25 लाख का गोबर गैस प्लांट 2 साल से बंद, 13 परिवारों को कनेक्शन के बाद भी सुविधा नहीं
बेकार पड़ा गोबर गैस संयंत्र. | Prabhat Khabar Network
गोबिंदपुर गांव में 25 लाख की लागत से बना गोबर गैस प्लांट दो साल से बंद पड़ा है. लाखों की लागत के बावजूद ग्रामीणों को घरेलू गैस की सुविधा नहीं मिल पा रही है. योजना का उद्देश्य पूरा न होने से लाखों रुपये बर्बाद हो रहे हैं.
प्रतिनिधि, रानीश्वर: रानीश्वर प्रखंड की गोबिंदपुर पंचायत के गोबिंदपुर गांव में करीब 25 लाख रुपये की लागत से बनाया गया गोबर गैस संयंत्र पिछले दो वर्षों से चालू नहीं हो सका है. पेयजल एवं स्वच्छता विभाग, दुमका प्रमंडल-1 की ओर से स्वच्छ भारत मिशन ग्रामीण फेज-2 के तहत तैयार कराये गये इस संयंत्र से ग्रामीणों को घरेलू गैस उपलब्ध कराने का लक्ष्य था.
ग्रामीणों के अनुसार, निर्माण के करीब दो साल बीत जाने के बावजूद संयंत्र का इस्तेमाल शुरू नहीं हुआ है. नतीजतन लाखों रुपये की लागत से बना प्लांट गांव में अब सिर्फ शोभा की वस्तु बनकर रह गया है.
25 परिवारों को मिलना था गैस कनेक्शन
योजना के तहत गोबिंदपुर गांव के 25 परिवारों को गैस कनेक्शन देने का प्रावधान किया गया है. ग्रामीणों का कहना है कि अब तक केवल 13 परिवारों को पाइपलाइन से जोड़ा गया है, लेकिन इन कनेक्शनों से आज तक गैस की आपूर्ति शुरू नहीं हुई.
ग्रामीणों के मुताबिक रानीश्वर प्रखंड में यह इस योजना का एकमात्र गोबर गैस संयंत्र है. इसके बावजूद संयंत्र शुरू नहीं होने से योजना का उद्देश्य पूरा नहीं हो पा रहा है.
12 फीट गहरा गड्ढा, टैंक और मोटर भी तैयार
संयंत्र के लिए करीब 12 फीट गहरे और चौड़े गड्ढे का निर्माण कर उसे सीमेंट से कुएं की तरह तैयार किया गया है. इसे लोहे के ड्रम से ढका गया है.
इसके अलावा गोबर का घोल तैयार करने के लिए बगल में सीमेंट का टैंक बनाया गया है. पानी की व्यवस्था के लिए चापानल और मोटर भी लगाया गया है. मोटर को बिजली से संचालित करने का प्रावधान है, लेकिन ग्रामीणों के अनुसार अब तक बिजली कनेक्शन ही नहीं दिया गया है.
न हैंडओवर, न ग्रामीणों को दी गयी पूरी जानकारी
ग्रामीणों का कहना है कि संयंत्र का निर्माण होने के बाद इसे अब तक ग्रामीणों को हैंडओवर नहीं किया गया है. इसके संचालन और रखरखाव को लेकर ग्रामीणों के साथ कोई बैठक कर विस्तृत जानकारी भी नहीं दी गयी.
ग्रामीणों का कहना है कि यदि समय पर संयंत्र चालू कर दिया जाता तो घर-घर गैस पहुंचने से उन्हें काफी लाभ मिल सकता था.
रोज एक टोकरी गोबर देने का प्रावधान
गोबर गैस संयंत्र के लिए ग्रामीण परिवारों को अपने स्तर से गोबर उपलब्ध कराना है. गैस कनेक्शन लेने वाले परिवार को प्रतिदिन एक टोकरी गोबर देने का प्रावधान बताया गया है.
संयंत्र का उद्देश्य ग्रामीण परिवारों को वैकल्पिक ईंधन उपलब्ध कराने के साथ ईंधन की बचत करना है. संयंत्र के साथ "ईंधन बचाओ, जीवन बचाओ" का संदेश भी दिया गया है.
ग्रामीणों का कहना है कि यदि संयंत्र को नियमित रूप से चालू किया जाए और घरों तक गैस की आपूर्ति शुरू हो, तो योजना का वास्तविक लाभ लोगों को मिल सकता है.
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