बगोदर में हाथियों का कहर जारी, 17 दिनों से गांवों में दहशत; किसानों की फसलें बर्बाद

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हाथियों द्वारा तोड़े गए घर की फोटो

बगोदर के गांवों में 35 हाथियों का झुंड भारी तबाही मचा रहा है. फसल और घरों के नुकसान से ग्रामीणों में आक्रोश है. वन विभाग से कार्रवाई की मांग की है.

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जंगल और इंसान के बीच का संतुलन बिगड़ने लगे तो उसका असर सबसे पहले जंगल से सटे गांवों पर पड़ता है. बगोदर वन क्षेत्र में पिछले 17 दिनों से हाथियों का झुंड लगातार गांवों और खेतों में पहुंचकर तबाही मचा रहा है.

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शनिवार की रात 30-35 हाथियों का झुंड दोंदलों पंचायत में पहुंचा और कई किसानों की फसलें रौंद दीं. हाथियों ने मिट्टी का एक घर, शौचालय, चापाकल, नारियल के पेड़, बांस और चहारदीवारी को भी नुकसान पहुंचाया. लगातार हो रही इस घटना से ग्रामीणों में भय के साथ वन विभाग के प्रति आक्रोश बढ़ता जा रहा है.

हाथियों द्वारा तोड़ा गया मकान की तस्वीर  टेढ़ा किया गया चापाकल की तस्वीर  देखने के लिए जुटी भीड़ | Prabhat Khabar Network

घर तोड़ा और अनाज चट कर गये

ग्रामीणों के अनुसार, शनिवार रात हाथियों ने भोला महतो के खपरैल मकान को तोड़ दिया. घर में रखा चावल और अन्य अनाज भी हाथी खा गये. मकान टूटने से करीब एक लाख रुपये के नुकसान का अनुमान लगाया गया है. इसके अलावा स्वच्छ भारत मिशन से बने शौचालय और विधायक मद से मिले चापाकल को भी हाथियों ने क्षतिग्रस्त कर दिया.

दर्जनों घरों को पहुंचा नुकसान

हाथियों ने दर्जनों किसानों की मकई और धान की फसल रौंदकर बर्बाद कर दी. जगदीश महतो, कुंजलाल महतो, बुधन महतो, जितेंद्र महतो, प्रसादी महतो, गोवर्धन महतो, लखेश्वर महतो समेत कई किसानों के खेत और संपत्ति को नुकसान पहुंचा है.

हाथियों द्वारा तोड़ा गया मकान की तस्वीर  टेढ़ा किया गया चापाकल की तस्वीर  देखने के लिए जुटी भीड़ | Prabhat Khabar Network

गांवों में रात होते ही बढ़ जाता है डर

शनिवार शाम हाथियों का झुंड औरा पंचायत में देखा गया था. इसके बाद झुंड दोंदलों पहुंच गया. ग्रामीणों का कहना है कि हाथी लगातार एक क्षेत्र से दूसरे क्षेत्र में घूम रहे हैं. फिलहाल झुंड के पड़रिया जंगल में होने की जानकारी है. लोगों से जंगल और खेत की ओर नहीं जाने की अपील की गयी है.

जंगल और इंसान के बीच बिगड़ते संतुलन का असर

ग्रामीणों का कहना है कि हाथियों का गांवों में बार-बार आना केवल तत्काल खतरे का मामला नहीं, बल्कि जंगल और मानव जीवन के बीच बिगड़ते संतुलन का संकेत भी है. जब जंगल का प्राकृतिक आवास और भोजन का क्षेत्र प्रभावित होता है, तो वन्यजीव भोजन और पानी की तलाश में मानव बस्तियों की ओर पहुंचते हैं। इसका सबसे बड़ा खामियाजा किसानों को भुगतना पड़ता है.

हाथियों द्वारा तोड़ा गया मकान की तस्वीर  टेढ़ा किया गया चापाकल की तस्वीर  देखने के लिए जुटी भीड़ | Prabhat Khabar Network

वन विभाग पर कार्रवाई नहीं करने का आरोप

ग्रामीण कई दिनों से हाथियों को सुरक्षित तरीके से जंगल की ओर वापस भेजने की मांग कर रहे हैं. उनका आरोप है कि वन विभाग प्रभावी कार्रवाई नहीं कर रहा है. उप प्रमुख हरेंद्र कुमार सिंह ने कहा कि हाथियों को भगाने में वन विभाग नाकाम साबित हुआ है. विशेषज्ञ टीम के आने के बावजूद समस्या का स्थायी समाधान नहीं हो सका है.

किसी ठोस योजना पर बल जरूरी

मुखिया तुलसी महतो ने प्रभावित परिवारों और किसानों को हुए नुकसान का आकलन कर शीघ्र मुआवजा देने की मांग की है. ग्रामीणों की मांग है कि हाथियों को बिना नुकसान पहुंचाये उनके प्राकृतिक आवास की ओर वापस भेजने के साथ-साथ भविष्य में मानव-हाथी संघर्ष रोकने के लिए दीर्घकालीन योजना बनायी जाये.


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