राजस्थान पहुंचे झारखंड के हेडमास्टर, जानिए 5 दिनों तक क्या खास सीखेंगे

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शिक्षकों का राजस्थान में पारंपरिक स्वागत | Prabhat Khabar Network

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झारखंड के चयनित प्रधानाध्यापकों का राजस्थान में 5 दिवसीय प्रशिक्षण सह एक्सपोजर विजिट शुरू हो गया है. इस दौरान उन्हें विद्यालय नेतृत्व, प्रबंधन और शैक्षणिक नवाचार की बारीकियां सिखाई जाएंगी.

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गिरिडीह. झारखंड गोल्ड प्रमाणित विद्यालयों के चयनित प्रधानाध्यापकों का राजस्थान में पांच दिवसीय प्रशिक्षण सह एक्सपोजर विजिट शुरू हुआ है. राजस्थान पहुंचने पर झारखंड के सभी चयनित प्रधानाध्यापकों का पिरामल फाउंडेशन की टीम ने पारंपरिक तरीके से स्वागत किया. प्रशिक्षण के दौरान विद्यालय नेतृत्व, प्रबंधन, शैक्षणिक नवाचार और प्रभावी शिक्षण पद्धतियों से जुड़े विभिन्न पहलुओं की जानकारी दी जा रही है.

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इस प्रशिक्षण में गिरिडीह जिले के विभिन्न प्रखंडों के प्रधानाध्यापक भी शामिल हैं. धनवार प्रखंड के कस्तूरबा गांधी बालिका विद्यालय की निवेदिता कुमारी और उत्क्रमित प्लस टू राजकीय मध्य विद्यालय, बिशुपुर के वरुण राय के अलावा गावां, जमुआ, देवरी, पीरटांड़, गिरिडीह और गांडेय प्रखंड के विद्यालयों के प्रधानाध्यापक प्रशिक्षण में हिस्सा ले रहे हैं.

विद्यालय नेतृत्व और प्रबंधन की सीख

प्रशिक्षण राजस्थान स्थित पिरामल स्कूल ऑफ लीडरशिप, अशोक नगर में आयोजित किया जा रहा है. प्रशिक्षण के दौरान प्रधानाध्यापकों को विद्यालय संचालन, नेतृत्व क्षमता, प्रबंधन, शिक्षण प्रक्रिया को प्रभावी बनाने और शैक्षणिक नवाचार से जुड़े विभिन्न विषयों की जानकारी दी जा रही है.

बेहतर विद्यालयों की कार्यप्रणाली समझने का अवसर

पांच दिवसीय एक्सपोजर विजिट के दौरान चयनित प्रधानाध्यापकों को विभिन्न विद्यालयों की बेहतर कार्यप्रणाली को नजदीक से समझने का अवसर मिलेगा. वे विद्यालयों में अपनाये जा रहे शैक्षणिक नवाचार, नेतृत्व की प्रभावी प्रक्रियाओं और प्रबंधन की कार्यप्रणाली का अवलोकन करेंगे. इससे उन्हें अपने विद्यालयों में उपयोगी प्रक्रियाओं को लागू करने के लिए व्यावहारिक अनुभव मिलेगा.

पठन-पाठन में नवाचार पर जोर

पिरामल फाउंडेशन की टीम प्रधानाध्यापकों को प्रशिक्षण दे रही है. प्रशिक्षण का उद्देश्य प्रधानाध्यापकों की नेतृत्व क्षमता और विद्यालय प्रबंधन को मजबूत करने के साथ पठन-पाठन व्यवस्था में नवाचार को बढ़ावा देना है. प्रशिक्षण प्राप्त करने के बाद प्रधानाध्यापक अपने अनुभवों और सीख को विद्यालयों में लागू करेंगे, जिससे शैक्षणिक व्यवस्था को और बेहतर बनाने में मदद मिल सके.

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