करम पर्व की पूर्व संध्या पर सजेगा रोहड़ा-शिकारपुर मैदान, झूमर और पारंपरिक नृत्य से गूंजेगा महोत्सव

Updated:
विज्ञापन

जवा डाली रखकर करम नृत्य करते हुए युवतियां | Prabhat Khabar Network

WhatsApp चैनल से जुड़ेंगूगल पर प्रभात खबर चुनें

रोहड़ा-शिकारपुर में करम पर्व महोत्सव की तैयारियां पूरी हैं. झूमर, पारंपरिक नृत्य और खेलकूद के साथ यह पर्व भाई-बहन के प्रेम व आदिवासी संस्कृति को जीवंत करेगा. नई पीढ़ी को इससे जोड़ने का है उद्देश्य.

विज्ञापन

प्रतिनिधि, मसलिया : करम पर्व की पूर्व संध्या पर रोहड़ा-शिकारपुर मैदान में करम महोत्सव को लेकर तैयारियां पूरी कर ली गयी हैं. करम समिति रोहड़ा-शिकारपुर की ओर से आयोजित महोत्सव में मसलिया प्रखंड के पहाड़गोड़ा, गुलामीबथान, कुशवेदिया, कोल्हड़िया, नागरापाथर सहित विभिन्न गांवों से बड़ी संख्या में ग्रामीण, युवक-युवतियां और व्रती शामिल होंगे.

विज्ञापन

झूमर और करम गीत-नृत्य का रंग

एकादशी के अवसर पर आयोजित होने वाले इस कार्यक्रम में झूमर, करम गीत-नृत्य सहित विभिन्न पारंपरिक खेलकूद प्रतियोगिताएं आकर्षण का केंद्र रहेंगी.

भाई-बहन के प्रेम से जुड़ा पर्व

करम पर्व झारखंड की समृद्ध आदिवासी संस्कृति, परंपरा और भाई-बहन के प्रेम से जुड़ा महत्वपूर्ण पर्व है. पर्व को लेकर गांवों में कई दिनों से तैयारियां चल रही हैं. सोमवार को करम डाली लाने से लेकर पूजा-अर्चना तक की तैयारी की गयी है.

करम डाली की होगी पूजा

पर्व के दिन सुबह से ही व्रती महिलाएं और युवतियां करम पेड़ की डाली को विधि-विधान के साथ लाकर पूजा स्थल पर स्थापित करेंगी. दिनभर उपवास रखकर व्रती भाई की लंबी उम्र, सुख-समृद्धि और परिवार की खुशहाली की कामना करेंगी.

करम कथा के बाद नृत्य का दौर

शाम को पूजा-अर्चना के दौरान बुजुर्गों और पंडित के द्वारा करम कथा सुनायी जाएगी. इसके बाद पारंपरिक करम गीत, झूमर और नृत्य का दौर शुरू होगा. ग्रामीण पारंपरिक वाद्य यंत्रों की धुन पर करम गीत और नृत्य प्रस्तुत करेंगे.

खेलकूद में दिखेगा उत्साह

महोत्सव में खेलकूद समेत प्रतियोगिताएं आयोजित की जाएंगी. प्रतियोगिताओं में बेहतर प्रदर्शन करने वाले प्रतिभागियों को प्रथम, द्वितीय और तृतीय स्थान के लिए पुरस्कृत किया जाएगा. विजेताओं को मुख्य अतिथियों के हाथों पुरस्कार देकर सम्मानित किया जाएगा.

नई पीढ़ी को संस्कृति से जोड़ना उद्देश्य

करम समिति के सदस्यों ने बताया कि महोत्सव का उद्देश्य पारंपरिक संस्कृति और रीति-रिवाजों को जीवंत रखते हुए नई पीढ़ी को इससे जोड़ना है. आयोजन को लेकर समिति के सदस्य मैदान की साफ-सफाई और अन्य व्यवस्थाओं में जुटे हैं.

आपके शहर में

विज्ञापन

Prabhat Khabar App :

देश, एजुकेशन, मनोरंजन, बिजनेस अपडेट, धर्म, क्रिकेट, राशिफल की ताजा खबरें पढ़ें यहां. रोजाना की ब्रेकिंग हिंदी न्यूज और लाइव न्यूज कवरेज के लिए डाउनलोड करिए

Download from Google PlayDownload from App Store
विज्ञापन
Sponsored Linksby Taboola