बोकारो की महिलाओं ने रची आत्मनिर्भरता की मिसाल, सामूहिक खेती से 51.61 लाख का कारोबार

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फोटो खेत में लहलहाती फसल फोटो फसल का निरीक्षण करते कृषक और संस्था के अधिकारी | Prabhat Khabar Network

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बोकारो की ग्रामीण महिलाओं ने सामूहिक खेती और कृषि आधारित व्यवसायों के माध्यम से वित्तीय वर्ष 2025-26 में 51.61 लाख रुपये का कारोबार कर आत्मनिर्भरता का एक नया अध्याय लिखा है. नाबार्ड और प्रदान के सहयोग से यह पहल सफल हुई है.

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Bokaro Success Story: बोकारो जिला स्थित जरीडीह प्रखंड की ग्रामीण महिलाओं ने सामूहिक खेती और कृषि आधारित कारोबार के जरिये आत्मनिर्भरता की दिशा में एक मिसाल पेश की है. महिला किसानों ने खेती को घरेलू जरूरतों तक सीमित रखने के बजाय उसे कारोबार का जरिया बनाने की दिशा में कदम बढ़ाया है. करीब चार वर्ष पहले शुरू हुई जरीडीह तेजस फार्मर्स प्रोड्यूसर कंपनी (एफपीसी) से जुड़ी 723 किसानों ने वित्तीय वर्ष 2025-26 में 51.61 लाख रुपये का कारोबार किया. इस कारोबार से कंपनी ने 3.19 लाख रुपये का सकल लाभ अर्जित किया. एफपीसी से वर्तमान में करीब एक हजार महिला किसान शेयरधारक के रूप में जुड़ी हैं.

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इस पहल की खासियत यह है कि किसानों की भूमिका केवल फसल उत्पादन तक नहीं रह गयी है. बीज की खरीद, कृषि उपज का संग्रहण, पशुधन और गैर-कृषि उत्पादों के कारोबार के माध्यम से किसान अब बाजार से सीधे जुड़ने की कोशिश कर रहे हैं. नाबार्ड के वित्तीय सहयोग और स्वयंसेवी संस्था प्रदान के तकनीकी व प्रत्यक्ष सहयोग से शुरू हुई एफपीसी इस सामूहिक कारोबार को विस्तार देने में जुटी है.

पशुधन और धान कारोबार बने प्रमुख आधार

वित्तीय वर्ष 2025-26 में एफपीसी के कारोबार में कई क्षेत्रों की हिस्सेदारी रही. पशुधन से 9.58 लाख रुपये, धान के बीज से 9.32 लाख, धान खरीद से 8.62 लाख, गैर-कृषि उत्पादों से 8.77 लाख और आलू के बीज से 6.24 लाख रुपये का कारोबार हुआ. अलग-अलग गतिविधियों को एक मंच पर लाने से किसानों के लिए आय के कई रास्ते तैयार करने का प्रयास किया जा रहा है.

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पारंपरिक खेती के साथ नये प्रयोग

एफपीसी अब खेती के नये तौर-तरीकों और अधिक मूल्य देने वाली फसलों पर भी काम कर रही है. 117 किसानों को जोड़कर 20 एकड़ में सुगंधित धान का पायलट प्रोजेक्ट शुरू किया गया है. वहीं 80 मचान के माध्यम से करेले की खेती को बढ़ावा दिया जा रहा है. आम की खेती का दायरा बढ़ाने की योजना भी तैयार की गयी है. इन प्रयोगों का उद्देश्य किसानों को पारंपरिक फसलों के साथ बेहतर बाजार संभावनाओं वाली गतिविधियों से जोड़ना है.

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अगले चरण में 1500 किसान, 85 लाख कारोबार

पिछले वित्तीय वर्ष के प्रदर्शन के बाद एफपीसी ने चालू वित्तीय वर्ष के लिए 85 लाख रुपये के कारोबार का लक्ष्य रखा है. मार्च 2027 तक किसानों की संख्या बढ़ाकर 1500 करने की योजना है. इसके लिए नये किसानों को शेयरधारक के रूप में जोड़ने के साथ कारोबार की गतिविधियों का विस्तार किया जाएगा. एफपीसी की चौथी वार्षिक आमसभा में भी इन्हीं उपलब्धियों और आगामी योजनाओं पर चर्चा हुई है. चिलगड्डा पंचायत भवन में आयोजित आमसभा में 350 से अधिक शेयरधारक किसान शामिल हुए थे. जिला परिषद सदस्य सुनीता टुडू सहित पंचायत प्रतिनिधि भी मौजूद थे. निदेशक मंडल की सदस्य बबीता देवी ने संगठन की अब तक की यात्रा पर प्रकाश डाला, जबकि बबीता देवी और रेशमा देवी ने वित्तीय एवं व्यावसायिक प्रगति का विवरण रखा. बेहतर प्रदर्शन करने वाले किसानों और सदस्यों को सम्मानित कर प्रोत्साहित किया गया है. अध्यक्ष मीना देवी ने किसानों और सहयोगी संस्थाओं के प्रति आभार जताते हुए कहा है कि सामूहिक भागीदारी से किसानों के लिए उत्पादन के साथ कारोबार के अवसर भी तैयार हो रहे हैं.

फोटो खेत में लहलहाती फसल फोटो फसल का निरीक्षण करते कृषक और संस्था के अधिकारी | Prabhat Khabar Network
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