जय गुरु’ से गूंजा देवघर, ठाकुर अनुकूलचंद्र के 81वें शुभागमन पर उमड़ा आस्था का सैलाब

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शोभायात्रा में शामिल लोग.

देवघर में श्रीश्री ठाकुर अनुकूलचंद्र का 81वां शुभागमन दिवस धूमधाम से मनाया गया। शोभायात्रा में शामिल हुए हजारों श्रद्धालु, देखें पूरी खबर।

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संवाददाता, देवघर . देवघर बुधवार को श्रद्धा, भक्ति और आध्यात्मिक उल्लास में डूबा नजर आया . अवसर था श्रीश्री ठाकुर अनुकूलचंद्र के 81वें शुभागमन दिवस का . इस अवसर पर सत्संग आश्रम सहित शहर के विभिन्न हिस्सों को आकर्षक ढंग से सजाया गया . सुबह से ही सत्संग आश्रम में देश के अलग-अलग हिस्सों से पहुंचे श्रद्धालुओं और अनुयायियों की भीड़ जुटने लगी . बिहार, झारखंड, बंगाल, ओडिशा समेत कई राज्यों से बड़ी संख्या में भक्त देवघर पहुंचे और दिनभर धार्मिक एवं आध्यात्मिक कार्यक्रमों में शामिल हुए .

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आश्रम परिसर में भजन-कीर्तन और धार्मिक अनुष्ठानों के बीच वातावरण भक्तिमय बना रहा . जगह-जगह श्रद्धालु भक्ति में लीन नजर आये . शुभागमन दिवस के आयोजन को लेकर अनुयायियों में खासा उत्साह देखने को मिला .

भव्य शोभायात्रा में उमड़ी आस्था, जय गुरु के उद्घोष से गूंजा स्टेशन

शुभागमन दिवस का मुख्य आकर्षण बुधवार सुबह निकली भव्य शोभायात्रा रही . सुबह करीब 7.30 बजे सत्संग आश्रम से श्रीश्री ठाकुर अनुकूलचंद्र की प्रतिमा को सुसज्जित वाहन पर विराजमान कर शोभायात्रा शुरू हुई . आश्रम के प्रमुख बबाय दा के नेतृत्व में निकली शोभायात्रा शंख मोड़ और सुभाष चौक होते हुए बैद्यनाथधाम रेलवे स्टेशन पहुंची .

स्टेशन परिसर में आश्रम प्रमुख ने श्रीश्री ठाकुर अनुकूलचंद्र की प्रतिमा का अनावरण किया . इसके बाद दोनों प्रतिमाओं की माला का आदान-प्रदान किया गया . इस दौरान स्टेशन परिसर ‘जय गुरु’ के उद्घोष से गूंज उठा . श्रद्धालुओं के बीच इस क्षण को लेकर विशेष उत्साह देखने को मिला .

इसके बाद शोभायात्रा टावर चौक होते हुए वापस सत्संग आश्रम पहुंची, जहां इसका विधिवत समापन किया गया . शोभायात्रा में बंगाल, बिहार, ओडिशा समेत विभिन्न राज्यों से आयी बैंड पार्टियां, नृत्य मंडलियां और कीर्तन मंडलियां शामिल थीं . इनके भक्ति गीतों और प्रस्तुतियों ने पूरे मार्ग को भक्तिमय बना दिया .

2 सितंबर 1946 को देवघर पहुंचे थे ठाकुर अनुकूलचंद्र

श्रीश्री ठाकुर अनुकूलचंद्र के अनुयायियों के लिए दो सितंबर का दिन विशेष महत्व रखता है . इसी दिन वर्ष 1946 में ठाकुर अनुकूलचंद्र देवघर आये थे . उनके देवघर आगमन की स्मृति में हर वर्ष इस दिन को शुभागमन दिवस के रूप में मनाया जाता है .

बताया जाता है कि श्रीश्री ठाकुर अनुकूलचंद्र का जन्म तत्कालीन अविभाजित भारत के पूर्वी बंगाल के पाबना गांव में हुआ था, जो वर्तमान में बांग्लादेश में है . देश विभाजन और पूर्वी बंगाल की बदलती परिस्थितियों के बीच वे देवघर आये और यहां सत्संग आश्रम की स्थापना की .

