कभी लेवी में मांगी थी बंदूक, 22 साल बाद गुमला पुलिस के हत्थे चढ़ा नक्सली

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गुमला : प्रतिबंधित नक्सली संगठन एमसीसीआई के नाम पर लेवी में बंदूक मांगने के एक आरोपी विनोद उरांव को गिरफ्तार करने में पुलिस को 22 साल लग गये. लॉकडाउन में जैसे ही वह दूसरे राज्य से अपने घर लौटा. भनक लगते ही पुलिस ने उसे गिरफ्तार कर लिया. मामला सिसई प्रखंड के पुसो थाना क्षेत्र का है. गुमला के ब्यूरो चीफ दुर्जय पासवान से जानिए पूरा मामला.

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गुमला : प्रतिबंधित नक्सली संगठन एमसीसीआई के नाम पर लेवी में बंदूक मांगने के एक आरोपी विनोद उरांव को गिरफ्तार करने में पुलिस को 22 साल लग गये. लॉकडाउन में जैसे ही वह दूसरे राज्य से अपने घर लौटा. भनक लगते ही पुलिस ने उसे गिरफ्तार कर लिया. मामला सिसई प्रखंड के पुसो थाना क्षेत्र का है. गुमला के ब्यूरो चीफ दुर्जय पासवान से जानिए पूरा मामला.

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लेवी में नक्सली विनोद ने मांगी थी बंदूक

गुमला जिले के सिसई प्रखंड के पुसो गांव निवासी नक्सली विनोद उरांव (45 वर्ष) पिछले 22 साल से पुलिस की आंखों में धूल झोंकते हुए छिपता फिर रहा था. आखिरकार पुलिस ने उसे गिरफ्तार कर ही लिया. विनोद पर उग्रवादी गतिविधियों में शामिल रहते हुए लेवी के रूप में बंदूक मांगने का आरोप 22 साल पहले लगा था. अभी का पुसो थाना, 22 साल पहले सिसई थाना क्षेत्र में पड़ता था. उस समय सिसई थाना में विनोद के अलावा उसके छह साथियों के खिलाफ लेवी मांगने की प्राथमिकी दर्ज करायी गयी थी.

लॉकडाउन में आया घर, गया जेल

सिसई थाने में केस दर्ज होने के बाद पुलिस के बढ़ते दबिश से डरकर विनोद गांव से भागकर दूसरे प्रदेश में जाकर रहने लगा था. 22 साल तक वह दूसरे राज्य में छिपकर रहा. इधर, जब लॉक डाउन हुआ और विनोद अपने गांव आया तो पुसो थाना की पुलिस को इसकी भनक लग गयी. इसके बाद पुलिस ने आरोपी विनोद को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया.

22 साल पहले एमसीसीआई का था दबदबा

घटना वर्ष 1998 की है. उस समय पुसो छोटा सा गांव हुआ करता था. गांव तक जाने के लिए सड़क व पुल नहीं था. भौगोलिक बनावट के कारण ये गांव नक्सलियों की शरणस्थली था. उस समय पुसो में ओहदार परिवार मजबूत माना जाता था. इसलिए उस समय का नक्सली संगठन एमसीसीआई (अब भाकपा माओवादी) ओहदार परिवार को लगातार निशाना बनाता रहता था. कभी घर पर हमला, कभी परिवार के युवकों की पिटाई. यहां तक कि उग्रवादी हथियार खरीदने के लिए लेवी भी वसूलते थे.

ओहदार परिवार से लेवी में मांगी थी बंदूक

1998 में एमसीसीआई के नाम पर सात लोगों ने जनेश्वर ओहदार से लेवी के नाम पर बंदूक की मांग की थी. जनेश्वर ने हिम्मत दिखाते हुए लेवी मांगने वालों के खिलाफ थाना में प्राथमिकी दर्ज करायी थी. इसमें छह लोगों को जेल हुई थी, जो बाद में रिहा हो गये, परंतु विनोद उरांव 22 साल पहले पुलिस को चकमा देकर गांव से भागकर दूसरे प्रदेश में छिप गया था, जो 22 वर्ष बाद पुलिस की गिरफ्त में आया.

22 साल पहले से जारी है स्थायी वारंट

पुसो के थाना प्रभारी मिचराय पांड्या ने बताया कि नक्सली विनोद उरांव कांड संख्या 123/98 मामले में आरोपी है, जो फरार चल रहा था. इसके खिलाफ 1998 में स्थायी वारंट निकला हुआ है. उसी समय से विनोद फरार चल रहा था. सूचना मिली कि वह लॉकडाउन में अपना घर आया हुआ है. सूचना मिलते ही उसे उसके घर से गिरफ्तार कर जेल भेज दिया गया.

Posted By : Guru Swarup Mishra

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