मुआवजा, नौकरी और आवास पर बनी सहमति, केरेडारी में विस्थापितों का धरना खत्म
धरना पर बैठे लोग | Prabhat Khabar Network
केरेडारी की चंद्रगुप्त कोल परियोजना में चल रहा धरना आठ सूत्री मांगों पर सहमति के बाद समाप्त हो गया। विस्थापितों को मुआवजा और नौकरी का आश्वासन मिला है।
केरेडारी. चंद्रगुप्त कोल परियोजना जोरदाग में विस्थापितों का धरना रविवार को आठ सूत्री मांगों पर सहमति बनने के बाद समाप्त हो गया. मांगों को लेकर परियोजना कार्यालय में करीब पांच घंटे तक वार्ता हुई. वार्ता भाजपा के प्रदेश कार्यकारी सदस्य शिवलाल महतो के नेतृत्व में हुई.
वार्ता में परियोजना पदाधिकारी, परियोजना प्रबंधक, सुश्री इंफ्रा के महाप्रबंधक, भूमि अधिग्रहण पदाधिकारी और मानव संसाधन विभाग के पदाधिकारी मौजूद थे. वहीं परियोजना से प्रभावित सात गांवों चट्टी बरियातू, नावाडीह, जोरदाग, उड़सू, पचड़ा, सिजुआ और नौवाखाप के सैकड़ों विस्थापित महिला-पुरुष शामिल हुए.
भूमि अधिग्रहण और मुआवजे पर बनी सहमति
वार्ता में तय हुआ कि 2013 के भूमि अधिग्रहण अधिनियम के तहत भूमि का मुआवजा और अधिनियम के तहत मिलने वाली सुविधाएं दी जायेंगी. गैरमजरूआ भूमि का सत्यापन कर मुआवजा राशि और नौकरी देने की बात कही गयी. भूमि सत्यापन के लिए परियोजना परिसर में कैंप लगाया जायेगा.
स्वास्थ्य और आवास की भी व्यवस्था
विस्थापितों के स्वास्थ्य को लेकर परियोजना कार्यालय के आसपास वैकल्पिक दवाखाना खोला जायेगा. वहीं बड़कीटांड में विस्थापितों को आवास उपलब्ध कराने की बात कही गयी. एक साल के भीतर जमीन अधिग्रहण की प्रक्रिया पूरी कर काम शुरू करने की बात भी वार्ता में कही गयी.
सड़क और मवेशियों के मुआवजे पर भी निर्णय
नौवाखाप जाने वाले मार्ग का निर्माण दो से तीन महीने के अंदर कराने पर सहमति बनी. माइंस का पानी नदी में आने से तीन मवेशियों की मौत के मामले में प्रति मवेशी 30 हजार रुपये मुआवजा देने की बात कही गयी.
इसके अलावा सीसीएल द्वारा प्रति एकड़ नौकरी देने की मांग पर परियोजना पदाधिकारी अपने मुख्यालय को स्वीकृति के लिए पत्र लिखेंगे. वार्ता में किशोर राणा, मो नईम, गोबिंद माली, बैजनाथ महतो, कौलेश्वर साव, गुलदेव महतो, अनिल माली, दशरथ महतो, बरजु महतो, जगरनाथ महतो समेत अन्य लोग उपस्थित थे.
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