गुमला नगर परिषद में भारी बवाल: 32 योजनाओं पर रोक से भड़कीं अध्यक्ष, पार्षदों के कार्यालय में जड़ा ताला

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गुमला नगर परिषद दफ्तर में ताला जड़ती अध्यक्ष शकुंतला उरांव

गुमला नगर परिषद में राजनीतिक भूचाल आ गया है. विकास कार्यों को रोके जाने के विरोध में अध्यक्ष, उपाध्यक्ष और पार्षदों ने नगर परिषद कार्यालय के मुख्य गेट पर ताला जड़ दिया है. आरोप है कि कमीशनखोरी के चलते 32 महत्वपूर्ण योजनाओं पर रोक लगाई गई है.

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गुमला से दुर्जय पासवान की रिपोर्ट

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Gumla Municipal Council, गुमला : गुमला शहर के विकास कार्यों को ठप किए जाने का आरोप लगाते हुए गुरुवार को नगर परिषद की राजनीति में एक बड़ा भूचाल आ गया. परिषद की अध्यक्ष शकुंतला उरांव और उपाध्यक्ष रमेश कुमार चीनी के नेतृत्व में एक दर्जन से अधिक वार्ड पार्षदों ने नगर परिषद कार्यालय के मुख्य गेट पर ताला जड़ दिया. जनप्रतिनिधियों ने साफ चेतावनी दी है कि शहर का विकास रोके जाने के विरोध में नगर परिषद के सभी आधिकारिक कामकाज पूरी तरह ठप रहेंगे. केवल एसआईआर (SIR) से जुड़े जरूरी कामों को ही छूट दी जाएगी. तालाबंदी के बाद अध्यक्ष, उपाध्यक्ष और सभी आंदोलकारी पार्षद सुबह से शाम तक कार्यालय के मुख्य गेट के बाहर धरने पर बैठे रहे.

32 योजनाओं पर रोक के पीछे कमीशन का खेल: शकुंतला उरांव

नगर परिषद की अध्यक्ष शकुंतला उरांव ने सीधे तौर पर प्रशासन और विरोधियों पर निशाना साधते हुए कहा कि एक सोची-समझी साजिश के तहत गुमला के विकास को रोका गया है. उन्होंने आरोप लगाया कि कुछ लोग नगर परिषद की योजनाओं में टेंडर और मोटा कमीशन चाहते हैं. जब उन्हें उनका स्वार्थ पूरा होते नहीं दिखा, तो झूठे आरोप लगवाकर शहर की 32 महत्वपूर्ण विकास योजनाओं के काम पर रोक लगवा दी गई. अध्यक्ष ने इस गंभीर मामले में गुमला उपायुक्त (DC) से तुरंत हस्तक्षेप करने और शहर को सुंदर बनाने की योजनाओं को धरातल पर उतारने की मांग की है.

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चुनाव की हार का बदला ले रहे विरोधी: रमेश कुमार चीनी

वहीं दूसरी ओर, नप उपाध्यक्ष रमेश कुमार चीनी ने तीखा हमला बोलते हुए कहा कि कुछ लोग नगर परिषद के चुनावों में मिली करारी हार और बेइज्जती का बदला लेने के लिए शहर की जनता को मोहरा बना रहे हैं. उन्होंने कहा कि अगर नगर परिषद के अधिकारियों ने किसी योजना में कोई गड़बड़ी की है, तो उसकी निष्पक्ष जांच होनी चाहिए और सभी प्रतिनिधि जांच में पूरा सहयोग करेंगे. उपाध्यक्ष ने सवाल उठाया कि जो अधिकारी कल तक कुछ रसूखदार लोगों के सबसे प्रिय थे, वे अचानक दुश्मन कैसे बन गए? यह साफ तौर पर टेंडर और कमीशन न मिलने की छटपटाहट है. इस तालाबंदी में मुख्य रूप से पार्षद मोसर्रत परवीन, प्रवीण टोप्पो, संगियस तिर्की, नेहा लकड़ा, शैल मिश्रा, नूतन रानी, विजेता मिंज, उमा देवी और संजय कुजूर सहित कई लोग शामिल रहे.

विधायक के पक्ष में उतरे वार्ड पार्षद मनीष

एक तरफ जहां अध्यक्ष और उपाध्यक्ष के नेतृत्व में नप कार्यालय पर ताला जड़ा गया है, वहीं दूसरी तरफ वार्ड नंबर 22 के पार्षद मनीष कुमार ने अपनी ही परिषद के इस आंदोलन के खिलाफ बगावती मोर्चा खोल दिया है. मनीष कुमार ने स्थानीय विधायक भूषण तिर्की का खुलकर समर्थन करते हुए कहा कि जब नगर परिषद में वित्तीय गड़बड़ी की बात सामने आई थी, तो सभी पार्षदों ने धरना दिया था, लेकिन जैसे ही विधायक भूषण तिर्की ने इसकी निष्पक्ष जांच के लिए उपायुक्त को पत्र लिखा, कुछ पार्षदों ने गिरगिट की तरह रंग बदल लिया. उन्होंने सरकारी कार्यालय में तालाबंदी किए जाने को पूरी तरह असंवैधानिक और आम जनता के साथ अन्याय बताया, जिससे सिर्फ आम लोगों की परेशानियां बढ़ेंगी.

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