कलिसिया की सेवा का संकल्प ही बिशप पॉल लकड़ा के लिए होगी सच्ची श्रद्धांजलि : आर्च बिशप
Author : Prabhat Khabar Digital Desk Published by : Prabhat Khabar Updated At : 16 Jun 2021 7:20 PM
Jharkhand News (गुमला) : गुमला धर्मप्रांत के बिशप स्वर्गीय पॉल अलोइस लकड़ा के पार्थिव शरीर को संत पात्रिक महागिरजाघर के परिसर में दफनाया गया. इस अवसर पर बुधवार को संत पात्रिक महागिरजाघर में मिस्सा बलिदान अर्पित किया गया. रांची के आर्च बिशप फेलिक्स टोप्पो की अगुवाई में मिस्सा बलिदान हुआ. मौके पर आर्च बिशप ने स्वर्गीय बिशप पॉल अलोइस लकड़ा की आत्मा की शांति के लिए ईश्वर से प्रार्थना किये.
Jharkhand News (जगरनाथ, गुमला) : गुमला धर्मप्रांत के बिशप स्वर्गीय पॉल अलोइस लकड़ा के पार्थिव शरीर को संत पात्रिक महागिरजाघर के परिसर में दफनाया गया. इस अवसर पर बुधवार को संत पात्रिक महागिरजाघर में मिस्सा बलिदान अर्पित किया गया. रांची के आर्च बिशप फेलिक्स टोप्पो की अगुवाई में मिस्सा बलिदान हुआ. मौके पर आर्च बिशप ने स्वर्गीय बिशप पॉल अलोइस लकड़ा की आत्मा की शांति के लिए ईश्वर से प्रार्थना किये.
आर्च बिशप फेलिक्स टोप्पो ने कहा कि स्वर्गीय पॉल लकड़ा का जन्म गुमला के सिसई रोड स्थित नदीटोली में 10 जुलाई, 1955 को स्वर्गीय बरनाबस लकड़ा एवं स्वर्गीय अग्नेस लकड़ा के परिवार में हुआ था. परिवार में सात भाई बहनों में उनका स्थान पांचवां था. माता-पिता बहुत ही अनुशासनप्रिय एवं धार्मिक स्वभाव के थे. जिस कारण बिशप पॉल को बचपन से ही परिवार में अनुशासनपूर्ण एवं संस्कारयुक्त सामाजिक और धार्मिक शिक्षा प्राप्त हुई थी. ये सदगुण उनके दैनिक जीवन में सहज ही देखने को मिलते थे.
आर्च बिशप ने कहा स्वर्गीय बिशप पॉल अलोइस लकड़ा का जीवन संघर्षमय रहा है. कलिसिया और गुमला धर्मप्रांत एवं धर्मप्रांत के लोगों के लिए जो कार्य किये, उसे कभी भुलाया नहीं जा सकता. उनके जीवन से कलिसिया समाज के लोगों को शिक्षा प्राप्त करने की जरूरत है. जिस तरह से उन्होंने नि:स्वार्थ भाव से कलिसिया की सेवा की. उसी प्रकार आप भी कलिसिया की सेवा करने का संकल्प लें. यही स्वर्गीय बिशप पॉल अलोइस लकड़ा के लिए हम सबों की ओर से सच्ची श्रद्धांजलि होगी.
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सिमडेगा धर्मप्रांत के बिशप भिंसेंट बरवा ने कहा कि ईश्वर अपने चुने हुए लोगों को अनंत जीवन प्रदान करते हैं. जीवन और मृत्यु ईश्वर के हाथ में है. इस वर्ष कोविड-19 महामारी के कारण अनेकों पुरोहित, धर्मबहनें और लोगों की जान गयी. ईश्वर उन सबों की आत्मा को शांति प्रदान करें. बिशप ने कहा कि बिशप पॉल अलोइस लकड़ा का निधन ना केवल गुमला धर्मप्रांत, बल्कि पूरे कलिसिया समाज के लिए अपूरणीय क्षति है. उन्होंने कहा कि स्वर्गीय बिशप पॉल अलोइस लकड़ा ने अपने जीवन काल में अपनी जिम्मेवारियों को ईमानदारी पूर्वक निभाया. उनके संपूर्ण जीवन के लिए ईश्वर को धन्यवाद दें.
गुमला धर्मप्रांत के विकर जेनरल फादर सीप्रियन कुल्लू ने कहा कि एक चरवाहा अपनी भेड़ों को छोड़कर चला जाये, तो आगे क्या होगा? क्या भेड़ें तितर-बितर नहीं हो जायेंगे? क्या वे भेड़ें अनाथ नहीं हो जायेंगे? आज हमारे गुमला धर्मप्रांत की यही स्थिति है. हमारा चरवाहा हमें छोड़कर चला गया. स्वर्गीय बिशप पॉल अलोइस लकड़ा भी हमारे लिए एक चरवाहा थे. जो हमें छोड़कर चले गये. यह हम सबों के लिए दु:ख की घड़ी है. ईश्वर से प्रार्थना करें कि स्वर्गीय बिशप पॉल अलोइस लकड़ा की आत्मा को शांति मिले और ईश्वर उन्हें अनंत जीवन प्रदान करें.
बिशप पॉल लकड़ा 1998 से 2004 तक गुमला धर्मप्रांत के प्रथम बिशप माइकेल मिंज के सचिव का कार्यभार संभाले थे. इसके बाद 2004 में बिशप माइकेल मिंज के देहांत के बाद करीब दो वर्षों तक गुमला धर्मप्रांत के प्रशासक का बड़ा दायित्व निभाते हुए अर्धनिर्मित संत पात्रिक महागिरजाघर का निर्माण कार्य को पूरा किये. 28 जनवरी, 2006 को संत पिता बेनेदिक्त 16वें के द्वारा वे गुमला के द्वितीय धर्माध्यक्ष नियुक्त किये गये तथा पांच अप्रैल, 2006 को कार्डिनल तेलेस्फोर पी टोप्पो के करकमलों से धर्माध्यक्ष अभिषिक्त हुए. उन्होंने एक धर्माध्यक्ष के रूप में 15 वर्ष दो महीने 10 दिन तक गुमला धर्मप्रांत के सभी लोगों का नेतृत्व एवं मार्गदर्शन अपने मन, वचन, एर्म एवं आचरण से किया.
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Posted By : Samir Ranjan.
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