झारखंड में Home Delivery ब्वॉयज का छलका दर्द, बेरोजगारी में कर रहे काम, जोखिम में जान, नहीं मिलता सम्मान

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Jharkhand News : सर, आपका पार्सल आया है. प्लीज पिकअप कर लें. पीठ पर भारी-भरकम बैग लिये पसीना से तर-बतर 22 से 25 साल का युवा दरवाजे पर खड़ा होता है और घर वाले को सामान मुहैया कराता है. इसके बाद फिर निकल जाता है अगली मंजिल की ओर. दिर भर कहीं फटकार तो कहीं गाली भी मिलती है.

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Jharkhand News : नॉक… सर आपका पार्सल आया है. प्लीज पिकअप कर लें. पीठ पर भारी-भरकम बैग लिये पसीना से तर-बतर 22 से 25 साल का युवा दरवाजे पर खड़ा होता है और घर वाले को सामान मुहैया कराता है. इसके बाद फिर निकल जाता है अगली मंजिल की ओर. पूरे दिन दर्जनों दरवाजों पर दस्तक के बाद उस युवा की दिनचर्या पूरी थकान के साथ विराम लेती है. दिर भर कहीं फटकार तो कहीं गाली भी मिलती है. यह कहानी है डिलीवरी ब्वॉय की. बोकारो जिले में ऐसे दो हजार से अधिक युवा बतौर डिलीवरी ब्वॉय काम करते हैं.

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मुसीबत से सुरक्षा की कोई गारंटी नहीं : डिलीवरी ब्वॉय के सामने सिर्फ वर्तमान होता है. भविष्य के लिए उन्हें ना तो किसी प्रकार की सामाजिक सुरक्षा का लाभ मिलता है और ना ही घटना-दुर्घटना के समय ही कंपनी कोई जवाबदेही लेती है. काम ऐसा बोझिल कि जरा-सी देर होने पर लोगों के कोपभजन बनना पड़ता है. जिला में मुख्यत: तीन तरह के डिलीवरी ब्वॉय काम कर रहे हैं. एक एमेजन, फ्लिपकार्ट जैसे बहूपयोगी सामानों की डिलीवरी देते हैं, दूसरे भोजन की डिलेवरी करते हैं तथा तीसरे विभिन्न मल्टी ब्रांड दुकानों से उत्पाद डिलीवर करते हैं.

लोकल व आउट एरिया पर तय होता है वेतन : तीनों तरह के डिलीवरी ब्वॉय के वेतन का पैमाना लगभग एक जैसा है. सभी को दूरी के हिसाब से भुगतान होता है. बहुपयोगी सामानों के डिलीवरी ब्वॉय को 15 किमी के अंदर पार्सल डिलीवरी पर 11 रु व इससे अधिक की दूरी पर 12 रु प्रति पार्सल दिया जाता है. कंपनियां तेल का खर्च देती है तो इंसेंटिव कम कर देती है. अगर इंसेंटिव देती है तो तेल की कीमत में कटौती की जाती है. यही नहीं, सामान गायब होने पर रिस्क भी डिलीवरी ब्वॉय को ही लेना पड़ता है. फूड डिलीवरी वालों को तीन किमी के लिए 22 रु मिलता है, पर उन्हें अपने मोबाइल एप को 11 घंटा लॉग इन रखना पड़ता है. लॉग आउट होने पर इंसेंटिव व वेतन में कटौती हो जाती है.

विवशता सबकुछ करवाता है सर : इस बाबत बात करने के लिए फूड डिलीवरी ब्वॉय व बहुपयोगी सामानों के डिलीवरी ब्वॉय ने सामने आने से इंकार किया, जो बात बतायी वह बेहद चिंतनीय जरूर थी. डिलीवरी से जुड़े नीरज कुमार की मानें तो इस सेगमेंट में सर्वाधिक खतरा दुर्घटना का है. कई बार एक्सीडेंट होता है को कहीं पुलिस का जुर्माना भी सहना पड़ता है. फूड डिलीवरी से जुड़े गौतम कुमार की मानें तो 2022 में पेट्रोल खर्च 2019 के हिसाब से मिल रहा है. विरोध करने पर कंपनी छोड़ देने को कहा जाता है. डिलीवरी ब्वॉय की मानें तो बेरोजगारी को मात देने के लिए इस रोजगार को चुनने की विवशता है, वर्ना इस काम में भविष्य तो बिल्कुल नहीं.

पिछले साल हुई थी छिनतई की घटना : 2021 में फूड डिलीवरी ब्वॉय से छिनतई की कई घटना हुई थी. शहर के बीचोबीच हुई इस घटना के बाद डिलीवरी ब्वॉय गोलबंद भी हुए थे. युवा नेता कुंज बिहारी पाठक ने इसे लेकर जिला प्रशासन से भी बात की थी. साथ ही पीएफ व इएसआई की सुविधा दिलाने की मांग भी की थी, पर ऐसा कुछ नहीं हुआ. डिलीवरी ब्वॉय सूरज यादव व अनूप कुमार की मानें तो इसी साल बाइक से कुछ सामानों की चोरी हो गयी, हर्जाना भी भरना पड़ा था. जून की घटना ने पूरे माह के बजट को गड़बड़ा दिया था.

रिपोर्ट : सीपी सिंह, बोकारो

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