दुमका पहुंचे BAU के 18 छात्र, तसर कोकून से धागे और बुनाई तक समझी पूरी प्रक्रिया

Updated:
विज्ञापन

रांची से दुमका पहुंचे छात्र छात्राएं. | Prabhat Khabar Network

WhatsApp चैनल से जुड़ेंगूगल पर प्रभात खबर चुनें

बिरसा कृषि विश्वविद्यालय के 18 छात्रों ने दुमका में तसर उत्पादन, कोकून से धागा निर्माण और बुनाई की पूरी प्रक्रिया समझी. रोजगार की संभावनाओं की भी जानकारी ली.

विज्ञापन

संवाददाता, दुमका: बिरसा कृषि विश्वविद्यालय, रांची के 18 छात्र सोमवार को दुमका पहुंचे और मयूराक्षी सिल्क से जुड़े विभिन्न आयामों की जानकारी ली. अध्ययन भ्रमण के दौरान छात्रों ने तसर रेशम उत्पादन की पूरी प्रक्रिया को समझा. साथ ही इससे जुड़े रोजगार और स्वरोजगार की संभावनाओं के बारे में भी जानकारी प्राप्त की.

विज्ञापन

सहायक उद्योग निदेशक कार्यालय, दुमका में पूर्व सहायक उद्योग निदेशक सुधीर कुमार सिंह ने छात्रों को तसर उत्पादन से जुड़े विभिन्न पहलुओं की विस्तार से जानकारी दी.

कीट पालन से कोकून उत्पादन तक समझी प्रक्रिया

सुधीर कुमार सिंह ने छात्रों को बताया कि तसर रेशम उत्पादन की शुरुआत कीट पालन से होती है. इसमें कीट पालन प्रबंधन, रोग प्रबंधन और कोकून उत्पादन के बाद कोकून से धागा तैयार करने की प्रक्रिया महत्वपूर्ण होती है.

उन्होंने धागे से वस्त्र निर्माण तक के विभिन्न चरणों की जानकारी देते हुए बताया कि तसर आधारित गतिविधियां ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती हैं.

अहिंसा सिल्क और महिलाओं की भूमिका की भी ली जानकारी

अध्ययन भ्रमण के दौरान छात्रों ने अहिंसा सिल्क के उत्पादन की प्रक्रिया के बारे में भी जानकारी ली. उन्हें बताया गया कि अहिंसा सिल्क के उत्पादन में रेशम के कोकून से जुड़े अलग तरीके अपनाये जाते हैं.

इसके अलावा महिलाओं द्वारा तैयार किये जा रहे तसर आधारित वस्त्रों के विपणन और उत्पादों को बाजार तक पहुंचाने की प्रक्रिया के बारे में भी छात्रों को बताया गया. इस दौरान उन्हें बाजार से जुड़ी चुनौतियों की जानकारी भी मिली.

मिश्रित खेती के साथ तसर उत्पादन की संभावनाओं पर चर्चा

सुधीर कुमार सिंह ने कृषि के साथ मिश्रित खेती के रूप में तसर उत्पादन की संभावनाओं पर भी चर्चा की. उन्होंने बताया कि किसान पारंपरिक कृषि के साथ तसर उत्पादन को जोड़कर आय के अतिरिक्त स्रोत विकसित कर सकते हैं.

तसर उत्पादन से जुड़े कीट पालन, कोकून उत्पादन, धागा निर्माण और वस्त्र निर्माण जैसी गतिविधियों से ग्रामीण स्तर पर रोजगार के अवसर भी विकसित हो सकते हैं.

यह भी पढ़ें:

चूहे के चक्कर में गई जान, 11 हजार वोल्ट तार की चपेट में आया अधेड़

कोकून से धागा और धागे से वस्त्र तक देखा

इसके बाद प्रधान लिपिक गजेंद्र मिश्रा ने छात्रों को पुराने विकास भवन में तसर कोकून से धागा तैयार करने और बुनाई का कार्य कर रही महिलाओं से मिलवाया.

छात्रों ने महिलाओं से बातचीत कर धागा निर्माण की प्रक्रिया को समझा. इसके बाद बुनाई की प्रक्रिया को भी करीब से देखा और इससे जुड़े व्यावहारिक पहलुओं की जानकारी ली.

छात्रों ने तसर रेशम के उत्पादन से लेकर तैयार वस्त्र तक की पूरी प्रक्रिया को समझने में विशेष रुचि दिखाई. अध्ययन भ्रमण के दौरान उन्हें यह समझने का अवसर मिला कि कृषि आधारित गतिविधियों को स्थानीय स्तर पर प्रसंस्करण, हस्तशिल्प और विपणन से जोड़कर आजीविका के अवसर विकसित किये जा सकते हैं.

मौके पर क्षेत्रीय कृषि अनुसंधान केंद्र, दुमका के क्षेत्रीय निदेशक डॉ. एके साहा तथा बिहार के सेवानिवृत्त प्रबंधक अशोक देव भी मौजूद थे.

आपके शहर में

विज्ञापन

Prabhat Khabar App :

देश, एजुकेशन, मनोरंजन, बिजनेस अपडेट, धर्म, क्रिकेट, राशिफल की ताजा खबरें पढ़ें यहां. रोजाना की ब्रेकिंग हिंदी न्यूज और लाइव न्यूज कवरेज के लिए डाउनलोड करिए

Download from Google PlayDownload from App Store
विज्ञापन
Sponsored Linksby Taboola