National Sports Day: करोड़ों का कोयला उगलने वाला बड़कागांव खेल सुविधाओं में 'कंगाल', जर्जर मैदानों में चोटिल हो रहे खिलाड़ी

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बड़कागांव हाई स्कूल खेल मैदान में कई महीनो से जमा पानी

राष्ट्रीय खेल दिवस पर हजारीबाग के बड़कागांव में खेल सुविधाओं की स्थिति चिंताजनक है. करोड़ों का कोयला उत्पादन करने वाला यह क्षेत्र खिलाड़ियों के लिए जर्जर मैदानों से जूझ रहा है.

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बड़कागांव से संजय सागर की रिपोर्ट

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हजारीबाग: हर वर्ष 29 अगस्त को पूरे देश में राष्ट्रीय खेल दिवस मनाया जाता है. इस अवसर पर स्कूलों और कॉलेजों में खिलाड़ियों का उत्साह बढ़ाने के लिए खेल सामग्री का वितरण किया जाता है और प्रतियोगिताएं आयोजित होती हैं. लेकिन हजारीबाग के बड़कागांव प्रखंड में स्थिति इसके ठीक उलट है. सरकारी उपेक्षा और जर्जर खेल मैदानों के कारण यहां के खिलाड़ियों की प्रतिभा ठीक तरह से बाहर नहीं आ पा रही है. मैदानों में सुरक्षा के कोई इंतजाम न होने से अभ्यास के दौरान खिलाड़ी हर दिन चोटिल हो रहे हैं. विडंबना यह है कि बड़कागांव से खनन कंपनियां रोजाना करोड़ों रुपये का कोयला निकाल रही हैं, लेकिन सीएसआर (CSR) मद से खेल मैदानों के सुदृढ़ीकरण और खेल संसाधनों के विकास पर कोई ध्यान नहीं दिया जा रहा है.

अभावों के बावजूद अंतरराष्ट्रीय और राष्ट्रीय पटल पर चमक रहे खिलाड़ी

यूं तो बड़कागांव में साधनों की घोर कमी है. न ही खिलाड़ियों के कोई उचित संसाधन, इसके बावजूद खिलाड़ियों ने अपने दम पर अलग पहचान बनाई है. इसमें प्रमुख हैं झालो कुमारी, जो अंतरराष्ट्रीय स्तर की फुटबॉल खिलाड़ी हैं. इसके अलावा सदानंद कुमार ने एथलेटिक्स में, छोटू ठाकुर दिव्यांग क्रिकेट टीम में, सुरेंद्र कुमार तुरी कराटे के क्षेत्र में, दुर्गेश कुमार महतो व जिज्ञांशु रंजन आर्चरी (तीरंदाजी) में अपनी पहचान अंतराष्ट्रीय स्तर पर बनाई है. स्थानीय लोगों का कहना है कि यदि यहां के खेल मैदान बेहतर स्थिति में होते, तो बड़कागांव से दर्जनों अन्य खिलाड़ी राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय मंचों तक पहुंचते.

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प्रखंड के ये प्रमुख खेल मैदान पड़े हैं जर्जर

बड़कागांव हाई स्कूल मैदान, झरीवा नदी तट मैदान, लंगातू, चेपा खुर्द शीबाडीह, हरली हाई स्कूल मैदान, बादम का बीएमसी मैदान, जमानिडीह, पंडरिया, मंझला बाला, चंदौल, महुगाई, गोंदलपुरा और तलसवार समेत दर्जनों खेल मैदान पूरी तरह बदहाल हैं.

हादसों के शिकार हो रहे खिलाड़ी

केस 1

10 अगस्त को झरीवा नदी मैदान में फुटबॉल खेलने के दौरान प्रकाश कुमार गिरकर घायल हो गए. मैदान में बिखरे पत्थरों से उनके पैर में गंभीर चोट आईं हैं.

केस 2

20 अगस्त को मंझला बाला मैदान में दौड़ का अभ्यास करने के दौरान संजय कुमार का पैर कांच (शीशा) के टुकड़े पर पड़ गया, जिससे वे चोटिल हो गए.

केस 3

पिछले वर्ष राहुल कुमार ओझा क्रिकेट खेलने के दौरान घायल हो गए थे. दरअसल वे कैच की प्रैक्टिस कर रहे थे. इस दौरान मैदान के बीच स्थित बिजली पोल से टकराकर बुरी तरह जख्मी हो गए.

क्या कहते हैं स्थानीय खिलाड़ी और कोच?

"हाई स्कूल मैदान में बारिश के दिनों में कीचड़ भर जाता है, जिससे अभ्यास पूरी तरह ठप हो जाता है."

आशीष ठाकुर, एथलीट


"प्रखंड के सभी मैदान जर्जर हैं. अभ्यास के दौरान खिलाड़ी अक्सर गिरकर चोटिल होते रहते हैं."

सुरेंद्र राम तुरी, कराटे कोच


"मैदानों का समतलीकरण नहीं हुआ है. इसके अलावा कहीं भी लाइट, शौचालय या खिलाड़ियों और दर्शकों के बैठने की बुनियादी व्यवस्था तक नहीं है."

झालो कुमारी, अंतरराष्ट्रीय फुटबॉल खिलाड़ी


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