जबतक समझते ट्रेन काफी करीब आ गयी थी

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चक्रधरपुर : ओड़िशा के सुंदरगढ़ जिले के प्रसिद्ध घोघड़धाम में जलाभिषेक करने आये एक ही परिवार के चार कांवरिये राउरकेला शहर के पानपोष रेलवे पुल पार करने के दौरान मुंबई-हावड़ा मेल की चपेट में रविवार को आ गये. जिससे चारों कांवरियों की मौत हो गयी. सावन की तीसरी सोमवारी में कांवरियों की अधिक भीड़ को […]

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चक्रधरपुर : ओड़िशा के सुंदरगढ़ जिले के प्रसिद्ध घोघड़धाम में जलाभिषेक करने आये एक ही परिवार के चार कांवरिये राउरकेला शहर के पानपोष रेलवे पुल पार करने के दौरान मुंबई-हावड़ा मेल की चपेट में रविवार को आ गये.

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जिससे चारों कांवरियों की मौत हो गयी. सावन की तीसरी सोमवारी में कांवरियों की अधिक भीड़ को देखते हुए रेलवे द्वारा पुल के दोनों तरफ आरपीएफ के जवानों को डयूटी पर लगाया गया था. ट्रेन का संकेत पाकर आरपीएफ के जवान कांवरियों को जाने से रोकते थे. प्रत्यक्षदर्शियों के मुताबिक उक्त जत्थे को भी आरपीएफ जवानों ने रोका पर शायद उन्हें ट्रेन के करीब होने की बात समझ में नहीं आयी.

बड़ी मशक्कत से निकाले गये शव
दुर्घटना के बाद राउरकेला स्टेशन पहुंचने पर ट्रेन के चालक ने इसकी सूचना राउरकेला रेलवे स्टेशन में दी. इसके बाद आरपीएफ के एएससी संजय भगत, राउरकेला ओसी सुधीर कुमार, राउरकेला जीआरपी के साथ-साथ पानपोष एसडीपीओ पद्मणी साहू सहित कई अधिकारी मौके पर पहुंचे. स्थानीय प्रशासन को भी घटना की सूचना देकर तत्काल बचाव के लिए ओड्राफ व फायर ब्रिगेड की टीम को बुलाया गया. बरिश से नदी का जलस्तर बढ़े होने के कारण यमुना और रामवृक्ष के शव तलाशने में कड़ी मशक्कत करनी पड़ी. सुबह होते ही बचाव दल मौके पर पहुंचा और गोताखोरों ने नदी से खोज कर दो कांवरियों के शव बाहर निकाले.
एक घंटे बंद रहा परिचालन, जांच के बाद चालू : रेलवे लाइन के किलोमीटर संख्या 419/18-16 में हादसा हुआ. कांवरिये डाउन लाइन में हादसे का शिकार हुए. उक्त स्थल पर ट्रेन आ जाने पर किनारे खड़े होने तक की जगह नहीं बचती. हादसे के बाद मेल ट्रेन के चालक ने पानपोष रेलवे स्टेशन पर ट्रेन रोक दिया. उसने स्टेशन मास्टर को मेमो देकर हादसे की जानकारी दी. इसके बाद करीब एक घंटे तक उक्त मार्ग से ट्रेनों का आवागमन बंद हो गया. पूरी ट्रेन और ट्रैक की जांच की गयी. जांच के बाद जब फिट मेमो दिया गया तब ट्रेन गंतव्य की ओर रवाना हुई.
ड्रेस का रंग समान होने से गैंगमैन होने का हुआ भ्रम : मेल ट्रेन के चालक को हादसे के बाद लगा था कि रेलवे में काम करने वाले गैंगमैन अथवा ट्रैक मेंटेनरों की मौत हुई है. ऐसा भ्रम कांवरियों के ड्रेस का रंग गैंगमैन-ट्रैक मेंटेनरों की तरह केसरिया होंने के कारण हुआ. पानपोष में स्टेशन मास्टर को दिये गये मेमो में तीन की मौत और तीन के नदी में कूद जाने की सूचना चालक ने दी थी.
प्राय: लोग करते हैं रेल पुल का इस्तेमाल
घोघड़धाम में जलाभिषेक करने के लिए सावन के प्रत्येक रविवार को हजारों कांवरिये ब्राह्मणी नदी में जल उठाने जाते हैं. पुलिया में पैदल पार होने के लिए फुटपाथ नहीं है. हालांकि अलग से बने दूसरे पुल से सड़क गुजरी है. लंबा रास्ता होने के कारण लोग नदी में जल भरने के लिए सड़क वाले पुल का इस्तेमाल नहीं करते. प्राय: लोग जोखिम में जान डालकर रेल पुल पार करते हैं. केवल ट्रेनों के लिए पुल बना होने के कारण उस पर प्रकाश की व्यवस्था भी नहीं की गयी है.
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