वैज्ञानिक बनने का सपना, सरकारी सिस्टम में अटका:डेडलाइन सिर पर, झारखंड में सिर्फ 5,661 नामांकन
सांकेतिक तस्वीर.
झारखंड में इंस्पायर अवार्ड नामांकन की धीमी गति चिंता का विषय बनी हुई है. वैज्ञानिक प्रतिभा को बढ़ावा देने वाली इस योजना में सरकारी सिस्टम की रफ्तार बच्चों के आइडिया के साथ कदमताल नहीं मिला पा रही है. 15 सितंबर अंतिम तिथि के करीब आने के बावजूद, राज्य में केवल 5,661 विद्यार्थियों का नामांकन हुआ है, जो योजना की प्रभावशीलता पर सवाल खड़े करता है.
संजीत मंडल, देवघर. जिन बच्चों के आइडिया देश की वैज्ञानिक दिशा बदल सकते हैं, उन्हीं तक सरकारी सिस्टम की रफ्तार नहीं पहुंच पा रही है. इंस्पायर अवार्ड मानक 2026-27 में झारखंड का प्रदर्शन चिंता बढ़ाने वाला है. अगस्त के अंत तक राज्य से सिर्फ 5,661 विद्यार्थियों का नामांकन हो सका है. जबकि नामांकन की अंतिम तिथि 15 सितंबर निर्धारित है. समय तेजी से बीत रहा है और अब आखिरी दिनों में पूरी सरकारी मशीनरी को अभियान में झोंकने की नौबत आ गयी है. राज्य नोडल पदाधिकारी ने नामांकन की धीमी प्रगति को बेहद निराशाजनक माना है और जिला शिक्षा पदाधिकारियों व जिला शिक्षा अधीक्षकों की भूमिका पर नाराजगी जतायी है.
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निर्देशों के बाद भी जिलों में नहीं दिखा असर
नामांकन में तेजी लाने के लिए राज्य नोडल कार्यालय की ओर से जिलों को लगातार पत्र और व्हाट्सएप के माध्यम से निर्देश भेजे गये. इसके बावजूद नामांकन की रफ्तार में अपेक्षित तेजी नहीं आयी. समीक्षा के दौरान नोडल पदाधिकारी ने स्पष्ट टिप्पणी की कि योजना को लेकर जिला स्तर पर अपेक्षित रुचि नहीं ली जा रही है. ऐसे में सवाल उठ रहा है कि राज्य स्तर से लगातार निर्देश और मॉनिटरिंग के बावजूद इसका असर स्कूलों तक क्यों नहीं पहुंच रहा है.
ऑपरेटर तय करने में भी सुस्ती
नामांकन अभियान को गति देने के लिए जिला शिक्षा परियोजना कार्यालयों को कंप्यूटर ऑपरेटर नामित करने का निर्देश दिया गया था. लेकिन संबंधित ऑपरेटर का नाम और मोबाइल नंबर तक राज्य नोडल कोषांग को उपलब्ध नहीं कराया गया. हर दिन शाम छह बजे तक नामांकन की प्रगति रिपोर्ट भेजने की व्यवस्था भी प्रभावी तरीके से लागू नहीं हो सकी है. इससे अभियान की निगरानी व्यवस्था पर भी सवाल खड़े हो रहे हैं.
केंद्र की मॉनिटरिंग में भी खुली लापरवाही
भारत सरकार स्तर से योजना की लगातार मॉनिटरिंग की जा रही है. इस दौरान यह बात सामने आयी कि जिला स्तर पर दिये गये सुझावों और निर्देशों पर अपेक्षित कार्रवाई नहीं हो रही है. राज्य नोडल कार्यालय के अनुसार योजना का काम लगभग सहायक जिला नोडल पदाधिकारी के भरोसे छोड़ दिया गया है. इससे पूरी नोडल व्यवस्था की सक्रियता पर सवाल खड़े हो गये हैं.
कम नामांकन के साथ आइडिया की गुणवत्ता भी चिंता
मामला सिर्फ 5,661 विद्यार्थियों के नामांकन तक सीमित नहीं है. इंस्पायर अवार्ड मानक का उद्देश्य स्कूली बच्चों के वैज्ञानिक और नवाचारी विचारों को सामने लाना है. ऐसे में नामांकन की संख्या के साथ आइडिया की गुणवत्ता भी महत्वपूर्ण है. उच्चस्तरीय बैठकों में क्वालिटी और क्वांटिटी दोनों पर जोर दिया गया था. लेकिन पोर्टल की समीक्षा में झारखंड दोनों ही मोर्चों पर कमजोर पाया गया है. कम नामांकन के साथ बच्चों से मिलने वाले वैज्ञानिक विचारों की गुणवत्ता भी चिंता का विषय बनी हुई है.
स्कूलवार रिपोर्ट से खुलेगी जिलों की असली तस्वीर
राज्य नोडल कार्यालय ने बीइओ और क्षेत्र शिक्षा पदाधिकारियों से विहित प्रपत्र में स्कूलवार आंकड़े मांगे हैं. इसमें UDISE कोड वाले कुल स्कूलों की संख्या, नामांकन कर चुके स्कूलों की संख्या और अभी नामांकन से शेष स्कूलों की संख्या देनी होगी. इन आंकड़ों के सामने आने के बाद जिलों में इंस्पायर अवार्ड की वास्तविक कवरेज की तस्वीर साफ हो सकेगी.
15 सितंबर तक लक्ष्य पूरा करना बड़ी चुनौती
नामांकन की अंतिम तिथि में अब ज्यादा समय नहीं बचा है. ऐसे में जिलों के सामने सबसे बड़ी चुनौती उन स्कूलों और विद्यार्थियों तक पहुंचने की है, जहां अब तक नामांकन नहीं हो सका है. आखिरी दिनों में अभियान तेज करने की कोशिश कितनी कारगर होगी, यह आने वाले दिनों में स्पष्ट होगा. इंस्पायर अवार्ड में हर बच्चे का वैज्ञानिक विचार संभावनाओं का नया रास्ता खोल सकता है. ऐसे में कम नामांकन केवल एक आंकड़ा नहीं, बल्कि प्रतिभाशाली बच्चों तक सरकारी तंत्र की पहुंच पर भी बड़ा सवाल है.
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