंह ने उक्त मामले के संबंध में उस समय कुछ भी बताने से इंकार कर दिया.
कार्रवाई में शामिल थे पंप संचालक : छोटू पासवान ने बताया कि बासुदेव ऑटो मोबाइल पेट्रोल पंप से जिला प्रशासन द्वारा अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई दौरान पंप के संचालक राकेश पासवान व उनके पिता बासुदेव राम भी मौजूद थे. इन लोगों ने भी कार्रवाई में शामिल होकर पंप के कार्यालय का तुड़वाया. कार्यालय में रखे कई कागजात गायब हैं. इस कार्रवाई में उन्हें लाखों रुपये का नुकसान हुआ है.
वर्षों से कोर्ट में लंबित है पंप का विवाद
पंप के संचालक के पार्टनर संजीव रंजन ने बताया कि इस पंप के विवाद का मामला सरायकेला कोर्ट में लंबित है. अनुमंडलाधिकारी ने कोर्ट से संबंधित कागजात प्रस्तुत करने की मोहलत उन्हें दी है. 2011 में यह पंप राकेश पासवान को आवंटित हुआ था. आर्थिक स्थित खराब होने पर श्री पासवान ने उनके साथ कोर्ट में करारनामा तैयार करवाया. इसके तहत उन्होंने पेट्रोल पंप चलाने के लिए 35 लाख रुपये खर्च किये.
इस राशि से 22 लाख रुपये के तेल मंगवाये गये, दो लाख रुपये बिजली बिल का बकाया चुकाया गया और अन्य खर्च किये गये. राकेश पासवान प्रतिमाह 22 हजार रुपये लेते हुए पम्प का संचालन उन्हें सौंप दिया. दिसंबर 2012 में आइओसी को पत्र लिखकर पंप को बंद करवा दिया. श्री पासवान द्वारा दिया गया सात लाख 32 हजार रुपये का चेक भी बांउस कर गया था
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