हमारे दिल की तुम्हारे दिल की कहो कहानी कहां जुदा है…
Author Prabhat khabar news desk
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नवल विहान साहित्य कला सांस्कृतिक मंच का वार्षिकोत्सव में रविवार को पीके राय मेमोरियल कालेज के सभागार में मनाया गया. इसमें रचानाकारों ने काव्य धारा बहायी.
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उप मुख्य संवाददाता, धनबाद.
हमारे दिल की तुम्हारे दिल की कहो कहानी कहां जुदा है… मंच से वरीय कवयित्री डॉ संगीता नाथ ने जैसे ही यह गजल पढ़ा पीके राय मेमोरियल कालेज के सभागार में बैठे रचनाकार वाह-वाह कर उठे. श्रोताओं ने तालियां बजायीं. मौका था नवल विहान साहित्य कला सांस्कृतिक मंच के वार्षिकोत्सव कार्यक्रम का. इसमें स्थानीय रचनाकारों के साथ ही दूसरे राज्यों से लगभग 55 रचनाकारों ने भाग लिया. कार्यक्रम का उद्घाटन मुख्य अतिथि सह बीबीएमकेयू के कुलपति प्रोफेसर रामकुमार सिंह व अन्य अतिथियों ने संयुक्त रूप से किया. वरीय कवयित्री डॉ संगीता नाथ ने गणेश वंदना की प्रस्तुति दी. वहीं नीरजा पप्पी ने सरस्वती वंदना पेश की. कार्यक्रम में मुख्य अतिथि कुलपति प्रो. सिंह ने कहा कि संस्था साहित्य व संस्कृति साथ लेकर चल रही है. उनका आयोजन काबिले तारिफ है. विशिष्ट अतिथि हिंदी विभाग के विभागाध्यक्ष डॉ मृत्युंजय कुमार सिंह, डॉ रीता सिंह, पश्चिम बंगाल से आये वरीय साहित्यकार शिव सागर उपाध्याय, वरीय साहित्यकार जयप्रकाश नारायण ओझा ने भी संबोधित किया. अध्यक्षता वरिष्ठ साहित्यकार अनुराग अन्वेषी ने की. कहा कि कोयलांचल में इतने साहित्यकारों काे जुटाना संस्था की सार्थक पहल है. संस्था के अध्यक्ष बरनवाल मनोज अंजान ने संस्था के क्रियाकलापों पर प्रकाश डाला. सचिव डॉ मुकुंद रविदास व महाप्रबंधक श्याम किशोर प्रसाद ने अपने वक्तव्य रखें. साहित्य समागम छह सत्रों में हुआ. बरनवाल मनोज अंजान ने गजल ””चंद सिक्कों से उसने तौला मुझे…””, स्नेहप्रभा पांडेय ने ””””विद्या का मंदिर कहते हो वहीं दरिंदा बसता है…””, श्यामदेव मंडल ने ””ये देश हमारा है, सारे जग से न्यारा है…””,डॉ कौशिकी ने ””संस्कृत से जन्मी संस्कृति सिखलाती है…””, संगीता श्रीवास्तव ने ””पूजे समाज लक्ष्मी-दुर्गा-काली सखियों, मानवता क्यूं होती शर्मसार सखियों…”” सुनाकर श्रोताओं की वाहवाही लूटी.इन पुस्तकों का हुआ विमोचन :
मौके पर अतिथियों ने संस्था की पुस्तक सृजन प्रवाह का विमोचन किया. इसमें 50 कवि कवयित्रियों की रचनाएं समाहित हैं. इसके अलावा पूनम प्रसाद पृथा का उपन्यास चल पड़ी जिंदगी व दुनिया मेरे आगे, डॉ सुदेश चुग की पुस्तक काव्य धारा, मंजू शरण मंजूल की कही अनकही पुस्तक का विमोचन किया गया. कार्यक्रम में धनबाद, रांची, बोकारो, जामताड़ा, जमशेदपुर, दिल्ली, छतीसगढ़ पटना, देवघर, जामताड़ा, गिरिडीह, पश्चिम बंगाल, सरिया, हजारीबाग, जमशेदपुर के रचनाकारों ने प्रस्तुति दी. रचनाकार अंशुल नरूला की प्रस्तुति की सबने सराहना की. रचनाकार स्नेहप्रभा पांडे, प्रमिला श्री तिवारी, सरिता पांडे, ममता पांडे, डॉ संगीता नाथ, संतोष प्रभाकर ओझा, संगीता श्रीवास्तव, मंजू शरण मंजूल, पूनम प्रसाद, मिनाक्षी राय, गीता कुमारी गुस्ताख, मोनिका प्रसाद आदि ने भी रचना प्रस्तुत की. मौके पर ब्रह्मदेव बरनवाल, वीरेंद्र, सुरेश प्रसाद, जानकी देवी, नीलम, प्रोफेसर मीना राय आदि थे. संचालिका डॉ अरविंदर कौरअपने शानदार संचालन से मंच को बांधे रखा. आयोजन में बीबीएमकेयू के स्टूडेंट्स ने भी सक्रिय भूमिका निभायी.डिस्क्लेमर: यह प्रभात खबर समाचार पत्र की ऑटोमेटेड न्यूज फीड है. इसे प्रभात खबर डॉट कॉम की टीम ने संपादित नहीं किया है
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