बोकारो के जैविक उद्यान में सफेद बाघिन 'गंगा' की दहाड़ अब नहीं देगी सुनायी, लंबे समय से चल रही थी बीमार

Updated at : 01 Apr 2022 7:47 PM (IST)
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बोकारो के जैविक उद्यान में सफेद बाघिन 'गंगा' की दहाड़ अब नहीं देगी सुनायी, लंबे समय से चल रही थी बीमार

jharkhand news: बोकारो के जवाहर लाल नेहरू जैविक उद्यान की सफेद बाघिन 'गंगा'अपने बाड़े में मृत मिली. सफेद बाघिन गंगा कई दिनों से बीमार चल रही थी. सफेद बाधिक की मौत की खबर सुनकर वनप्रेमी काफी मायूस हो गये. पशु चिकित्सकों के मुताबिक, सफेद बाघिन की मौत हार्ट अटैक से हुई.

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Jharkhand news: बोकारो सहित समूचे कोयलांचल के वन्यजीव प्रेमियों के लिए पहली अप्रैल दुख भरी खबर लेकर आयी. बाेकारो के सेक्टर-4 स्थित जवाहर लाल नेहरू जैविक उद्यान में इकलौती सफेद बाघिन ‘गंगा’ की दहाड़ अब सुनायी नहीं देगी. सफेद बाघिन गंगा शांत हो गयी है. शुक्रवार को सफेद बाघिन गंगा की मौत हो गयी. वह लंबे अर्से से बीमार चल रही थी. शुक्रवार को सफेद बाघिन गंगा अपने बाड़े में मृत पायी गयी.

भिलाई चिड़ियाघर से आयी थी गंगा

BSL के संचार प्रमुख मणिकांत धान ने बताया कि एक अप्रैल को जैविक उद्यान में बाघिन गंगा अपने बाड़े में मृत पायी गयी. जैविक उद्यान प्रबंधन ने तुरंत इसकी सूचना वन विभाग को दी. इसके बाद सरकारी पशु चिकित्सकों द्वारा डीएफओ, बोकारो के प्रतिनिधियों एवं जैविक उद्यान के अधिकारियों की उपस्थिति में मृत बाघिन का पोस्टमार्टम किया गया. बाघिन गंगा को भिलाई के चिड़ियाघर से लाया गया था.

अधिक उम्र की वजह से हार्ट अटैक से हुई गंगा की मौत

सफेद बाघिन गंगा का जन्म 08 अगस्त, 2006 को हुई थी. इसकी उम्र साढ़े पंद्रह वर्ष से अधिक हो गयी. आमतौर पर माना जाता है कि सफेद बाघों की औसत आयु 12 वर्ष की होती है. पोस्टमोर्टम के बाद बाघिन के मृत्यु का कारण उसकी अधिक उम्र की वजह से हार्ट अटैक से होने की जानकारी मिली है. सफेद बाघिन गंगा जैविक उद्यान आने वाले पर्यटकों के लिए आकर्षण का केंद्र थी, खासकर बच्चों की.

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उद्यान में बाघ परिवार में सिर्फ एक गंगा ही जीवित थी

सफेद बाघिन गंगा और सफेद बाघ सतपुड़ा की जोड़ी को मैत्री बाग, भिलाई से 22 जनवरी 2012 को बोकारो के इस जैविक उद्यान लाया गया था. 25 अगस्त, 2012 को अपने पुरुष साथी सतपुड़ा की मृत्यु के बाद बाघ परिवार में सिर्फ एक गंगा ही जीवित थी. वर्ष 2012 में भिलाई से आने के बाद गंगा और सतपुड़ा बोकारो के माहौल और मौसम में तुरंत ढल गये थे. दोनों को बोकारो भा गया था. इसके कुछ दिन बाद ही गंगा ने उद्यान परिवार को ‘खुशखबरी’ सुनायी थी.

सफेद बाघिन गंगा ने तीन शावकों को दिया था जन्म

सफेद बाघिन गंगा ने तीन शावकों को जन्म दिया. लेकिन, दुर्भाग्य से सभी शावक जिंदा नहीं रह पाये. तीनों की मौत जन्म के कुछ दिन बाद ही हो गयी. शावकों की मौत के बाद बाघ सतपुड़ा की भी मृत्यु 2012 में ही हो गयी. तब से गंगा एकाकी जीवन व्यतीत कर रही थी. इस कारण बाघ परिवार में सिर्फ गंगा की ही दहाड़ जैविक उद्यान में सुनायी पड़ती थी. गंगा बूढ़ी हो गयी थी. दांत उम्र के साथ चले गये थे. शुक्रवार को उन्होंने अंतिम सांस लिया.

उद्यान में 15 वर्षों में हो चुकी है 8 बाघों की मौत

सफेद बाघिन गंगा सहित जैविक उद्यान बोकारो में पिछले 15 वर्षों में 8 बाघों की मौत हो चुकी है. इनमें 2 बाघिन, 5 बाघ और तीन शावक शामिल थे. 127 एकड़ में फैले जैविक उद्यान में गंगा एकमात्र बाघिन थी. उद्यान आने वाले लोगों के लिए वर्षों तक रोमांच एवं आकर्षण का केंद्र बनी रही. गंगा के निधन से बीएसएल परिवार सहित पूरा बोकारो मर्माहत है. पशु प्रेमी मायूस हैं.

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चिकित्सा के अभाव व प्रबंधकीय लापरवाही का आरोप

उधर, स्वास्थ्य एवं पर्यावरण संरक्षण संस्थान के महासचिव शशि भूषण ओझा ‘मुकुल’ ने कहा कि जैविक उद्यान पूरी तरह कुव्यवस्था का शिकार है. आज यही कारण है कि यहां की एकमात्र सफेद बाघिन उचित चिकित्सा के अभाव व प्रबंधकीय लापरवाही की शिकार होकर मर गयी. संस्थान बाघिन की मृत्यु से न सिर्फ दुखी है, बल्कि चिड़ियाघर में व्याप्त घोर कुव्यवस्था से चिंतित भी है. बाघिन की मृत्यु व कुव्यवस्था की जांच होनी चाहिए.


रिपोर्ट : सुनील तिवारी, बोकारो.

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