महुवाटांड़ में फिर गूंजेगा तसर का कारोबार, 90 किसानों को मिला वैज्ञानिक पालन का प्रशिक्षण
कार्यक्रम के दौरान किसानों को जानकारी देते हरोगोपाल दत्ता | Prabhat Khabar Network
महुवाटांड़ में तसर पालन को बढ़ावा देने के लिए जागरूकता कार्यक्रम. 90 किसानों को वैज्ञानिक विधि, पेड़ों की देखभाल और मूल्य शृंखला की दी जानकारी. 10 किसानों का चयन.
सुंदरपहाड़ी : प्रखंड के महुवाटांड़ गांव, पंचायत घटियारी में मेरा रेशम मेरा अभिमान 2.0 अभियान के तहत तसर की खेती को बढ़ावा देने और नये किसानों को तसर पालन से जोड़ने के उद्देश्य से जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किया गया. कार्यक्रम में करीब 90 तसर किसानों ने भाग लिया. इस दौरान पिछले कुछ वर्षों में तसर कीटों के मरने, गुणवत्तापूर्ण डीएफएल नहीं मिलने और लगातार नुकसान के कारण तसर पालन से दूर हुए किसानों को दोबारा इस व्यवसाय से जोड़ने पर विशेष जोर दिया गया.
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तसर पालन से किसानों को जोड़ने पर जोर
कार्यक्रम के मुख्य अतिथि केंद्रीय रेशम अनुसंधान एवं प्रशिक्षण संस्थान, रांची के वैज्ञानिक हरो गोपाल दत्ता ने कहा कि महुवाटांड़ क्षेत्र में पहले किसान बड़े पैमाने पर तसर की खेती करते थे. इससे गांव के किसानों को करीब दो से तीन लाख रुपये तक का लाभ होता था. हालांकि, पिछले दो-तीन वर्षों में उत्पादन में लगातार नुकसान होने के कारण किसानों का तसर खेती के प्रति उत्साह कम हुआ है. उन्होंने कहा कि महिलाओं में भी सूत कटाई और बुनाई जैसे पारंपरिक कार्यों के प्रति रुचि में कमी आयी है.
आसन-अर्जुन के पेड़ों की कमी बनी चुनौती
कार्यक्रम के दौरान वैज्ञानिकों ने किसानों से सीधे संवाद कर तसर पालन में आ रही समस्याओं की जानकारी ली. आसपास के क्षेत्रों में आसन-अर्जुन के पेड़ों की कमी को भी तसर उत्पादन के लिए एक महत्वपूर्ण चुनौती बताया गया.
वैज्ञानिक हरो गोपाल दत्ता ने किसानों को वैज्ञानिक तरीके से तसर पालन, उपयुक्त अड्डाबाड़ी का चयन, आसन-अर्जुन के पेड़ों की देखभाल, साफ-सफाई, कीटों की निगरानी और समय पर उपचार के बारे में जानकारी दी.
अग्र परियोजना केंद्र, पथरा से पहुंचे मोहम्मद जुनैद एवं तकनीकी टीम ने चूना-ब्लीचिंग के उचित उपयोग तथा डीएफएल की गुणवत्ता जांच के संबंध में किसानों को जानकारी दी. किसानों को बताया गया कि निर्धारित प्रक्रिया के अनुसार नौ किलोग्राम चूना में एक किलोग्राम ब्लीचिंग पाउडर का उपयोग किया जाता है. अड्डाबाड़ी में करीब छह फीट की ऊंचाई पर आसन के पेड़ों की कटाई, जलजमाव वाले स्थान का चयन नहीं करने तथा फलदार पेड़ों पर कोकून कीट नहीं रखने समेत अन्य सावधानियों की जानकारी दी गयी.
तसर की पूरी मूल्य शृंखला की दी जानकारी
किसानों को तसर की पूरी मूल्य शृंखला के बारे में भी जानकारी दी गयी. इसमें तसर पालन, कोकून उत्पादन, सूत कटाई, ग्रेडिंग, बुनाई और बाजार से जोड़ने की प्रक्रिया शामिल है. अधिकारियों ने किसानों को उत्पादन के साथ-साथ तसर उत्पादों के बेहतर विपणन पर भी ध्यान देने के लिए प्रेरित किया.
कार्यक्रम में पूर्व मुखिया हेमलाल किस्कू भी उपस्थित थे. उन्होंने किसानों का उत्साह बढ़ाते हुए तसर खेती को दोबारा मजबूत करने की आवश्यकता पर जोर दिया. उन्होंने गांव में आसन-अर्जुन के पौधों का अधिक से अधिक रोपण कराने की बात कही, ताकि भविष्य में तसर पालन के लिए पर्याप्त खाद्य पौधे उपलब्ध हो सकें.
10 किसानों का किया गया चयन
तसर खेती को आगे बढ़ाने के लिए कार्यक्रम के दौरान 10 किसानों का चयन किया गया. संस्था एवं संबंधित विभागों के सहयोग से चयनित किसानों को आवश्यक तकनीकी मार्गदर्शन एवं सहायता उपलब्ध कराकर दोबारा तसर पालन के लिए प्रोत्साहित किया जाएगा.
कार्यक्रम का आयोजन केंद्रीय रेशम बोर्ड की ओर से किया गया. मौके पर राकेश महतो, एलियास, डोरथी एवं किरण कुमारी समेत अन्य लोग उपस्थित थे.
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