चार की क्षमता, 12 की सवारी: सारठ में स्कूल ऑटो बने ‘मौत की सवारी’

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टोटो से स्कूल जाते बच्चे| Prabhat Khabar Network

सारठ में निजी स्कूल के ऑटो, टोटो क्षमता से 7 गुना अधिक बच्चों को ढो रहे. अभिभावक चिंतित, प्रशासन से कार्रवाई की मांग. कहीं हो न जाए अनहोनी.

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सारठ. सारठ प्रखंड क्षेत्र में स्कूली बच्चों की सुरक्षा को लेकर जिम्मेदारों की लापरवाही का गंभीर मामला सामने आ रहा है. प्रखंड क्षेत्र के कई निजी विद्यालयों में बच्चों को ऑटो, टोटो और ई-रिक्शा से स्कूल लाने-ले जाने के दौरान क्षमता से कई गुना अधिक बच्चों को बैठाया जा रहा है. एक ऑटो में 10 से 12 तक बच्चों को ठूंस-ठूंसकर बैठाने का नजारा आम हो गया है. ऐसे में स्कूली बच्चों की जिंदगी हर दिन जोखिम में है और किसी भी वक्त बड़ा हादसा हो सकता है.

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छोटे-छोटे बच्चों को एक-दूसरे के ऊपर बैठाकर सफर

स्कूली बच्चों को ले जाने वाले कई ऑटो और टोटो में सुरक्षा के मानकों की खुलेआम अनदेखी होती दिखाई दे रही है. छोटे-छोटे बच्चों को सीट की कमी के कारण एक-दूसरे के ऊपर बैठाकर ले जाया जाता है. कई बच्चे वाहन के बाहर पैर लटकाकर तो कुछ शरीर का हिस्सा बाहर निकालकर सफर करने को मजबूर हैं. वाहनों में न तो पर्याप्त बैठने की व्यवस्था है और न ही बच्चों की सुरक्षा के लिए जरूरी ग्रिल आदि दिखाई देती है.

चार की क्षमता, एक ऑटो में एक दर्जन बच्चे

परिवहन नियमों के मुताबिक सामान्य ऑटो और ई-रिक्शा में निर्धारित क्षमता से अधिक सवारी बैठाना सुरक्षित और नियमसंगत नहीं है. इसके बावजूद सारठ के कई निजी विद्यालयों में बच्चों को ऑटो-टोटो के जरिए क्षमता से कई गुना अधिक संख्या में ढोया जा रहा है. सवाल यह है कि यदि रास्ते में अचानक ब्रेक लगे, वाहन अनियंत्रित हो जाए या कोई दुर्घटना हो जाए तो इतने बच्चों की सुरक्षा की जिम्मेदारी कौन लेगा?

स्कूली वाहनों के सुरक्षा मानकों की भी अनदेखी

स्कूली बच्चों के परिवहन को लेकर निर्धारित सुरक्षा मानकों में वाहन की फिटनेस और बच्चों की सुरक्षा पर विशेष जोर दिया जाता है. स्कूली परिवहन व्यवस्था में वाहन की पहचान, अग्निशमन यंत्र, गति नियंत्रण, जीपीएस सहित अन्य सुरक्षा उपायों का प्रावधान है. लेकिन क्षेत्र में बच्चों को ले जाने वाले कई ऑटो और टोटो में इन मानकों की स्थिति पर गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं.

विद्यालय संचालक रखते हैं ऑटो-टोटो, अभिभावकों से लेते हैं शुल्क

अभिभावकों का कहना है कि बच्चों को घर से स्कूल लाने और स्कूल से घर पहुंचाने की जिम्मेदारी कई निजी विद्यालयों की ओर से ही तय की जाती है. इसके लिए अभिभावकों से अलग से शुल्क भी लिया जाता है. बताया जाता है कि विद्यालय संचालकों की ओर से ऑटो-टोटो चालकों को बच्चों के परिवहन के लिए लगाया जाता है. अधिक कमाई के लालच में चालक निर्धारित क्षमता से कहीं अधिक बच्चों को एक ही वाहन में बैठा लेते हैं.

कार्रवाई नहीं हुई तो हो सकता है बड़ा हादसा

सबसे बड़ा सवाल स्थानीय प्रशासन और परिवहन विभाग की निगरानी व्यवस्था पर उठ रहा है. विद्यालयों के आसपास और बच्चों के आवागमन के समय यदि नियमित जांच की जाए तो इस तरह की ओवरलोडिंग पर आसानी से अंकुश लगाया जा सकता है. बावजूद इसके स्थिति जस की तस बनी हुई है. अभिभावकों का कहना है कि किसी बड़ी दुर्घटना के बाद कार्रवाई करने के बजाय समय रहते व्यवस्था दुरुस्त करना जरूरी है.

निजी विधालयो के संचालकों द्वारा बच्चे को जोखिम से होकर विधालय पहुचा रहे है | Prabhat Khabar Network
चार की क्षमता: 12 की सवारी | Prabhat Khabar Network

अभिभावकों में चिंता, प्रशासन से कार्रवाई की मांग

स्कूली बच्चों की सुरक्षा को लेकर अभिभावकों में भी चिंता बढ़ रही है. उनका कहना है कि बच्चों को सुरक्षित स्कूल पहुंचाना विद्यालय प्रबंधन और प्रशासन की प्राथमिक जिम्मेदारी होनी चाहिए. क्षमता से अधिक बच्चों को ऑटो-टोटो में बैठाकर सड़क पर भेजना किसी भी स्थिति में उचित नहीं है. अभिभावकों ने प्रशासन, परिवहन विभाग और पुलिस से ऐसे वाहनों की नियमित जांच कराने, ओवरलोडिंग पर कार्रवाई करने और विद्यालयों में बच्चों के सुरक्षित परिवहन की व्यवस्था सुनिश्चित कराने की मांग की है.

यदि समय रहते इस पर गंभीरता से कार्रवाई नहीं की गई तो स्कूली बच्चों को ढो रहे ये ओवरलोडेड ऑटो-टोटो किसी दिन एक बड़े हादसे का कारण बन सकते हैं.


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