टाटा स्टील की याचिका सुप्रीम कोर्ट में खारिज

By Prabhat Khabar Digital Desk
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जमशेदपुर: सेल्स टैक्स विभाग के खिलाफ टाटा स्टील द्वारा दायर याचिका को सुप्रीम कोर्ट ने खारिज कर दिया है. सुप्रीम कोर्ट में टाटा स्टील ने सेल्स टैक्स विभाग द्वारा स्टॉक ट्रांसफर करने के मामले में करीब 42 करोड़ रुपये की हुई वसूली को चुनौती दी थी.

सेल्स टैक्स विभाग के तत्कालीन उपायुक्त अरबन सर्किल रंजन सिन्हा ने सबसे पहले टैक्स की वसूली सुनिश्चित करायी थी और कंपनी पर दबाव बनाकर 42 करोड़ रुपये की राजस्व वसूला था. वसूली के खिलाफ सबसे पहले टाटा स्टील ने ट्राइब्यूनल में याचिका दायर की थी. याचिका खारिज होने के बाद कंपनी रांची हाइकोर्ट में पहुंची, जिसकी संख्या डब्ल्यूपी नंबर 1578/2011 थी. इस याचिका को हाइकोर्ट ने भी 20 दिसंबर 2013 को खारिज कर दिया था.

इसके बाद सुप्रीम कोर्ट में हाइकोर्ट के फैसले को चुनौती दी गयी. सुप्रीम कोर्ट ने इसकी सुनवाई की. जस्टिस एचएल दत्तू और जस्टिस एसए बोबदे की अदालत ने सेल्स टैक्स विभाग द्वारा की गयी वसूली को सही पाया और इस याचिका को खारिज कर दिया. टाटा स्टील की याचिका खारिज होने के बाद इससे जुड़े मामले टाटा मोटर्स, लाफार्ज समेत करीब 10 कंपनियों पर लंबित था. इससे इन कंपनियों से भी वसूली सुनिश्चित होगी. सेल्स टैक्स विभाग को उम्मीद है कि करीब 10 बड़ी कंपनियों से दो सौ करोड़ रुपये से ज्यादा की वसूली हो सकेगी.

बिहार वित्त अधिनियम के सेक्शन 13 में संशोधन कर झारखंड सरकार ने झारखंड वित्त संशोधित अधिनियम 2001 जारी किया था. इसके तहत कोई भी कंपनी कच्च माल खरीद कर उससे तैयार माल बेचेगी, तो उसे 2 से 3 फीसदी तक टैक्स में छूट दी जायेगी. टाटा स्टील, टाटा मोटर्स, लाफार्ज समेत कई कंपनियों की जांच अरबन सर्किल में उपायुक्त के तौर पर पदस्थापित रहे रंजन सिन्हा ने की थी. इसमें पाया गया कि टाटा स्टील ने कच्च माल पर छूट लेकर स्टॉक ट्रांसफर कर दिया और टैक्स में रियायत भी ले रहा है. इसे आधार बनाते हुए टाटा स्टील पर 42 करोड़ रुपये की वसूली की गयी थी. इसे विभिन्न न्यायालयों में टाटा स्टील ने चुनौती दी थी, जिसे सुप्रीम कोर्ट ने भी खारिज कर दिया.

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