झरिया में हैवी ब्लास्टिंग से जमीन धंसी, घरों में पड़ी दरारें, लोगों का आरोप-सुरक्षा मानकों की अनदेखी

Updated:
विज्ञापन

कई घरों में पड़े दरार

राजापुर कोलियरी में हैवी ब्लास्टिंग से घरों में दरारें आने से हड़कंप। डीजीएमएस सुरक्षा मानकों और हाईकोर्ट के 100 मीटर नियम के उल्लंघन पर उठे गंभीर सवाल।

विज्ञापन

झरिया के राजापुर कोलियरी एरिया-9 अंतर्गत भगतडीह-कामिनी कल्याण बस्ती में हैवी ब्लास्टिंग के बाद कई घरों में दरारें पड़ने से प्रभावित परिवारों में दहशत है. ग्रामीणों का आरोप है कि ब्लास्टिंग के दौरान तेज कंपन महसूस हुआ, जिसके बाद मकानों की दीवारों में दरारें आ गईं. स्थिति को देखते हुए कुछ परिवारों को अस्थायी रूप से दूसरे स्थान पर शिफ्ट होना पड़ा.

आपके शहर में

विज्ञापन

प्रभावित परिवारों में संजय सिंह, विजय रवानी, रमेश रवानी, भोला रवानी, आशीष रवानी, गोविंद सिंह, विजय सिंह, बलराम रवानी, निरंजन रवानी और मानिकचंद रवानी सहित अन्य लोग शामिल हैं. स्थानीय लोगों का कहना है कि प्रभावित मकान रैयती जमीन पर बने हैं और उनकी मांग नियमसंगत है. ग्रामीणों ने मामले की निष्पक्ष जांच कराकर नुकसान का आकलन और उचित मुआवजा देने की मांग की है.

ब्लास्टिंग सुरक्षा व्यवस्था पर उठे सवाल

घटना के बाद बीसीसीएल की ब्लास्टिंग व्यवस्था और डीजीएमएस की सुरक्षा निगरानी पर सवाल खड़े हो गए हैं. कोयला खदानों में ब्लास्टिंग के दौरान सुरक्षा मानकों का पालन अनिवार्य है. ऐसे में यह जांच जरूरी है कि ब्लास्टिंग से पहले प्रभावित मकानों का सर्वे और आकलन किया गया था या नहीं. साथ ही ब्लास्टिंग के दौरान कंपन की निगरानी और डीजीएमएस की अनुमति की शर्तों का पालन हुआ या नहीं, इसकी भी जांच की मांग उठ रही है.

Image

हाईकोर्ट के 100 मीटर सुरक्षा मानक का भी जिक्र

ग्रामीणों ने 7 मई 2024 के झारखंड हाईकोर्ट के एक मामले का हवाला देते हुए 100 मीटर सुरक्षा मानक के पालन की जांच की मांग की है. अंबे माइनिंग प्रा. लि. बनाम बीसीसीएल मामले में डीजीएमएस की सुरक्षा शर्तों को लेकर अदालत में मामला सामने आया था. निरीक्षण के दौरान ब्लास्टिंग स्थल से करीब 75-80 मीटर की दूरी पर संरचनाएं पाए जाने की बात सामने आई थी.

डीजीएमएस की ओर से 100 मीटर के दायरे में स्थायी मकान या सतही संरचना होने की स्थिति में सुरक्षा संबंधी शर्तों के पालन पर जोर दिया गया था. ऐसे में राजापुर में भी यह जांच का विषय है कि ब्लास्टिंग स्थल से प्रभावित मकानों की वास्तविक दूरी कितनी है और वहां लागू सुरक्षा शर्तों का पालन किया गया या नहीं.

भूमिगत आग से पहले से प्रभावित है क्षेत्र

राजापुर-भगतडीह और आरएसपी कॉलेज के आसपास का इलाका लंबे समय से भूमिगत आग की समस्या से प्रभावित रहा है. वर्ष 2017 में खतरे को देखते हुए तत्कालीन मुख्य सचिव राजबाला वर्मा के निर्देश पर तत्कालीन उपायुक्त अंजनेयलु दोड्डे ने आरएसपी कॉलेज को सुरक्षित स्थान पर स्थानांतरित करने की प्रक्रिया शुरू की थी. ऐसे में अब इसी क्षेत्र में ब्लास्टिंग के बाद मकानों में दरारें आने से सुरक्षा और निगरानी व्यवस्था पर सवाल उठ रहे हैं.

ग्रामीणों ने तकनीकी जांच की मांग की

ग्रामीणों का आरोप है कि बीसीसीएल ने समय पर मामले को गंभीरता से नहीं लिया और आउटसोर्सिंग कंपनी की ओर से सुरक्षा मानकों की अनदेखी की जा रही है. लोगों ने रात के समय घरों में काला धुआं और धूल आने की भी शिकायत की है.

घटना की सूचना मिलने पर पुलिस मौके पर पहुंची. प्रभावित परिवारों ने डीजीएमएस और बीसीसीएल की तकनीकी टीम से स्थल का निरीक्षण कर वैज्ञानिक तरीके से आकलन कराने की मांग की है. ग्रामीणों ने ब्लास्टिंग अनुमति, इस्तेमाल किए गए विस्फोटक की मात्रा, ब्लास्ट डिजाइन, कंपन की रिकॉर्डिंग और 100 मीटर सुरक्षा शर्त से जुड़े दस्तावेजों की जांच की मांग भी उठाई है.


विज्ञापन

Prabhat Khabar App :

देश, एजुकेशन, मनोरंजन, बिजनेस अपडेट, धर्म, क्रिकेट, राशिफल की ताजा खबरें पढ़ें यहां. रोजाना की ब्रेकिंग हिंदी न्यूज और लाइव न्यूज कवरेज के लिए डाउनलोड करिए

Download from Google PlayDownload from App Store
विज्ञापन
Sponsored Linksby Taboola