जेल में बंदियों के हाथों तैयार बाबा का पुष्प मुकुट, सावन पूर्णिमा पर बैद्यनाथ-बासुकिनाथ को अर्पित
दो पुष्म मुकूट | Prabhat Khabar Network
सावन पूर्णिमा पर देवघर जेल के बंदियों द्वारा तैयार पुष्प मुकुट बाबा बैद्यनाथ और बासुकिनाथ को अर्पित किए गए. 1911 से चली आ रही है यह अनूठी परंपरा.
1911 से जारी परंपरा आज भी कायम, देवघर जेल के बंदियों ने सजाया बाबा का मुकुट
आशीष कुंदन, देवघर। सावन पूर्णिमा के अवसर पर देवघर मंडल कारा में बंदियों द्वारा तैयार किये गये दो पुष्प मुकुट बाबा बैद्यनाथ और बाबा बासुकिनाथ को अर्पित किये गये. जेल में तैयार दोनों पुष्प मुकुट को मंदिर भेजने से पहले सुरक्षित रखा गया. इनमें से एक मुकुट बाबा बासुकिनाथ की शृंगार पूजा के लिए सुरक्षा के साथ एक कर्मी व चालक के साथ भेजा गया. वहीं, जेलर प्रमोद कुमार व अन्य कर्मी बाबा बैद्यनाथ के दरबार में पुष्प मुकुट लेकर पहुंचे.
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वर्ष 1911 से चली आ रही परंपरा
जेलर प्रमोद कुमार ने बताया कि बाबा को पुष्प मुकुट अर्पित करने की परंपरा अंग्रेज जेलर के समय से वर्ष 1911 से चली आ रही है. इसके तहत हर दिन बंदियों द्वारा बाबा को मुकुट अर्पित किया जाता है, जबकि शिवरात्रि के अवसर पर मोउर चढ़ाया जाता है.
सावन पूर्णिमा के अवसर पर दो पुष्प मुकुट तैयार कर बाबा बैद्यनाथ और बाबा बासुकिनाथ को अर्पित किये जाते हैं. एक मुकुट तैयार करने में करीब पांच किलो फूल का इस्तेमाल होता है.

तीन दिनों तक भक्तिमय रहा जेल परिसर
देवघर जेल में 27 अगस्त से बाबा कक्ष में संकीर्तन शुरू हुआ, जो सुबह समाप्त हुआ. इसके बाद सुबह 10 बजे से जेल के बाबा शृंगार मंदिर में संकीर्तन शुरू हुआ, जो 29 अगस्त की सुबह 11 बजे तक चलेगा. इस दौरान जेल परिसर में प्रसाद का वितरण भी किया गया.
कार्यक्रम में पीडीजे कौशल किशोर झा समेत कई न्यायिक पदाधिकारी, प्रशासनिक आला अधिकारी, शहर के समाजसेवी व अन्य लोग शामिल हुए. कार्यक्रम को सफल बनाने में प्रभारी जेल अधीक्षक हीरा कुमार, रविंद्र महथा, रोशन कुमार, मिथिलेश कुमार, पवन रुण्डा, भूदेव राय, शंभू चौधरी, धीरेंद्र ठाकुर, दयानंद राय सहित अन्य की भूमिका सराहनीय रही.
बंदियों में सकारात्मक सोच विकसित करने का प्रयास
तीन दिनों से देवघर जेल परिसर भक्तिमय वातावरण में डूबा हुआ है. जेलर प्रमोद कुमार ने कहा कि सावन पूर्णिमा के अवसर पर हर वर्ष लगातार तीन दिनों तक यह कार्यक्रम होता है. पदाधिकारी, जेलकर्मी और कारा के सभी बंदी कार्यक्रम को सफल बनाने में जुटे रहते हैं.
उन्होंने कहा कि इससे कारा के बंदियों में सकारात्मक सोच विकसित होती है. वहीं बंदी गलत रास्ते को छोड़कर अच्छे कर्म करने का संकल्प लेते हैं.
ऐसी अनूठी परंपरा विश्व के किसी जेल में नहीं
जेलर प्रमोद कुमार ने कहा कि ऐसी अनूठी परंपरा विश्व के किसी जेल में नहीं है, जहां तीन दिनों तक जेल परिसर में इस तरह का भक्तिमय कार्यक्रम आयोजित होता हो.
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