हजारीबाग की सड़कों पर आवारा मवेशियों का डेरा, राहगीरों से लेकर दुकानदार तक परेशान

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सड़कों पर आवारा मवेशियों का डेरा

हजारीबाग शहर की सड़कों पर आवारा मवेशियों की बढ़ती संख्या राहगीरों, वाहन चालकों और दुकानदारों के लिए गंभीर समस्या बन गई है. प्रमुख मार्गों और बाजारों में मवेशियों के झुंड यातायात में बाधा डाल रहे हैं और दुर्घटनाओं का कारण बन रहे हैं. वहीं, दुकानदारों का व्यापार भी प्रभावित हो रहा है.

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हजारीबाग: हजारीबाग में सैकड़ो आवारा मवेशी है. ये आवारा मवेशी पशुपालक काम खत्म होने के बाद मवेशियों को सड़क पर छोड़ देते हैं. शहर की सड़कों पर घूमते आवारा मवेशी अब राहगीरों, वाहन चालकों और दुकानदारों के लिए परेशानी का सबब बन गये हैं. शहर के प्रमुख मार्गों और बाजारों में गाय, सांड समेत अन्य मवेशियों के झुंड अक्सर सड़क के बीचों-बीच बैठे या विचरण करते नजर आते हैं. अचानक वाहनों के सामने मवेशियों के आ जाने से दोपहिया वाहन चालक अनियंत्रित होकर गिर रहे हैं. कई जगह मवेशियों के सड़क पर बैठने से यातायात भी प्रभावित होता है. दुकानदारों के सामने मवेशियों के जमावड़े से कारोबार पर भी असर पड़ रहा है. मजेदार बात यह है कि इन मवेशियों को पकड़ने के लिए नगर निगम के पास कैटल कैचिंग टीम नहीं है.

आपके शहर में

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सड़क पर मवेशियों का डेरा, यातायात में बाधा कांग्रेस ऑफिस रोड के दुकानदार राकेश कुमार ने बताया कि मवेशियों के झुंड मुख्य मार्ग और बाजार में डेरा डाले रहते हैं. इससे वाहनों को निकलने में परेशानी होती है और कई बार सड़क पर जाम की स्थिति बन जाती है. गुरु गोविंद सिंह रोड के दुकानदार बाबूलाल ने कहा कि अचानक मवेशियों के वाहन के सामने आ जाने से बाइक और कार चालक अनियंत्रित होकर गिर जाते हैं. बाजार में खरीदारी करने आने वाले लोगों को भी मवेशियों से टकराने का डर बना रहता है.

दुकानों के सामने बैठते हैं मवेशी, व्यापार प्रभावित दुकानदार शंकर लाल अग्रवाल ने बताया कि दुकानों के आगे मवेशियों के बैठने से ग्राहकों को आने-जाने में परेशानी होती है.खासकर सब्जी और फल विक्रेताओं को अधिक नुकसान उठाना पड़ता है. उन्होंने कहा कि सब्जी मंडी में कुछ व्यापारी सड़ी-गली सब्जियां सड़क किनारे फेंक देते हैं. इन्हें खाने के लिए मवेशी सड़क पर पहुंचते हैं और इसके बाद सड़क पर गंदगी भी फैलती है. इस तरह समस्या का एक कारण शहर में कचरा प्रबंधन की कमी भी है.

पहले थी कांजी हाउस की व्यवस्था

पूर्व पार्षद कमल पांडे ने बताया कि करीब 30-40 वर्ष पहले हजारीबाग में आवारा मवेशियों को नियंत्रित करने की व्यापक व्यवस्था थी. हजारीबाग के गाड़ीखाना में कांजी हाउस बना हुआ था, जहां सड़क पर घूमने वाले मवेशियों को पकड़कर रखा जाता था. पकडे गये मवेशियों के मालिकों से निर्धारित राशि लेकर उन्हें छोड़ा जाता था. इस व्यवस्था के कारण आवारा पशुओं के सड़क पर विचरण पर काफी हद तक नियंत्रण रहता था. उन्होंने बताया कि समय के साथ कांजी हाउस की व्यवस्था समाप्त हो गयी और शहर के बढ़ते विस्तार के बावजूद आवारा मवेशियों के लिए प्रभावी वैकल्पिक व्यवस्था नहीं बन सकी. अब यही मवेशी मुख्य सड़कों और बाजारों में घूमते हैं.

क्या कहते हैं अधिकारी

सहायक नगर आयुक्त विपिन कुमार ने बताया कि नगर निगम में कोई कैटल कैचिंग टीम नहीं है. सभी वार्ड जमादारों को सड़क पर घूम रहे हो आवारा मवेशियों को हटाने का निर्देश दिया गया है.


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