वैज्ञानिक तसर पालन से बढ़ेगा उत्पादन, गोड्डा में किसानों को मिला प्रशिक्षण

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कार्यक्रम के दौरान कृषक और वैज्ञानिक | Prabhat Khabar Network

गोड्डा के सुंदरपहाड़ी में 'मेरा तसर मेरा अभिमान 2.0' के तहत तसर किसानों के लिए एक विशेष प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित किया गया. इस दौरान कीट-रोग प्रबंधन और वैज्ञानिक तरीकों से उत्पादन बढ़ाने की बारीकियां समझाई गईं.

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संवाददाता, गोड्डा : सुंदरपहाड़ी प्रखंड की करमाटांड़ पंचायत अंतर्गत सुंदरमोड़ गांव में ‘मेरा तसर मेरा अभिमान 2.0’ के तहत फील्ड प्रशिक्षण एवं डेमोंस्ट्रेशन कार्यक्रम आयोजित किया गया. केंद्रीय रेशम बोर्ड के अग्र परियोजना केंद्र पथरा के सहयोग से आयोजित कार्यक्रम में किसानों को तसर पालन के वैज्ञानिक प्रबंधन और बेहतर उत्पादन की तकनीक की जानकारी दी गयी.

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पेड़ों की देखभाल से लेकर कीट-रोग प्रबंधन तक की जानकारी

किसान मुनिलाल किस्कू की अड्डाबाड़ी में तकनीकी टीम ने किसानों को तसर पालन की बारीकियां बतायीं. तकनीकी विशेषज्ञ हरगोपाल दत्ता ने आसन और अर्जुन के पेड़ों की देखभाल, समय पर टहनी की कटाई-छंटाई, अड्डाबाड़ी की साफ-सफाई तथा कीट एवं रोग प्रबंधन के बारे में विस्तार से जानकारी दी.

किसानों को कटाई-छंटाई के लिए कटिंग प्लायर और कैंची भी वितरित की गयी. विशेषज्ञों ने बताया कि उचित समय पर पेड़ों की छंटाई करने से नयी और कोमल पत्तियों का विकास होता है, जो तसर कीटों के स्वस्थ विकास के लिए जरूरी है.

मिट्टी की जांच के लिए लिये गये नमूने

कार्यक्रम के दौरान अड्डाबाड़ी की मिट्टी के नमूने भी एकत्र किये गये. किसानों को बताया गया कि एक एकड़ भूमि में अलग-अलग 10 स्थानों से करीब 500-500 ग्राम मिट्टी लेकर सैंपल तैयार करना चाहिए. पीपीसी की तकनीकी टीम नमूनों को जांच के लिए अपने साथ ले गयी, ताकि मिट्टी में मौजूद पोषक तत्वों की स्थिति के आधार पर किसानों को उचित सलाह दी जा सके.

जैविक खाद और नीम के घोल से कीट प्रबंधन

तकनीकी टीम ने किसानों को जैविक पोषण और कीट प्रबंधन के उपाय भी बताये. पेड़ों से करीब दो मीटर की दूरी पर गड्ढा बनाकर उसमें गोबर खाद, नीम की पत्ती और केंचुआ खाद डालने की विधि समझायी गयी. इसके अलावा नीम की पत्तियों को उबालकर तैयार किये गये घोल के छिड़काव की जानकारी भी दी गयी.

किसानों को बैक्टीरिया और वायरस से होने वाली समस्याओं में अंतर, माइक्रोस्कोप से पेपरिंग जांच तथा स्वस्थ डीएफएल की पहचान के बारे में भी प्रशिक्षित किया गया.

सितंबर-अक्टूबर की तसर खेती के लिए तैयारी शुरू

आगामी सितंबर-अक्टूबर में शुरू होने वाली वाणिज्यिक तसर खेती को लेकर भी किसानों को आवश्यक मार्गदर्शन दिया गया. तकनीकी टीम ने किसानों के साथ मिलकर अड्डाबाड़ी की साफ-सफाई की. मृत और कमजोर कीटों को एकत्र कर जमीन में दबाया गया, ताकि संक्रमण फैलने की आशंका को कम किया जा सके.

कार्यक्रम में मुनिलाल किस्कू, लुईश, मनीष हांसदा, अर्जुन, राफेल मरांडी, सोना हांसदा, शिवजतन सहित बड़ी संख्या में तसर किसान मौजूद रहे.

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