धनबाद में बच्चों का टीकाकरण 97%, गर्भवती महिलाओं के टीटी बूस्टर का कवरेज सिर्फ 13%
AI Image
धनबाद में बच्चों के नियमित टीकाकरण में 97% का सराहनीय कवरेज है, लेकिन गर्भवती महिलाओं के टीटी बूस्टर टीकाकरण में केवल 13% की दर चिंता का विषय है। स्वास्थ्य विभाग ने इस बड़े गैप के कारणों का खुलासा किया है और इसे सुधारने के लिए नई रणनीतियों पर जोर दिया है।
धनबाद में बच्चों के नियमित टीकाकरण की तस्वीर काफी बेहतर है, लेकिन गर्भवती महिलाओं के टीकाकरण में बड़ा गैप सामने आया है. स्वास्थ्य विभाग की समीक्षा रिपोर्ट के अनुसार जिले में बच्चों का पूर्ण टीकाकरण कवरेज 97 प्रतिशत है, जबकि गर्भवती महिलाओं को लगने वाले टीटी बूस्टर का कवरेज महज 13 प्रतिशत दर्ज किया गया है. यानी बच्चों के टीकाकरण की तुलना में मातृ टीकाकरण का यह आंकड़ा स्वास्थ्य विभाग के लिए चिंता का विषय बना हुआ है.
आपके शहर में
रांची में मुख्यमंत्री की अध्यक्षता में हुई समीक्षा बैठक में स्वास्थ्य विभाग की ओर से पेश आंकड़ों में यह स्थिति सामने आयी. धनबाद बच्चों के पूर्ण टीकाकरण में राज्य के 94 प्रतिशत औसत से तीन प्रतिशत आगे है. हालांकि, गर्भवती महिलाओं के टीटी बूस्टर में जिले की उपलब्धि काफी कम है.
बच्चों के इन टीकों में 94 से 98% तक कवरेज
धनबाद में बीसीजी का कवरेज 98 प्रतिशत है. पीसीवी-1 का 95 प्रतिशत, पीसीवी-2 का 94 प्रतिशत और पीसीवी-3 का 97 प्रतिशत कवरेज दर्ज किया गया है. एमआर और खसरा का कवरेज 97-97 प्रतिशत है. जेइ टीकाकरण में भी जिले की उपलब्धि 97 प्रतिशत है.
पूर्ण टीकाकरण के मामले में दुमका और रांची 101 प्रतिशत, लातेहार 99 प्रतिशत और हजारीबाग 98 प्रतिशत के साथ धनबाद से आगे हैं. राज्य का औसत 94 प्रतिशत है.
टीटी-1 79%, टीटी-2 72%, बूस्टर सिर्फ 13%
गर्भवती महिलाओं के टीकाकरण में आंकड़ा लगातार कम होता दिख रहा है. धनबाद में टीटी-1 का कवरेज 79 प्रतिशत और टीटी-2 का 72 प्रतिशत है. वहीं टीटी बूस्टर की उपलब्धि सिर्फ 13 प्रतिशत रह गयी है.
स्वास्थ्य विभाग के अनुसार समय पर गर्भवती महिलाओं का पंजीकरण नहीं होना, एएनसी जांच के बाद नियमित फॉलोअप नहीं हो पाना, प्रवासी परिवारों तक स्वास्थ्य टीम की पहुंच में परेशानी और टीकाकरण को लेकर जागरूकता की कमी इसके प्रमुख कारण हैं.
दूसरी-तीसरी जांच के बाद संपर्क में नहीं रहतीं कई महिलाएं
जिला टीकाकरण पदाधिकारी डॉ रोहित गौतम ने बताया कि बच्चों के लिए सत्र आधारित नियमित टीकाकरण व्यवस्था लंबे समय से चल रही है. इससे बच्चों का कवरेज बेहतर है. गर्भवती महिलाओं के मामले में एएनसी के साथ लगातार फॉलोअप जरूरी होता है.
उन्होंने बताया कि कई बार महिलाएं दूसरी या तीसरी जांच के बाद स्वास्थ्य विभाग के संपर्क में नहीं रहती हैं. ऐसे में आगे की डोज और टीटी बूस्टर छूट जाता है. प्रवासी आबादी के कारण भी स्वास्थ्य कर्मियों के सामने लाभार्थियों तक पहुंचने की चुनौती रहती है.
