धनबाद में वाहनों का PUC प्रमाणपत्र बनना क्यों हुआ मुश्किल? 150 में से सिर्फ 15 केंद्र चालू, जानें वजह
प्रदूषण नियंत्रण प्रमाणपत्र केंद्र
धनबाद में वाहनों के प्रदूषण नियंत्रण प्रमाणपत्र जारी करने की व्यवस्था संकट में है. ज्वाइंट ट्रांसपोर्ट कमिश्नर का पद खाली होने से 150 में से सिर्फ 15 केंद्र ही चालू हैं, जिससे वाहन मालिक और पेट्रोल पंप संचालक परेशान हैं. इस समस्या के समाधान के लिए वैकल्पिक व्यवस्था की मांग की जा रही है.
धनबाद. जिले में वाहनों के प्रदूषण नियंत्रण प्रमाणपत्र (पीयूसी) जारी करने की व्यवस्था संकट में फंस गयी है. करीब छह माह से ज्वाइंट ट्रांसपोर्ट कमिश्नर (जेटीसी) का पद खाली रहने के कारण प्रदूषण जांच केंद्रों के लाइसेंस के नवीकरण और नये लाइसेंस जारी करने की प्रक्रिया प्रभावित बतायी जा रही है. जिले में करीब 150 पीयूसी केंद्र होने के बावजूद वर्तमान में महज करीब 15 केंद्रों से ही प्रदूषण प्रमाणपत्र जारी होने की बात सामने आ रही है. बाकी केंद्रों के लाइसेंस से जुड़ी प्रक्रिया अटकी हुई है.
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इसका सीधा असर वाहन मालिकों पर पड़ रहा है. जिन वाहनों का पीयूसी प्रमाणपत्र समाप्त हो रहा है, उनके मालिकों को वैध प्रमाणपत्र बनवाने के लिए सीमित केंद्रों पर निर्भर रहना पड़ रहा है. वहीं, पीयूसी केंद्रों की लाइसेंस संबंधी प्रक्रिया लंबित रहने से पेट्रोल पंप संचालकों की परेशानी भी बढ़ गयी है.
जेटीसी का पद खाली, लाइसेंस प्रक्रिया प्रभावित
निजी प्रदूषण जांच केंद्रों के लाइसेंस जारी करने और उनके नवीकरण में जेटीसी की महत्वपूर्ण भूमिका होती है. विभाग के नागरिक सेवा मानक में भी निजी पीयूसी केंद्रों के लाइसेंस जारी करने और नवीकरण के लिए जेटीसी को जिम्मेदार अधिकारी बताया गया है.
ऑनलाइन प्रक्रिया के तहत आवेदन के बाद दस्तावेजों की जांच, मोटर वाहन निरीक्षक (एमवीआइ) द्वारा केंद्र का साइट वेरिफिकेशन और इसके बाद जेटीसी स्तर से अनुमोदन का प्रावधान है. जेटीसी का पद लंबे समय से रिक्त रहने के कारण लाइसेंस संबंधी मामलों के निस्तारण पर इसका असर पड़ रहा है. लाइसेंस की अवधि समाप्त होने वाले केंद्रों के सामने नवीकरण की समस्या है, जबकि नये केंद्रों के लाइसेंस की प्रक्रिया भी प्रभावित बतायी जा रही है.
पीयूसी केंद्रों की वैधता का असर पेट्रोल पंपों पर
पीयूसी सेंटरों के लाइसेंस नवीकरण का मामला केवल वाहन मालिकों तक सीमित नहीं है. कई पेट्रोल पंपों पर प्रदूषण जांच केंद्र संचालित होते हैं. इन केंद्रों की वैधता प्रभावित होने से संबंधित पेट्रोल पंपों के डीटीओ लाइसेंस के नवीकरण पर भी असर पड़ने की बात सामने आ रही है.
पेट्रोल पंपों पर पीयूसी सुविधा होने से वाहन चालकों को ईंधन भराने के साथ ही प्रदूषण की जांच कराने की सुविधा मिलती है. ऐसे में केंद्रों की लाइसेंस प्रक्रिया लंबित रहने से पंप संचालकों और वाहन मालिकों दोनों के लिए परेशानी बढ़ रही है.
सीमित केंद्रों पर बढ़ सकता है दबाव
वाहनों के लिए पीयूसी प्रमाणपत्र अनिवार्य होने के कारण इसकी समय पर जांच जरूरी है. निजी और व्यावसायिक वाहनों में पीयूसी की वैधता वाहन के प्रकार और ईंधन के आधार पर अलग-अलग हो सकती है. ऐसे में यदि बड़ी संख्या में केंद्र नियमित रूप से प्रमाणपत्र जारी नहीं कर पाते हैं, तो उपलब्ध केंद्रों पर वाहनों की संख्या बढ़ने से दबाव बढ़ सकता है.
स्थानीय स्तर पर बताया गया है कि डीजल वाहनों को करीब छह माह और पेट्रोल वाहनों को एक वर्ष के अंतराल पर पीयूसी कराना पड़ता है. हालांकि, लागू नियमों के अनुसार किसी वाहन की पीयूसी वैधता उसकी श्रेणी और संबंधित प्रावधानों के आधार पर निर्धारित होती है.
तत्काल वैकल्पिक व्यवस्था की मांग
झारखंड पेट्रोलियम एसोसिएशन के अध्यक्ष अशोक सिंह ने कहा कि करीब छह माह से ज्वाइंट ट्रांसपोर्ट कमिश्नर का पद खाली है. उनके अनुसार, इससे न तो पीयूसी केंद्रों के लाइसेंस का नवीकरण हो पा रहा है और न ही नये लाइसेंस जारी किये जा रहे हैं. उन्होंने कहा कि इससे सरकार को राजस्व का नुकसान हो रहा है और पेट्रोल पंप संचालकों को भी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है.
अशोक सिंह ने सरकार से तत्काल वैकल्पिक व्यवस्था करने की मांग की, ताकि वैध पीयूसी केंद्रों का संचालन बाधित नहीं हो और पेट्रोल पंपों के लाइसेंस नवीकरण की प्रक्रिया भी प्रभावित न हो.
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