जनता मजदूर संघ की मान्यता पर फिर विवाद, सिद्धार्थ गौतम बोले- हाईकोर्ट के आदेश का पालन करे BCCL

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जनता मजदूर संघ विवाद पर सिद्धार्थ गौतम ने बीसीसीएल प्रबंधन को पत्र लिखकर हाई कोर्ट के आदेश का पालन करने और अवैध गुटों को मान्यता न देने की मांग की है।

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जनता मजदूर संघ के नाम व पदाधिकारियों को लेकर चल रहा विवाद एक बार फिर चर्चा में है. संघ के महासचिव सिद्धार्थ गौतम की ओर से अधिवक्ता अमलान पालित ने सोमवार को बीसीसीएल के सीएमडी को पत्र भेजकर झारखंड हाइकोर्ट के आदेश की जानकारी दी है.

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पत्र के अनुसार, जनता मजदूर संघ के पंजीकरण को रद्द करने की मांग को लेकर दायर डब्ल्यूपीसी संख्या 2832/2022 को हाइकोर्ट ने 15 जुलाई 2026 को खारिज कर दिया. अधिवक्ता का दावा है कि याचिका दायर करने वाले लोग जनता मजदूर संघ के पदाधिकारी होने का दावा कर रहे थे, जबकि उनके पास संघ का वैध पंजीकरण नहीं है.

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पत्र में कहा गया है कि झारखंड में जनता मजदूर संघ के नाम से पंजीकृत संघ का पंजीकरण संख्या 281/2021 है और इसका पंजीकृत कार्यालय झरिया स्थित बिहार बिल्डिंग में है. वर्तमान में सिद्धार्थ गौतम संघ के महासचिव हैं. उनसे पहले कुंती देवी महासचिव थीं.

अधिवक्ता ने बीसीसीएल प्रबंधन से आग्रह किया है कि जनता मजदूर संघ के नाम से किसी दूसरे गुट या ऐसे पदाधिकारी को कार्यालयी स्तर पर मान्यता या सुविधा नहीं दी जाये, जिनके पास वैध पंजीकरण या संघ के संविधान के अनुसार अधिकार नहीं है. पत्र में आरोप लगाया गया है कि कुछ लोग भारत सिंह बिल्डिंग, कतरास मोड़, झरिया के पते का इस्तेमाल कर संघ के पदाधिकारी होने का दावा कर रहे है.

13 हजार सदस्यों का किया दावा

पत्र में सिद्धार्थ गौतम गुट की ओर से दावा किया गया है कि जनता मजदूर संघ के करीब 13 हजार सदस्य बीसीसीएल में है. अधिवक्ता ने कहा है कि संघ ने ट्रेड यूनियन से जुड़े आवश्यक प्रावधानों का पालन किया है. अधिवक्ता ने पत्र में स्पष्ट किया है कि हाइकोर्ट में दायर याचिका खारिज होने के बावजूद उनके मुवक्किल के अन्य कानूनी अधिकार और उपाय सुरक्षित है.

क्या है मामला ?

जनता मजदूर संघ एक जमाने में धनबाद का सबसे बड़ा मजदूर संघ था. इसकी स्थापना झरिया के पूर्व विधायक सूरजदेव सिंह ने की थी. डेढ़-दो दशक पहले स्व सूरजदेव सिंह के परिवार में विवाद हुआ. इसके बाद उनके अनुज झारखंड सरकार के पूर्व मंत्री बच्चा सिंह ने अलग राजनीति शुरू की.

दूसरी तरफ स्व सिंह की पत्नी सह झरिया की पूर्व विधायक कुंती सिंह ने जनता मजदूर संघ की बागडोर अपने हाथों में ली. इसी के बाद धनबाद में जनता मजदूर संघ दो गुटों में बंट गया. कुंती गुट और बच्चा सिंह गुट. दोनों गुट खुद को असली जनता मजदूर संघ बताता. इसके बाद कानूनी लड़ाई शुरू हुई.


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