50 गांवों के मरीजों की ‘आशा’ बना आशा विहार, यहां होता है मुफ्त इलाज
आशा विहार का मुख्य द्वार | Prabhat Khabar Network
बोकारो के आशा विहार संस्थान, 50 गांवों के लगभग 50,000 लोगों को मुफ्त चिकित्सा सुविधा प्रदान कर रहा है। जनवरी 2023 से अगस्त 2026 तक 2,000 से अधिक मरीजों को लाभ मिला है, जिसमें एलोपैथी, होम्योपैथी, आयुर्वेद, एक्यूपंक्चर और फिजियोथैरेपी जैसी विभिन्न पद्धतियाँ शामिल हैं।
बोकारो. जरीडीह प्रखंड के चिलगड्डा स्थित आशा विहार में आसपास की आठ पंचायतों के करीब 50 गांवों के मरीजों का नि:शुल्क इलाज किया जा रहा है. वर्ष 2023 से शुरू हुई इस सुविधा का लाभ चिलगड्डा के अलावा गायछंदा, गांगजोरी, बेलडीह, अराजू, भस्की, पाथुरिया तथा सीमावर्ती पश्चिम बंगाल की डामरू पंचायत के ग्रामीण उठा रहे हैं. संस्थान में इलाज के साथ मरीजों को दवाओं पर विशेष छूट भी दी जाती है.
आठ पंचायतों के ग्रामीणों को मिल रही सुविधा
आशा विहार के असिस्टेंट प्रोजेक्ट मैनेजर राकेश कुमार के अनुसार, जनवरी से अगस्त 2026 तक इन पंचायतों के दो हजार से अधिक मरीज यहां उपचार करा चुके हैं. वर्ष 2023, 2024 और 2025 में भी बड़ी संख्या में ग्रामीणों ने चिकित्सा सुविधा का लाभ लिया. संस्थान में सामान्य बीमारियों के इलाज के साथ मरीजों की जरूरत के अनुसार अलग-अलग चिकित्सा पद्धतियों की सुविधा उपलब्ध है.
कई चिकित्सा पद्धतियों से हो रहा उपचार
आशा विहार में एलोपैथी, होम्योपैथी और आयुर्वेद के अलावा एक्यूपंक्चर और फिजियोथैरेपी की सुविधा भी दी जा रही है. यहां आयुर्वेद के चिकित्सक डॉ. दिलीप, होम्योपैथी के डॉ. पवन कुमार सिंह और एलोपैथी के डॉ. सुभाष के अलावा डॉ. सानू राम, डॉ. विकास समेत अन्य चिकित्सक सेवाएं दे रहे हैं. संस्थान से जुड़े लोगों के अनुसार, ग्रामीणों को एक ही स्थान पर विभिन्न चिकित्सा पद्धतियों का विकल्प मिलना सुविधा का महत्वपूर्ण पक्ष है.
1995 में शुरू हुआ था आशा विहार
आशा विहार संस्थान की स्थापना वर्ष 1995 में जर्मन मूल की क्लाउडिया स्काउड ने की थी. आसपास के ग्रामीण उन्हें ‘कल्याणी दीदी’ के नाम से जानते हैं. शुरुआती दौर में यहां खासकर लकवा और गठिया जैसी समस्याओं से पीड़ित मरीजों का एक्यूपंक्चर और एक्यूप्रेशर पद्धति से इलाज किया जाता था.

शुरुआत में मरीजों से पांच रुपये का टोकन शुल्क लिया जाता था. लंबे समय तक इसी मामूली शुल्क पर उपचार की सुविधा जारी रही. बाद में टोकन राशि बढ़कर 90 रुपये तक पहुंची. संस्थान को जर्मनी की पीस बर्ड सोसाइटी से मिलने वाला फंड भी समय के साथ सीमित हुआ.
आर्थिक चुनौतियों के बावजूद जारी है सेवा
संस्थान में करीब 48 कर्मचारी कार्यरत हैं, जिनमें 35 चिकित्सा सेवा से जुड़े हैं. ऐसे में संस्थान के संचालन और चिकित्सा सेवाओं का खर्च जुटाना चुनौतीपूर्ण है. इसके बावजूद चिह्नित गांवों के मरीजों के लिए नि:शुल्क इलाज की सुविधा जारी रखी गयी है. संस्थान प्रबंधन के अनुसार, भविष्य में इस सुविधा का दायरा बढ़ाने की योजना है.
इलाज के साथ जरूरतमंदों की मदद
आशा विहार की गतिविधियां केवल चिकित्सा सेवा तक सीमित नहीं हैं. जरूरतमंद लोगों के बीच समय-समय पर मच्छरदानी, कंबल और अन्य उपयोगी सामग्री का वितरण किया जाता है. गंभीर या विशेष उपचार की जरूरत वाले मरीजों को बाहर ले जाने के लिए संस्थान की ओर से आपातकालीन वाहन की सुविधा भी उपलब्ध करायी जाती है.
संस्थान से जुड़े जब्बार अंसारी के अनुसार, आठ पंचायतों के मरीजों को नि:शुल्क चिकित्सा सुविधा मिलने से ग्रामीण परिवारों को राहत मिली है. असिस्टेंट प्रोजेक्ट मैनेजर राकेश कुमार ने कहा कि आर्थिक चुनौतियों के बावजूद स्थानीय मरीजों को चिकित्सा सुविधा उपलब्ध कराने का प्रयास जारी है और इसका दायरा आगे बढ़ाने की योजना है.
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