6 रुपये लगाओ, 10 हजार पाओ... चाईबासा में कैसे चल रहा लॉटरी का काला कारोबार, जानें पूरा खेल
सांकेतिक तस्वीर
झारखंड के चाईबासा और आसपास के इलाकों में अवैध लॉटरी का कारोबार तेजी से फैल रहा है. कम पैसे में अमीर बनने के लालच में गरीब और मजदूर वर्ग अपनी मेहनत की कमाई गंवा रहे हैं, जिससे कई परिवार आर्थिक संकट में आ गए हैं.
चाईबासा: झारखंड के चाईबासा, चक्रधरपुर और सरायकेला समेत आसपास के इलाकों में अवैध लॉटरी का काला कारोबार तेजी से पैर पसार रहा है. प्रतिबंधित होने के बावजूद शहर के प्रमुख बाजारों और मोहल्लों में खुलेआम लॉटरी टिकट बिक रहे हैं. कम समय में अमीर बनने के लालच में गरीब और मजदूर वर्ग के लोग अपनी मेहनत की कमाई इस दलदल में गंवा रहे हैं, जिससे कई परिवार आर्थिक संकट की चपेट में आ चुके हैं.
दिन में तीन बार ड्रॉ और ऑनलाइन च्वाइस नंबर का खेल
इस अवैध कारोबार का दायरा अब कागजी टिकटों से आगे बढ़कर मोबाइल और इंटरनेट तक पहुंच गया है. जानकारी के मुताबिक, लॉटरी का ड्रॉ दिन में तीन बार दोपहर एक बजे, शाम छह बजे और रात आठ बजे कराया जाता है. खरीदार यूट्यूब और इंटरनेट के जरिए ऑनलाइन रिजल्ट देखते हैं. इसके अलावा, चार-पांच डिजिट के टिकटों के साथ-साथ 'ऑनलाइन च्वाइस नंबर' खेलने की भी सुविधा दी जा रही है, जहां कंप्यूटर और मोबाइल के जरिए नंबर चुनकर पैसे लगाए जाते हैं.
6 रुपये का टिकट और 10 हजार का लालच
मात्र छह रुपये में मिलने वाले एक टिकट पर 10 हजार रुपये तक का प्रथम पुरस्कार जीतने का झांसा दिया जाता है. कम कीमत होने के कारण दैनिक कमाने वाले और मजदूर आसानी से इस जाल में फंस जाते हैं. नुकसान होने के बावजूद लोग अपनी गाड़ी कमाई का हिस्सा लगातार इसमें झोंक रहे हैं. स्थानीय लोगों का कहना है कि कई लोग तो घर के जरूरी खर्च के पैसे से भी टिकट खरीद रहे हैं, जिससे उनकी आर्थिक स्थिति बदतर हो गई है.
प्रमुख इलाके और मजबूत नेटवर्क
यह अवैध धंधा चाईबासा के बड़ीबाजार, गुदड़ी, बस स्टैंड चौक, गाड़ीखाना, मंगलाहाट, सिंघाड़ा गली, बिरसा चौक, सदर बाजार, मधुबाजार, जेएमपी चौक, रेलवे स्टेशन और मेरीटोला में बड़े पैमाने पर चल रहा है. इसमें महाजन, डिस्ट्रीब्यूटर, एजेंट, सेलर और हॉकर का एक मजबूत और संगठित नेटवर्क काम करता है, जो पश्चिमी सिंहभूम से लेकर सरायकेला, नोवामुंडी, झींकपानी, कुजू और चालियामा तक फैला हुआ है.
प्रशासन की कार्रवाई और पुलिस का पक्ष
स्थानीय लोगों के अनुसार, पिछले करीब चार वर्षों से यह अवैध खेल जारी है. दो साल पहले मुफस्सिल थाना क्षेत्र में सिकंदर यादव समेत पांच लोगों के खिलाफ मामला दर्ज हुआ था, लेकिन इसके बावजूद नेटवर्क सक्रिय है. इस संबंध में मुफस्सिल थाना प्रभारी बिनोद कुमार ने बताया कि दो वर्ष पूर्व पांच लोगों के खिलाफ कार्रवाई की गई थी.
वहीं, पश्चिमी सिंहभूम के एसपी अमित रेनू ने कहा कि इस मामले में फिलहाल ऐसी कोई आधिकारिक रिपोर्ट सामने नहीं आई है, जानकारी मिलने पर उचित कदम उठाया जाएगा. स्थानीय लोगों ने पुलिस और प्रशासन से इस संगठित नेटवर्क के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग की है.
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