देवघर आने के बाद उन्होंने सत्संग के माध्यम से लोगों को सदाचार, मानव सेवा, परिवार और समाज के प्रति जिम्मेदारी निभाने का संदेश दिया . धीरे-धीरे उनके अनुयायियों की संख्या बढ़ती गयी और सत्संग आश्रम आध्यात्मिक गतिविधियों के प्रमुख केंद्र के रूप में विकसित होता गया .

धार्मिक केंद्र के साथ शिक्षा और समाजसेवा का भी केंद्र बना आश्रम

आज सत्संग आश्रम केवल धार्मिक और आध्यात्मिक गतिविधियों तक सीमित नहीं है . आश्रम से शिक्षा, स्वास्थ्य और समाजसेवा से जुड़ी गतिविधियां भी संचालित होती हैं . ठाकुर अनुकूलचंद्र के विचारों में मानव सेवा, चरित्र निर्माण, सदाचार, परिवार और सामाजिक दायित्व को विशेष महत्व दिया गया .

उनके अनुयायी आज भी इन आदर्शों को अपने जीवन में उतारने का प्रयास करते हैं . शुभागमन दिवस पर आयोजित कार्यक्रमों के माध्यम से भी मानव सेवा, सामाजिक समरसता और आध्यात्मिक जीवन का संदेश दिया गया .

आश्रम से जुड़े लोगों का कहना है कि बदलते समय के बावजूद ठाकुर अनुकूलचंद्र के विचार आज भी समाज के लिए प्रासंगिक हैं और लोगों को बेहतर जीवन जीने की प्रेरणा देते हैं .

आनंद बाजार में महाप्रसाद, श्रद्धालुओं के लिए विशेष इंतजाम

शुभागमन दिवस को लेकर सत्संग आश्रम में व्यापक तैयारियां की गयी थीं . दूर-दराज से आने वाले अनुयायियों के ठहरने और उनकी अन्य आवश्यकताओं को ध्यान में रखते हुए विशेष व्यवस्था की गयी . दोपहर और शाम के समय आनंद बाजार में श्रद्धालुओं के लिए महाप्रसाद की व्यवस्था की गयी .

आश्रम परिसर और शोभायात्रा के पूरे मार्ग को आकर्षक ढंग से सजाया गया था . कई श्रद्धालु समूह बनाकर देवघर पहुंचे . इससे पूरे आश्रम परिसर में दिनभर उत्सव और आध्यात्मिकता का माहौल बना रहा .

सुरक्षा और यातायात को लेकर भी रही विशेष तैयारी

शोभायात्रा में बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं के शामिल होने को देखते हुए आयोजकों और प्रशासन की ओर से सुरक्षा व यातायात व्यवस्था को लेकर विशेष तैयारी की गयी थी . शोभायात्रा के निर्धारित मार्ग पर आवश्यक इंतजाम किये गये थे .

रेलवे स्टेशन और शहर के प्रमुख चौक-चौराहों पर भी श्रद्धालुओं की संभावित भीड़ को देखते हुए व्यवस्था पर विशेष ध्यान दिया गया . आयोजन को शांतिपूर्ण और व्यवस्थित तरीके से संपन्न कराने के लिए अनुयायियों से निर्धारित मार्ग और व्यवस्था का पालन करने की अपील की गयी .

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देर शाम तक आश्रम में बनी रही चहल-पहल

शुभागमन दिवस पर देवघर पहुंचे अनुयायियों में खासा उत्साह देखने को मिला . बंगाल, बिहार, झारखंड और ओडिशा के अलावा देश के अन्य हिस्सों से भी श्रद्धालु पहुंचे . कई समूह भजन-कीर्तन करते हुए आश्रम पहुंचे, जिससे पूरे परिसर में आध्यात्मिक वातावरण बना रहा .

शोभायात्रा में शामिल लोग.
शोभायात्रा में शामिल लोग.


सुबह की भव्य शोभायात्रा के बाद दिनभर धार्मिक अनुष्ठान, प्रार्थना, कीर्तन और अन्य कार्यक्रम चलते रहे . देर शाम तक सत्संग आश्रम में श्रद्धालुओं की चहल-पहल बनी रही . ठाकुर अनुकूलचंद्र के देवघर आगमन के 81 वर्ष पूरे होने के अवसर पर आयोजित इस महापर्व ने बुधवार को पूरे देवघर को भक्ति, आध्यात्मिकता और उत्सव के रंग में रंग दिया .

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