बोकारो से लापता 14 वर्षीय नाबालिग की तलाश अब CBI करेगी, अंतरराज्यीय सुराग और डिजिटल ट्रेल की नए सिरे से होगी पड़ताल
यह फोटो एआई से बनाई गई है
बोकारो से छह साल पहले लापता हुई 14 वर्षीय नाबालिग की तलाश अब केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) करेगी. झारखंड हाईकोर्ट ने मामले की जटिलता को देखते हुए जांच CBI को सौंपने का आदेश दिया है. अंतरराज्यीय सुरागों और डिजिटल ट्रेल की नए सिरे से पड़ताल होगी.
बोकारो से करीब छह वर्ष पहले लापता हुई 14 वर्षीय नाबालिग की तलाश अब केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) करेगी. झारखंड हाईकोर्ट ने मामले की जांच CBI को सौंपने का आदेश दिया है. कोर्ट ने मामले की जटिलता, अंतरराज्यीय सुराग, डिजिटल ट्रेल और उन्नत तकनीकी संसाधनों की जरूरत को देखते हुए केंद्रीय एजेंसी से जांच कराने को जरूरी माना है.
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हाईकोर्ट ने CID के एडीजी को मामले से जुड़े सभी केस रिकॉर्ड तत्काल CBI के रांची स्थित ईस्टर्न जोन के संयुक्त निदेशक को सौंपने का निर्देश दिया है. राज्य सरकार और CID ने भी CBI को जांच के हर स्तर पर बिना शर्त पूरा सहयोग देने की बात कही है.
27 अक्टूबर तक बतानी होगी जांच की प्रगति
मामले की सुनवाई जस्टिस सुजीत नारायण प्रसाद और जस्टिस संजय प्रसाद की खंडपीठ में हुई. कोर्ट ने CBI को 27 अक्टूबर तक हलफनामा दाखिल कर अब तक हुई जांच की प्रगति से अवगत कराने का निर्देश दिया है. साथ ही कोर्ट ने मामले को लेकर मीडिया में इंटरव्यू देकर इसे प्रचारित नहीं करने की भी सलाह दी है.
2020 में घर से लापता हुई थी बच्ची
जानकारी के अनुसार, नाबालिग 16 अक्टूबर 2020 को सुबह करीब 10:45 बजे लापता हुई थी. उसी दिन मामले की प्राथमिकी दर्ज करायी गयी थी. जिला पुलिस की ओर से मामले की जांच की गयी, लेकिन बच्ची का अब तक कोई सुराग नहीं मिल सका.
दिल्ली, तेलंगाना और बंगाल से जुड़े सुराग
राज्य सरकार की ओर से हाईकोर्ट में दाखिल हलफनामे में बताया गया कि जांच के दौरान मामले में अंतरराज्यीय और अंतर सीमा तस्करी की आशंका से जुड़े सुराग सामने आये हैं. दिल्ली, तेलंगाना और पश्चिम बंगाल से जुड़े डिजिटल सुराग भी जांच के दौरान सामने आये हैं. इन्हीं पहलुओं को देखते हुए अब मामले की जांच नए सिरे से CBI करेगी.
तकनीकी संसाधनों की कमी भी बनी वजह
CBI जांच सौंपने के पीछे उन्नत तकनीकी संसाधनों की कमी भी एक प्रमुख कारण रही. राज्य की ओर से कोर्ट को बताया गया कि गेट एनालिसिस टेक्नोलॉजी जैसे उन्नत वैज्ञानिक जांच संसाधन फिलहाल झारखंड में उपलब्ध नहीं हैं. ऐसे में मामले से जुड़े डिजिटल और वैज्ञानिक साक्ष्यों की गहन जांच के लिए केंद्रीय एजेंसी की विशेषज्ञता और तकनीकी संसाधनों का इस्तेमाल किया जाएगा.
मामले में दो जुलाई को महाधिवक्ता ने CBI को जांच में शामिल करने पर सहमति जतायी थी. इसके बाद CBI निदेशक को मामले में पक्षकार बनाया गया. अब हाईकोर्ट के आदेश के बाद केस की पूरी जांच CBI के स्तर से आगे बढ़ेगी.
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