झारखंड के छात्रों के लिए विदेश से पीएचडी करना होगा आसान, जांबिया के लिविंगस्टोन अंतरराष्ट्रीय विश्वविद्यालय के रिसर्च को-ऑर्डिनेटर बने डॉ राकेश

Updated at : 16 Nov 2020 11:32 AM (IST)
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झारखंड के छात्रों के लिए विदेश से पीएचडी करना होगा आसान, जांबिया के लिविंगस्टोन अंतरराष्ट्रीय विश्वविद्यालय के रिसर्च को-ऑर्डिनेटर बने डॉ राकेश

बोकारो (सुनील तिवारी) : सीएमसीई (कॉलेज ऑफ मैनेजमेंट कंप्यूटर एंड इंजीनियरिंग) कॉलेज-चीरा चास, बोकारो के निदेशक डॉ केएसएस राकेश को लिविंगस्टोन अंतरराष्ट्रीय विश्वविद्यालय, जाम्बिया का आउटरीच निदेशक सह शोध समन्वयक नियुक्त किया गया है. 2019 में डॉ राकेश को इस विश्वविद्यालय का आउटरीच डायरेक्टर बनाया गया था. अब अंतरराष्ट्रीय शोध खासकर, पीएचडी बाई रिसर्च प्रोग्राम का समन्वयक का भी प्रभार दिया गया है. इससे झारखंड के छात्रों को अंतरराष्ट्रीय यूनिवर्सिटी से पीएचडी करने में आसानी होगी.

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बोकारो (सुनील तिवारी) : सीएमसीई (कॉलेज ऑफ मैनेजमेंट कंप्यूटर एंड इंजीनियरिंग) कॉलेज-चीरा चास, बोकारो के निदेशक डॉ केएसएस राकेश को लिविंगस्टोन अंतरराष्ट्रीय विश्वविद्यालय, जाम्बिया का आउटरीच निदेशक सह शोध समन्वयक नियुक्त किया गया है. 2019 में डॉ राकेश को इस विश्वविद्यालय का आउटरीच डायरेक्टर बनाया गया था. अब अंतरराष्ट्रीय शोध खासकर, पीएचडी बाई रिसर्च प्रोग्राम का समन्वयक का भी प्रभार दिया गया है. इससे झारखंड के छात्रों को अंतरराष्ट्रीय यूनिवर्सिटी से पीएचडी करने में आसानी होगी.

लिविंगस्टोन अंतरराष्ट्रीय विश्वविद्यालय, जाम्बिया को भारतीय विश्वविद्यालय संघ (एआईयु) की सदस्यता अक्टूबर में मिली है, जिसका पूरा श्रेय डॉ राकेश को जाता है. यह आउटरीच डायरेक्टर के रूप में डॉ. राकेश की प्रमुख उपलब्धि रही है. विश्वविद्यालय के कुलपति डॉ पैट्रिक केलिफुन्गवा ने करोना काल के बावजूद कई भारतीय विश्वविद्यालय व एशियन संस्थानों के साथ एमओयू कर लिविंगस्टोन अंतरराष्ट्रीय विश्वविद्यालय शोध कार्यक्रमों को प्रमुखता से बढ़ाने का पूरा श्रेय डॉ राकेश को दिया है.

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डॉ राकेश ने रविवार को बताया कि ऑफ-कैंपस पोस्टिंग से ज्यादातर समय बोकारो से ही कार्य करेंगे, लेकिन शैक्षणिक यात्रा व प्रवास भी जरूरी होगा. झारखंड के शोधार्थियों के लिए भारत में मान्य अंतरराष्ट्रीय पीएचडी करना आसान होगा. बिना जाम्बिया की यात्रा किये शोध के माध्यम से इस पाठ्यक्रम को पूरा कर सकते हैं.

डॉ राकेश ने बताया कि शीघ्र ही बोकारो व झारखंड के विश्वविद्यालयों के शिक्षकों को ग्लोबल रिसर्च मेंटर नेटवर्क से जोड़ेंगे. यहां के विश्वविद्यालयों से भी एमओयू कर ज्वाइंट-रिसर्च को बढ़ावा देंगे. लिविंगस्टोन विश्वविद्यालय के ज्वाइंट इंडस्ट्रियल रिसर्च कार्यक्रमों के लिए बोकारो व झारखंड के विभिन्न इंडस्ट्री से भी समझौता करने का प्रयास करेंगे. विश्वविद्यालय के शोध समन्वयक के रूप में बोकारो व झारखंड में अंतरराष्ट्रीय शोध कार्यक्रमों को बढ़ावा देना उनकी पहली प्राथमिकता होगी. डॉ. राकेश की उपलब्धि पर बोकारो-चास के शिक्षा जगत के लोगों व बुद्धिजीवियों ने इसे गर्व का क्षण बताया.

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Posted By : Guru Swarup Mishra

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