फिजियोथेरेपी से दर्द नियंत्रण के साथ बढ़ सकती है शरीर की कार्यक्षमता, बोकारो के विशेषज्ञ ने दी सलाह

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फिजियोथेरपी विशेषज्ञ डॉ वीरेंद्र कुमार

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बदलती जीवनशैली के कारण कम उम्र में ही मांसपेशियों और जोड़ों में दर्द बढ़ रहा है. ऐसे में फिजियोथेरेपी राहत दिलाने और शारीरिक कार्यक्षमता बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है. जानें विशेषज्ञ की सलाह.

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बोकारो. बदलती जीवनशैली और शारीरिक गतिविधियों में कमी के कारण मांसपेशियों और जोड़ों से जुड़ी समस्याएं कम उम्र में भी देखने को मिल रही हैं. कमर, पीठ, घुटने और शरीर के अन्य हिस्सों में दर्द की शिकायत लेकर मरीज चिकित्सकों के पास पहुंच रहे हैं. ऐसे मामलों में चिकित्सकीय सलाह के अनुसार फिजियोथेरेपी उपचार और पुनर्वास का महत्वपूर्ण हिस्सा हो सकती है. विशेषज्ञों के अनुसार नियमित शारीरिक गतिविधि और उपयुक्त फिजियोथेरेपी से कई मरीजों में दर्द और शारीरिक कार्यक्षमता से जुड़ी समस्याओं को नियंत्रित करने में मदद मिल सकती है.

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वर्ल्ड फिजियोथेरेपी दिवस के अवसर पर मंगलवार को आर्थोपेडिक्स विशेषज्ञ डॉ. वीरेंद्र कुमार ने ‘प्रभात खबर’ से बातचीत में फिजियोथेरेपी की भूमिका पर जानकारी दी. उन्होंने कहा कि इस दिवस का उद्देश्य लोगों को फिजियोथेरेपी के प्रति जागरूक करना और स्वास्थ्य प्रबंधन तथा पुनर्वास में इसकी भूमिका को समझाना है.

गठिया और फ्रोजन शोल्डर में भी उपयोगी

डॉ. वीरेंद्र कुमार के अनुसार फिजियोथेरेपी गठिया, फ्रोजन शोल्डर, कमर दर्द समेत कई मांसपेशीय और जोड़ों से जुड़ी समस्याओं में उपयोगी हो सकती है. इसके अलावा लकवा या स्ट्रोक के बाद शरीर की कार्यक्षमता को बेहतर करने और मरीज को दैनिक गतिविधियों में दोबारा सक्षम बनाने की पुनर्वास प्रक्रिया में भी फिजियोथेरेपी की भूमिका होती है. हालांकि, किस मरीज को किस प्रकार की फिजियोथेरेपी या व्यायाम की जरूरत है, यह उसकी स्थिति के आधार पर विशेषज्ञ तय करते हैं.

आर्थराइटिस में व्यायाम पर जोर

विशेषज्ञ ने बताया कि विभिन्न प्रकार के आर्थराइटिस में दर्द, मांसपेशियों की कमजोरी और जोड़ों के लचीलेपन में कमी जैसी समस्याएं हो सकती हैं. विशेष रूप से ऑस्टियोआर्थराइटिस के मामलों में चिकित्सकीय मूल्यांकन के बाद उपयुक्त व्यायाम और फिजियोथेरेपी तकनीकों को उपचार योजना में शामिल किया जा सकता है. इसका उद्देश्य मरीज की शारीरिक क्षमता बनाए रखने और दैनिक गतिविधियों को आसान बनाने में मदद करना है.

दवाओं के साथ पुनर्वास का भी महत्व

डॉ. वीरेंद्र कुमार ने कहा कि मरीजों को अपनी स्थिति के अनुसार उपचार कराना चाहिए. केवल दवाओं पर निर्भर रहने के बजाय जहां आवश्यक हो, वहां फिजियोथेरेपी और शारीरिक गतिविधियों को उपचार व पुनर्वास की प्रक्रिया में शामिल किया जा सकता है. उन्होंने स्पष्ट किया कि फिजियोथेरेपी का चयन चिकित्सकीय सलाह और मरीज की शारीरिक स्थिति के आधार पर होना चाहिए. बिना विशेषज्ञ की सलाह के दर्द वाले हिस्से में स्वयं से व्यायाम शुरू करना उचित नहीं है.

हृदय रोग और स्ट्रोक पर केंद्रित है 2026 की थीम

वर्ष 2026 के वर्ल्ड फिजियोथेरेपी दिवस की थीम ‘हृदय रोग और स्ट्रोक की रोकथाम, प्रबंधन और पुनर्वास में फिजियोथेरेपी और शारीरिक गतिविधि की भूमिका’ है. इस वर्ष की थीम नियमित शारीरिक गतिविधि, स्वास्थ्य प्रबंधन और हृदय रोग व स्ट्रोक से प्रभावित मरीजों के पुनर्वास में फिजियोथेरेपी की भूमिका पर जागरूकता बढ़ाने पर केंद्रित है. विशेषज्ञों के अनुसार शारीरिक रूप से सक्रिय रहना समग्र स्वास्थ्य के लिए महत्वपूर्ण है, जबकि किसी बीमारी या चोट की स्थिति में गतिविधियों का स्तर और व्यायाम का प्रकार चिकित्सकीय सलाह के अनुरूप तय किया जाना चाहिए.

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