चांदडीह में बूंद-बूंद पानी को तरसे ग्रामीण, सभी 6 चापाकल खराब होने से दूषित पानी पीने की मजबूरी
टूटा चापाकल के पास खड़ा ग्रामीण | Prabhat Khabar Network
गिरिडीह के चांदडीह गांव में पेयजल संकट विकट हो गया है. गांव के सभी छह चापाकल खराब पड़े हैं और नल-जल योजना भी बंद है. इससे ग्रामीणों को पीने के पानी के लिए भारी मुश्किलों का सामना करना पड़ रहा है.
गिरिडीह. जमुआ प्रखंड की बदडीहा टू पंचायत स्थित चांदडीह गांव में पेयजल संकट गहराने से ग्रामीणों की परेशानी बढ़ गयी है. गांव में लगे सभी छह चापाकल खराब पड़े हैं, जबकि नल-जल योजना भी संचालित नहीं हो रही है. इसके कारण ग्रामीणों को दैनिक जरूरतों के लिए पानी जुटाने में कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है. सुरक्षित पेयजल उपलब्ध नहीं होने से कई परिवार कुओं के पानी पर निर्भर हैं.
ग्रामीणों के अनुसार गांव में स्थापित सभी हैंडपंप लंबे समय से खराब हैं. इनमें विभिन्न टोला-मोहल्लों में लगे छह चापाकल शामिल हैं. ग्रामीणों का कहना है कि चापाकलों के बंद होने और नल-जल योजना के ठप पड़ जाने से जल संकट लगातार गंभीर होता जा रहा है.
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नल-जल योजना से भी नहीं मिल रहा लाभ
ग्रामीणों का आरोप है कि गांव में लाखों रुपये की लागत से नल-जल योजना का निर्माण कराया गया, लेकिन वर्तमान में इसका लाभ लोगों को नहीं मिल रहा है. योजना के तहत घरों तक पानी पहुंचाने की व्यवस्था होने के बावजूद आपूर्ति बंद है. इससे लोगों को वैकल्पिक स्रोतों पर निर्भर होना पड़ रहा है.
स्थानीय लोगों का कहना है कि सुरक्षित पेयजल की उपलब्धता नहीं होने के कारण कई परिवार खुले कुओं का पानी उपयोग कर रहे हैं. ग्रामीणों ने आशंका जतायी कि दूषित पानी के उपयोग से जलजनित बीमारियों का खतरा बढ़ सकता है.
कई बार शिकायत का दावा
ग्रामीण आशीष कुमार शर्मा, पप्पू शर्मा, अजित शर्मा और अन्य लोगों ने बताया कि पेयजल समस्या को लेकर विभागीय अधिकारियों को कई बार आवेदन और शिकायत दी गयी है. उनका आरोप है कि अब तक न तो खराब चापाकलों की मरम्मत करायी गयी है और न ही नल-जल योजना को सुचारू रूप से चालू किया गया है.
ग्रामीणों ने जिला प्रशासन और पेयजल एवं स्वच्छता विभाग से अविलंब हस्तक्षेप कर समस्या के समाधान की मांग की है. उनका कहना है कि जल्द कार्रवाई नहीं होने पर स्थिति और गंभीर हो सकती है.
विभाग ने जांच की बात कही
मामले में जमुआ के कनीय अभियंता चंदन कुमार ने कहा कि जलसहिया से जांच रिपोर्ट मांगी गयी है. रिपोर्ट मिलने के बाद खराब चापाकलों की मरम्मत करायी जायेगी. उन्होंने यह भी कहा कि विभाग को अब तक ग्रामीणों की ओर से कोई आवेदन प्राप्त नहीं हुआ है.
ग्रामीणों को उम्मीद है कि जांच और मरम्मत की प्रक्रिया शीघ्र पूरी कर गांव में नियमित पेयजल आपूर्ति बहाल की जायेगी.
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