100% से अधिक कवरेज वाले आंकड़ों की भी होगी जांच
समीक्षा में कुछ जिलों में 100 प्रतिशत से अधिक टीकाकरण कवरेज के आंकड़े भी सामने आये हैं. बीसीजी में कोडरमा और पाकुड़ का कवरेज 115 प्रतिशत तक दर्ज किया गया है. वहीं पूर्ण टीकाकरण में दुमका और रांची 101 प्रतिशत पर हैं.
स्वास्थ्य विभाग के अनुसार ऐसे आंकड़ों का लक्ष्य आबादी और डेटा रिपोर्टिंग के स्तर पर सत्यापन जरूरी है, ताकि वास्तविक स्थिति का आकलन किया जा सके.
100% टीकाकरण के लिए अब छूटे लाभार्थियों पर फोकस
स्वास्थ्य विभाग अब छूटे हुए लाभार्थियों की पहचान कर टीकाकरण कवरेज बढ़ाने की तैयारी में है. गर्भवती महिलाओं के मातृ टीकाकरण पर भी विशेष फोकस किया जायेगा.
इसके तहत डिजिटल ट्रैकिंग, घर-घर फॉलोअप और आशा-एएनएम के माध्यम से नियमित निगरानी पर जोर दिया जायेगा. पंचायत स्तर पर जागरूकता अभियान चलाने के साथ प्रवासी परिवारों की पहचान कर उन्हें स्वास्थ्य सेवाओं से जोड़ने की योजना है.
शहरी स्लम और ऐसे ग्रामीण क्षेत्रों में मोबाइल टीकाकरण टीम की पहुंच बढ़ाने पर भी जोर दिया जायेगा, जहां नियमित स्वास्थ्य सेवाओं तक पहुंच कम है. ब्लॉक स्तर पर मासिक समीक्षा और डेटा ऑडिट को मजबूत करने की भी तैयारी है.
धनबाद में टीकाकरण की स्थिति
- पूर्ण टीकाकरण: 97%
- बीसीजी: 98%
- पीसीवी-1: 95%
- पीसीवी-2: 94%
- पीसीवी-3: 97%
- एमआर: 97%
- खसरा: 97%
- जेइ: 97%
- टीटी-1: 79%
- टीटी-2: 72%
- टीटी बूस्टर: 13%
जिला टीकाकरण पदाधिकारी डॉ रोहित गौतम से सवाल-जवाब
टीटी बूस्टर का कवरेज सिर्फ 13 प्रतिशत क्यों है?
कई गर्भवती महिलाएं समय पर स्वास्थ्य केंद्र नहीं पहुंच पाती हैं. प्रवासी आबादी, जागरूकता की कमी और फॉलोअप में अंतर इसके प्रमुख कारण हैं. छूटे लाभार्थियों की पहचान की जा रही है.
बच्चों के मुकाबले गर्भवती महिलाओं के टीकाकरण में इतना अंतर क्यों है?
बच्चों के लिए सत्र आधारित नियमित टीकाकरण व्यवस्था है. गर्भवती महिलाओं के मामले में एएनसी के साथ लगातार फॉलोअप जरूरी है. कई बार लाभार्थी दूसरी या तीसरी जांच के बाद संपर्क में नहीं रहती हैं.
आगे की रणनीति क्या होगी?
100 प्रतिशत पूर्ण टीकाकरण के साथ मातृ टीकाकरण पर विशेष ध्यान दिया जायेगा. छूटे लाभार्थियों की पहचान, घर-घर फॉलोअप और आशा-एएनएम के माध्यम से नियमित निगरानी की जायेगी. ब्लॉक स्तर पर भी इसकी समीक्षा होगी.
प्रभात खबर डिजिटल टॉप स्टोरी
Prabhat Khabar App :
देश, एजुकेशन, मनोरंजन, बिजनेस अपडेट, धर्म, क्रिकेट, राशिफल की ताजा खबरें पढ़ें यहां. रोजाना की ब्रेकिंग हिंदी न्यूज और लाइव न्यूज कवरेज के लिए डाउनलोड करिए