बोकारो सामूहिक दुष्कर्म मामला: साक्ष्यों के अभाव में अदालत ने तीन अभियुक्तों को किया बरी
बोकारो सामूहिक दुष्कर्म मामले में बड़ा फैसला आया है. अदालत ने साक्ष्य के अभाव में तीन नामजद आरोपियों को बरी कर दिया. अभियोजन पक्ष आरोप सिद्ध करने में विफल रहा.
बोकारो. चास मुफस्सिल थाना कांड संख्या 104/2024 से जुड़े सत्रवाद संख्या 266/2024 की अंतिम सुनवाई मंगलवार को जिला एवं सत्र न्यायाधीश चतुर्थ गरिमा मिश्रा की अदालत में हुई. अदालत ने मामले में नामजद तीन आरोपियों गणेश दीगर, मेघनाथ दीगर और उमेश दीगर को दोष सिद्ध नहीं होने पर बरी कर दिया. तीनों आरोपियों की ओर से अधिवक्ता सुबोध कुमार ने अदालत में पक्ष रखा.
अभियोजन के अनुसार, 16 मई 2024 की देर शाम पाठकडीह निवासी गणेश दीगर अपनी पत्नी को घर के पीछे स्थित जंगल की ओर ले गया था. आरोप था कि वहां उसने अपने दो साथियों मेघनाथ दीगर और उमेश दीगर को बुलाया और तीनों ने पीड़िता के साथ सामूहिक दुष्कर्म किया. आरोप यह भी था कि घटना का मोबाइल फोन से वीडियो बनाया गया था.
पीड़िता समेत छह गवाहों के बयान दर्ज
मामले की सुनवाई के दौरान अभियोजन की ओर से पीड़िता समेत कुल छह गवाहों के बयान अदालत में दर्ज कराये गये. गवाहों में चिकित्सक और मामले के अनुसंधानकर्ता भी शामिल थे. अभियोजन की ओर से प्रस्तुत साक्ष्यों और गवाहों के बयान के आधार पर मामले की सुनवाई पूरी हुई.
दोष सिद्ध नहीं होने पर अदालत ने किया बरी
अंतिम सुनवाई के बाद अदालत ने तीनों आरोपियों को दोष सिद्ध नहीं होने पर रिहा करने का आदेश दिया. बचाव पक्ष की ओर से अधिवक्ता सुबोध कुमार ने आरोपियों का पक्ष रखा. अदालत के फैसले के बाद मामले में आरोपित तीनों व्यक्तियों को बरी कर दिया गया.
मामला वर्ष 2024 में दर्ज चास मुफस्सिल थाना कांड से संबंधित था. घटना को लेकर पुलिस ने जांच के बाद आरोपियों के खिलाफ कार्रवाई की थी और मामला सुनवाई के लिए अदालत पहुंचा था. अंतिम निर्णय में अदालत ने उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर आरोपियों को दोषी नहीं पाया.
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